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    डिमेंशिया का खतरा 45% तक कम करता है व्यायाम: WHO के अनुसार रोजाना 30 मिनट की एरोबिक है जरूरी

    Updated: Tue, 21 Jul 2026 04:36 PM (GMT+05:30)

    व्यायाम मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है और डिमेंशिया के खतरे को कम कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, नियमित शारीरिक गतिविधि से डिमे ...और पढ़ें

    नियमित व्यायाम से दिमाग रहेगा स्वस्थ, डिमेंशिया का जोखिम 45% तक घटेगा (Picture Credit- AI Generated)

    नियमित व्यायाम से दिमाग रहेगा स्वस्थ, डिमेंशिया का जोखिम 45% तक घटेगा (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. WHO के अनुसार व्यायाम से डिमेंशिया का खतरा 45% तक कम

    2. व्यायाम संज्ञानात्मक क्षमता, रक्त संचार और मूड को सुधारता है

    3. एरोबिक, शक्ति और संतुलन व्यायाम मस्तिष्क के लिए अत्यंत लाभकारी हैं

    ब्रह्मानंद मिश्र, नई दिल्ली। व्यायाम हमारे शरीर को स्वस्थ रखता है, लेकिन कभी आपने सोचा है कि इसका हमारे दिमाग पर क्या असर होता है? कुछ कदम टहलना, कुछ मील साइकिल चला लेना या स्विमिंग पूल में तैर लेना, आपको सेहतमंद रखता ही है, साथ ही यह दिमागी सुकून भी देता है। या कहें हमारी काग्निटिव फिटनेस को सही रखने में व्यायाम या वर्कआउट की उतनी ही भूमिका होती है। आंकड़े बताते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ दिमागी क्षमता शिथिल पड़ने लगती है, यही से डिमेंशिया जैसे खतरों की शुरुआत होती है।

    एक अनुमान है कि 60 वर्ष की उम्र पार कर चुके 88 लाख भारतीय डिमेंशिया के साथ जी रहे हैं और भारतीय बुजुर्गों में इसकी व्यापकता 7.4 प्रतिशत तक हो चुकी है। दुनियाभर में डिमेंशिया ग्रस्त लोगों का आंकड़ा 5.7 करोड़ को पार कर चुका है और हर साल एक करोड़ नए मामले सामने आते हैं। दरअसल, यह सतत बढ़ने वाली दिमाग की बीमारी है, जो याददाश्त, सोचने की क्षमता को बाधित करती है, इससे दैनिक क्रियाकलाप में भी व्यवधान आने लगता है। इसके बाद दिनचर्या सामान्य नहीं रह जाती है। फिलहाल इसका उपचार तो नहीं है, पर इसे रोका जा सकता है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक हालिया दिशानिर्देश बताता है कि दिनचर्या में सुधार करने, शारीरिक सक्रियता बढ़ाने और धूमपान, डायबिटीज व उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखने से डिमेंशिया के खतरों को 45 प्रतिशत तक टाला जा सकता है।

    स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क

    जीवनकाल का मध्यान्ह शारीरिक और मानसिक सक्रियता का ढलान होता है और यही वह समय होता है, जब ज्यादातर लोग क्षीण होती क्षमताओं को सक्रियता के जरिये थामने के बजाय उसे टालने लगते हैं। एक हालिया अमेरिकी शोध बताता है कि अगर जीवन में फिटनेस को लेकर अनुशासन बना रहे तो दिमाग भी सेहतमंद बना रहता है। शोध की मानें तो 35 से 55 वर्ष आयु वर्ग में बढ़ाई गई शारीरिक सक्रियता आने वाले वर्षों में दिमाग की सेहत को बेहतर बनाए रखती है।

    वर्कआउट का कैसे होता है प्रभाव

    व्यायाम करने की आदत से काग्निटिव क्षमता में सुधार होता है। साथ ही, रक्तसंचार बेहतर होने से कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम स्वस्थ रहता है, जो मस्तिष्क की क्षमता बनाए रखने के लिए भी जरूरी है। व्यायाम से डोपामाइन, सेरोटोनिन और एंडोर्फिन जैसे हार्मोन रिलीज होते हैं, जो 'अच्छा महसूस कराने वाले' हार्मोन हैं। ये न्यूरोट्रांसमीटर यानी नर्व सेल्स के बीच केमिकल मैसेंजर का भी काम करते हैं। व्यायाम करने से रक्तचाप और रक्त शुगर नियंत्रण में रहता है और सूजन की आशंका कम, यह सब दिमाग की बेहतर कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक है। दशकों पहले यह प्रमाणित हो चुका है कि दौड़ने जैसे एरोबिक एक्सरसाइज से मस्तिष्क कोशिकाओं का निर्माण तेज होता है। इससे मस्तिष्क की कार्यक्षमता में सतत सुधार होता है।

