लू से बचने के लिए अलग-अलग राज्यों में आज भी खाए जाते हैं ये 10 पारंपरिक पकवान, स्वाद में भी हैं लाजवाब
गर्मियों में शरीर को अंदर से ठंडा रखने और लू से बचाव में फायदेमंद हैं भारतीय राज्यों की ये डिशेज। ...और पढ़ें

लू से बचाते हैं 10 राज्यों के ये देसी व्यंजन (Picture Courtesy: Instagram)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की चिलचिलाती गर्मी और लू से बचने के लिए हमारे पूर्वजों ने खान-पान के कुछ ऐसे तरीके विकसित किए हैं, जो न केवल स्वादिष्ट हैं बल्कि शरीर को अंदर से ठंडा रखने में भी मदद करते हैं।
अलग-अलग राज्यों की इन पारंपरिक डिशेज में दही, कच्चा आम, नारियल और इमली जैसे ठंडे तासीर वाली चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। आइए जानते हैं भारत के 10 राज्यों के उन खास व्यंजनों के बारे में जो इस गर्मी आपके किचन का हिस्सा बन सकते हैं।
कच्चा आमेर टोक दाल (पश्चिम बंगाल)

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बंगाल में गर्मियों की दोपहर इस खट्टी दाल के बिना अधूरी है। मसूर की दाल को हल्दी के साथ उबालकर, इसमें कच्चे आम के स्लाइस डाले जाते हैं। सरसों के तेल में सरसों के दाने और सूखी लाल मिर्च का तड़का इसे एक बेहतरीन सोंधापन देता है। यह दाल पेट को ठंडा रखती है और लू से बचाती है।
थायिर सादम (तमिलनाडु)

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इसे कर्ड राइस के नाम से भी जाना जाता है। पके हुए नरम चावल में दही, दूध और बारीक कटी ककड़ी, गाजर और कच्चा आम मिलाया जाता है। घी में राई, अदरक, कढ़ी पत्ता और हींग का तड़का इसे प्रोबायोटिक से भरपूर एक बेहतरीन डिश बनाता है।
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पच्ची पुलुसु (आंध्र प्रदेश)

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यह बिना आग पर पकाए बनाई जाने वाली एक बेहतरीन कच्ची करी है। इसमें इमली के रस को प्याज, भुनी हुई हरी मिर्च और गुड़ के साथ मिलाया जाता है। लहसुन और राई का तड़का इसके स्वाद को दोगुना कर देता है। यह हाइड्रेशन के लिए बेस्ट है।
अंगमली मंगा करी (केरल)

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केरल की यह मशहूर करी कच्चे आम और नारियल के दूध से बनाई जाती है। इसमें अदरक, हरी मिर्च और कढ़ी पत्तों का इस्तेमाल होता है। नारियल का दूध पेट की जलन को शांत करता है और कच्चे आम की खटास ताजगी देती है।
पखला भात (ओडिशा)

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ओडिशा का यह पारंपरिक खाना रात भर पानी में भिगोए हुए चावलों से बनता है। अगले दिन इसमें दही, अदरक और भुनी हुई मिर्च मिलाकर सरसों के तेल का तड़का लगाया जाता है। यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करने का सबसे अच्छा तरीका है।
पोइता भात और आलू पितिका (असम)

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असम में फर्मेंटेड चावलों को प्याज और हरी मिर्च के साथ खाया जाता है। इसके साथ सरसों तेल वाले मैश किए हुए आलू का कॉम्बिनेशन गर्मी में ऊर्जा और ठंडक दोनों देता है।
कढ़ी चावल (पंजाब)

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उत्तर भारत में गर्मियों का सबसे पसंदीदा खाना कढ़ी चावल है। दही और बेसन के मिश्रण को धीमी आंच पर पकाकर बनाया जाता है। दही की तासीर ठंडी होने के कारण यह पाचन में सहायक होती है।
रेडू (हिमाचल प्रदेश)

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हिमाचल का रेडू मूल रूप से तड़का लगा हुआ दही है। इसमें प्याज और लहसुन को हल्का भूनकर फेंटे हुए दही में मिलाया जाता है। इसे अक्सर गर्म चावल के साथ परोसा जाता है, जो पहाड़ों की गर्मियों में भी ठंडक का अहसास कराता है।
सौथेकाई मोसरु पल्या (कर्नाटक)

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यह एक तरह की खीरे की करी है। बारीक कटे हुए खीरे को राई और उड़द दाल के तड़के के साथ भूनकर दही में मिलाया जाता है। खीरे में पानी की मात्रा ज्यादा होने के कारण यह शरीर को हाइड्रेटेड रखता है।
सोल कढ़ी (गोवा और महाराष्ट्र)

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कोंकण क्षेत्र की यह मशहूर ड्रिंक कम करी, कोकम और नारियल के दूध से बनती है। कोकम का गुलाबी रंग और नारियल की मलाईदार बनावट इसे एक बेहतरीन डाइजेस्टिव और कूलिंग एजेंट बनाती है।