बिना चोट के शरीर पर नीले निशान, हो सकते हैं एप्लास्टिक एनीमिया के संकेत; नजर आते ही हो जाएं सावधान
एप्लास्टिक एनीमिया एक दुर्लभ बीमारी है, जिसके लक्षणों की जल्द से जल्द पहचान करना जरूरी है।

एप्लास्टिक एनीमिया के लक्षणों को न करें इग्नोर (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। एनीमिया शब्द सुनते ही अक्सर हमारे मन में खून की कमी या आयरन की कमी का ख्याल आता है। लेकिन एप्लास्टिक एनीमिया इससे कहीं ज्यादा गंभीर मेडिकल कंडीशन है। यह एक ऐसा ब्लड डिसऑर्डर है जिसमें शरीर की बोन मैरो जरूरी मात्रा में नए ब्लड सेल्स का निर्माण करना बंद कर देती है।
जब शरीर में नए रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स नहीं बनते, तो व्यक्ति न केवल बहुत ज्यादा थकान महसूस करता है, बल्कि उसमें इन्फेक्शन और ब्लीडिंग का भी खतरा भी बढ़ जाता है। आइए एप्लास्टिक एनीमिया अवेयरनेस डे पर डॉ. नितिन अग्रवाल (एमडी, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, एचओडी - डोनर रिक्वेस्ट मैनेजमेंट, डीकेएमएस फाउंडेशन इंडिया) से जानते हैं इसके लक्षण कैसे होते हैं और इसके कारण क्या हैं।
एप्लास्टिक एनीमिया के लक्षण कैसे होते हैं?
हैरानी की बात यह है कि कई बार एप्लास्टिक एनीमिया के कोई शुरुआती लक्षण नहीं दिखते, लेकिन जब अगर इसके लक्षण नजर आते भी हैं, तो वे इस बात पर निर्भर करते हैं कि शरीर में किस तरह के ब्लड सेल्स की कमी हुई है। हालांकि, इसके सामान्य संकेत ऐसे हो सकते हैं-
- बहुत थकान और कमजोरी- हीमोग्लोबिन की कमी से शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन कम पहुंचती है।
- सांस फूलना और तेज धड़कन- मामूली काम करने पर भी सांस फूलना या दिल की धड़कन का अनियमित होना।
- त्वचा का पीला पड़ना और रैशेज- चेहरे और शरीर की रंगत फीकी पड़ जाना।
- बार-बार इन्फेक्शन होना- व्हाइट ब्लड सेल्स की कमी से शरीर बीमारियों से लड़ने की शक्ति खो देता है, जिससे बार-बार बुखार या लंबे समय तक चलने वाले इन्फेक्शन हो सकते हैं।
- अकारण नीले निशान और ब्लीडिंग- बिना किसी बड़ी चोट के शरीर पर नीले निशान पड़ना, मसूड़ों या नाक से खून बहना और घाव होने पर ब्लीडिंग का न रुकना।
एप्लास्टिक एनीमिया अचानक भी हो सकता है और धीरे-धीरे समय के साथ बदतर भी हो सकता है। यह कंडीशन एक्यूट भी हो सकती है और क्रोनिक भी, जो कि जानलेवा साबित हो सकती है।
क्यों होता है एप्लास्टिक एनीमिया?
एप्लास्टिक एनीमिया का सबसे सामान्य कारण इम्यून सिस्टम गलती से बोन मैरो में मौजूद स्टेम सेल्स पर हमला करना है। इसके अलावा कुछ और फैक्टर्स भी बोन मैरो को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जैसे-
- रेडिएशन और कीमोथेरेपी- कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली ये तकनीकें कभी-कभी स्वस्थ बोन मैरो सेल्स को भी प्रभावित कर देती हैं।
- जहरीले केमिकल का संपर्क- कीटनाशकों या बेंजीन जैसे हानिकारक केमिकल्स के संपर्क में आने से भी यह खतरा बढ़ जाता है।
- ऑटोइम्यून डिसऑर्डर- ऐसी बीमारियां जिनमें शरीर खुद की सेल्स को दुश्मन मानकर नष्ट करने लगता है।
- दवाओं का प्रभाव- कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण भी बोन मैरो डैमेज हो सकती है।
- अज्ञात कारण- कई मामलों में डॉक्टरों के लिए भी कारण का पता लगाना मुश्किल होता है कि आखिर यह स्थिति क्यों हुई।
एप्लास्टिक एनीमिया किसी भी उम्र में हो सकता है। यह एक गंभीर स्थिति है जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। अगर ऊपर बताए गए लक्षण लगातार महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सही समय पर पहचान और सही उपचार ही इस दुर्लभ बीमारी से बचाव का रास्ता है।
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