    खबरें और भी

    व्यायाम से कैसे जुड़ी है मस्तिष्क की क्षमता

    • रक्त संचार का मस्तिष्क पर असर : मस्तिष्क पूरी तरह रक्त वाहिकाओं पर निर्भर है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, बढ़े हुए कोलेस्ट्राल और मोटापे से मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों को नुकसान होने लगता है, जिससे स्ट्रोक और वैस्कुलर डिमेंशिया का खतरा बढ़ता है। नियमित एरोबिक व्यायाम हृदय और रक्त वाहिकाओं को सही रखता है, जिससे मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह बेहतर बना रहता है।
    • सीखने की क्षमता में सुधार: हमारा मस्तिष्क जीवनभर नए न्यूरल कनेक्शन बनाता रहता है। व्यायाम ब्रेन-डिराइव्ड न्यूरोट्राफिक फैक्टर जैसे प्रोटीन का स्तर बढ़ाता है, जिसे मस्तिष्क के लिए प्राकृतिक उर्वरक कहा जा सकता है। यह न्यूरांस को जीवित रहने, नए संबंध बनाने तथा सीखने और याद रखने की क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।
    • एकाग्रता और निर्णय क्षमता में सुधार: योजना बनाना, समस्याओं का समाधान करना, कई कामों को एक साथ संभालना और ध्यान भटकने से बचना, ये सभी कार्य मस्तिष्क की एग्जीक्यूटिव फंक्शंस कहलाते हैं। अनेक शोध बताते हैं कि नियमित एरोबिक व्यायाम विशेष रूप से मध्य आयु और बुजुर्गों में कार्यशील स्मृति, मानसिक लचीलापन और ध्यान नियंत्रण में सकारात्मक सुधार लाता है।
    • मन की प्रसन्नता में वृद्धि: लगातार तनाव, चिंता और अवसाद मस्तिष्क की कार्यक्षमता और नींद दोनों को प्रभावित करते हैं। व्यायाम शरीर के तनाव हार्मोन को कम करता है और ऐसे रसायन (एंडोर्फिन आदि) रिलीज करता है जो मन को बेहतर महसूस कराते हैं। यदि इसमें खुली हवा, धूप, दोस्तों के साथ सैर, खेल या नृत्य भी शामिल हो जाए, तो इसके लाभ और बढ़ जाते हैं।
    • नींद की गुणवत्ता में सुधार: एक रात की खराब नींद भी अगले दिन सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक खराब नींद मस्तिष्क संबंधी जोखिमों को बढ़ा देती है। नियमित व्यायाम से नींद में सुधार होता है और शरीर की जैविक घड़ी को संतुलित रखने में मदद करता है। हालांकि, सोने से ठीक पहले बहुत अधिक तीव्र व्यायाम करने से बचें, क्योंकि इससे कुछ लोगों को नींद आने में कठिनाई हो सकती है।

    कौन-सा व्यायाम है सबसे बेहतर

    कोई एक व्यायाम जादुई उपाय नहीं है। विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का संतुलित मिश्रण सबसे बेहतर होता है।

    • एरोबिक व्यायाम : तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना, तैराकी, रोइंग या नृत्य। जिन गतिविधियों से सांस तेज चले, लेकिन आप थोड़ी-बहुत बात कर सकें। मस्तिष्क के लिए सबसे अधिक वैज्ञानिक प्रमाण इसी प्रकार के व्यायाम के पक्ष में हैं।
    • शक्ति बढ़ाने वाले व्यायाम : सप्ताह में कम-से-कम दो दिन शरीर के प्रमुख मांसपेशी समूहों के लिए बाडीवेट एक्सरसाइज, रेजिस्टेंस बैंड या हल्के वजन का उपयोग करें। इससे शरीर का मेटाबालिज्म बेहतर रहता है और याददाश्त व निर्णय क्षमता को भी लाभ मिल सकता है।
    • संतुलन और समन्वय वाले अभ्यास : योग, ताई-ची, नृत्य या रैकेट खेल मस्तिष्क के ध्यान और संतुलन से जुड़े हिस्सों को सक्रिय रखते हैं तथा बुजुर्गों में गिरने का जोखिम कम करते हैं।
    • डुअल-टास्क गतिविधियां : जैसे चलते हुए सरल मानसिक गणना करना, नए डांस स्टेप सीखना या ऐसा कोई नया कौशल सीखना जिसमें शरीर और दिमाग दोनों साथ काम करें। इन्हें धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से अपनाएं।

