थकान समझकर डिप्रेशन को तो नहीं कर रहीं नजरअंदाज, डिलीवरी के बाद महिलाएं इन लक्षणों पर जरूर दें ध्यान
प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद महिलाओं की मानसिक सेहत पर ध्यान देना बेहद जरूरी है, क्योंकि हार्मोनल बदलाव और नई जिम्मेदारियों से तनाव बढ़ सकता है।

नई मां की मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना जरूरी (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। प्रेग्नेंसी और मां बनना किसी भी महिला के लिए काफी खूबसूरत पड़ाव होता है। हालांकि, इस दौरान शरीर में भी कई बड़े बदलाव होते हैं। हार्मोन लेवल में बदलाव आता है, जिसके कारण शरीर और भावनाओं में भी बदलाव होते हैं।
आमतौर पर प्रेग्नेंसी में या उसके बाद लोग हेल्थ केयर पर पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन महिला की मानसिक सेहत के बारे में काफी कम बात की जाती है। प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद महिलाओं की मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर ध्यान देना काफी जरूरी है।
घबराहट, लगातार उदासी, सोने में दिक्कत, तनाव या मां बनने की नई जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बैठाना मेंटल हेल्थ को काफी प्रभावित करता है। इसलिए जरूरी है कि सही समय पर इनकी पहचान करना इस समस्या से बाहर निकलने में महिला की मदद कर सकता है।
किन वजहों से प्रभावित होती है मेंटल हेल्थ?
- प्रेग्नेंसी एंग्जायटी- बच्चे के विकास, डिलीवरी में होने वाली मुश्किलें, मां बनने की जिम्मेदारियों को लेकर महिला के मन में डर और चिंता बनी रहती है।
- एनीमिया- प्रेग्नेंसी में हीमोग्लोबिन कम होने की वजह से कमजोरी, थकान और चक्कर जैसी समस्याएं हो सकती है, जो इमोशनल हेल्थ पर भी असर डालती हैं।
- प्रेग्नेंसी कॉम्प्लिकेशन- हाई ब्लड प्रेशर, प्री-एक्लेम्पसिया या जेस्टेशनल डायबिटीज जैसी स्थितियों में मेंटल स्ट्रेस भी बढ़ता है, जिसके लिए लगातार मेडिकल केयर की जरूरत होती है।
- लेबर पेन का डर- डिलीवरी का दर्द, उस दौरान होने वाली समस्याएं या बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर लगने वाला डर महिला की मेंटल हेल्थ को प्रभावित करता है।
- नींद की कमी- प्रेग्नेंसी में होने वाला बदलाव, बार-बार पेशाब आना और डिलीवरी के बाद को बच्चे को दूध पिलाने या उसकी देखभाल के लिए जगने के कारण नींद पूरी नहीं हो पाती। इस वजह से मेंटल स्ट्रेस बढ़ता है।
- पोस्टपार्टम डिप्रेशन- बच्चे के जन्म के बाद कई महिलाएं पोस्टपार्टम डिप्रेशन का शिकार होती है। डिलीवरी के बाद लगातार उदासी, रोने का मन करना, चिड़चिड़ापन, बच्चे से अटैचमेंट महसूस न होना या निराशा जैसी भावनाओं को थकान समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।
- पोस्टपार्टम एंग्जायटी- बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर हमेशा डर या चिंता बनी रहना भी मेंटल हेल्थ को प्रभावित करता है।
- ब्रेस्टफीडिंग और रिकवरी- डिलीवरी के बाद शरीर में दर्द, शरीर में आए बदलाव और ब्रेस्टफीडिंग में आने वाली परेशानियां महिलाओं के तनाव को बढ़ा देती हैं।
डॉक्टर से कब संपर्क करें?
अगर प्रेग्नेंसी के दौरान या डिलीवरी के बाद महिला में ये लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए-
- उदास रहना या एंग्जायटी
- बार-बार रोना या बहुत चिड़चिड़ापन महसूस होना
- रोजमर्रा के कामों में रुचि खत्म हो जाना
- नींद न आना
- बच्चे की या खुद की देखभाल न कर पाना
कैसे करें मदद?
- प्रेग्नेंसी के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद होने वाले रूटीन चेकअप में मेंटल हेल्थ पर भी बात होनी चाहिए। डॉक्टर महिला की फिजिकल हेल्थ के साथ-साथ मेंटल हेल्थ के बारे में भी जानकारी लें, ताकि समय रहते समस्या को पकड़ा जा सके।
- प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद पार्टनर और परिवार की अहम भूमिका होती है। घर के कामों और बच्चे की देखभाल में मदद करें, ताकि नई मां को आराम मिल सके। साथ ही, उनकी बातों को सुनें और समझने की कोशिश करें।
- हेल्दी खाना, आराम, हल्की फिजिकल एक्टिविटी और रिलैक्सेशन तकनीकें मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद करती हैं।
(डॉ. मधुलिका सिंह, सीनियर कंसल्टेंट ऑब्स्ट्रीशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट एंड इनफर्टिलिटी स्पेशेलिस्ट, अंकुरा हॉस्पिटल फॉर वुमन एंड चिल्ड्रन, औंध, पूणे)
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