    कितना व्यायाम पर्याप्त है

    डब्ल्यूएचओ के अनुसार वयस्कों को सप्ताह में 150-300 मिनट मध्यम तीव्रता का एरोबिक व्यायाम (या उसका आधा समय तीव्र व्यायाम), सप्ताह में कम-से-कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम तथा विशेष रूप से बुजुर्गों के लिए संतुलन सुधारने वाले अभ्यास करने चाहिए। पूर्णता के पीछे भागने के बजाय शुरुआत केवल 10 मिनट की सैर से करें तो भी लाभ मिलता है। सीढ़ियां चढ़ना, बागवानी करना, फोन पर बात करते समय टहलना, हर छोटी गतिविधि मायने रखती है।

    ऐसे बनाएं साप्ताहिक योजना

    • सप्ताह में पांच दिन 30 मिनट की तेज चाल से सैर।
    • सप्ताह में दो दिन शक्ति बढ़ाने वाले व्यायाम।
    • सप्ताह में दो से तीन दिन योग या संतुलन संबंधी अभ्यास।
    • लंबे समय तक बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठकर कुछ मिनट चलना।


    मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए व्यायाम के साथ-साथ रक्तचाप, रक्त शर्करा और कोलेस्ट्राल को नियंत्रित रखें। धूमपान छोड़ें, शराब का सीमित सेवन करें, फल, सब्जियां, साबुत अनाज, मेवे और पर्याप्त प्रोटीन वाला संतुलित आहार लें। अच्छी नींद लें, परिवार और मित्रों से जुड़े रहें, नई चीजें सीखते रहें और किसी भी जोखिम वाले कार्य में सिर की सुरक्षा अवश्य करें।

    यदि लगातार सिरदर्द, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, संतुलन बिगड़ना, दौरे पड़ना, बोलने में कठिनाई, व्यवहार में बदलाव या याददाश्त में स्पष्ट गिरावट जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें केवल बढ़ती उम्र मानकर न टालें। समय रहते डॉक्टर से सलाह लें।

    सबसे अच्छा व्यायाम वही है जिसे आप नियमित रूप से कर सकें। इसके लिए महंगे जिम की आवश्यकता नहीं है। रोज की सैर, शाम का योग, सप्ताहांत में नृत्य या बच्चों के साथ खेलना, ये सभी आपके मस्तिष्क के लिए उतने ही लाभकारी हो सकते हैं।

    याद रखिए, व्यायाम केवल शरीर को फिट रखने का साधन नहीं है, बल्कि साफ सोच, बेहतर मानसिक संतुलन, आत्मनिर्भर जीवन और लंबे समय तक स्वस्थ मस्तिष्क बनाए रखने का सबसे सरल और प्रभावी निवेश है।

    मानसिक सेहत के लिए आवश्यक है सक्रियता

    अक्सर हम व्यायाम को केवल शरीर से जोड़कर देखते हैं, वजन कम करना, मांसपेशियां बनाना या हृदय को स्वस्थ रखना, लेकिन मस्तिष्क का स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शरीर के कुल वजन का केवल दो प्रतिशत होने के बावजूद मस्तिष्क शरीर की लगभग 20 प्रतिशत आक्सीजन और ऊर्जा का उपयोग करता है। उसे हर पल पर्याप्त रक्त प्रवाह, संतुलित रक्त शर्करा, अच्छी नींद और मानसिक चुनौतियों की आवश्यकता होती है ताकि वह स्वस्थ और सक्रिय बना रहे। शारीरिक गतिविधि इन सभी पहलुओं पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। केवल एक तेज चाल से की गई सैर भी कुछ घंटों के भीतर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और मनोदशा में सुधार ला सकती है।

    महीनों और वर्षों तक नियमित व्यायाम याददाश्त, निर्णय लेने की क्षमता और मस्तिष्क की दीर्घकालिक कार्यक्षमता को बनाए रखने में सहायक होता है। हालांकि, व्यायाम पूरी तरह डिमेंशिया या अन्य तंत्रिका संबंधी बीमारियों को रोक देगा, यह पूरा सच नहीं है, लेकिन लंबे समय तक निष्क्रिय बैठे रहना एक ऐसा जोखिम है जिसे हम टाल सकते हैं। द लांसेट कमीशन की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार शारीरिक निष्क्रियता, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धूमपान और अन्य बदले जा सकने वाले जोखिम कारकों पर नियंत्रण रखकर दुनिया भर में डिमेंशिया के मामलों को काफी हद रोका या कुछ समय के लिए टाला जा सकता है।- डॉ. मनीष वैश्य, डायरेक्टर एवं एचओडी, न्यूरोसाइंसेज, मेदांता, नोएडा

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