रोजाना कार चलाने से कमर में होता है दर्द? स्पाइन सर्जन ने बताए बचाव के तरीके
लगातार ड्राइविंग के कारण कमर, गर्दन और टेल बोन में दर्द की समस्या हो सकती है। ...और पढ़ें
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ड्राइविंग के कारण बैक पेन से हैं परेशान? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सफर को आसान बनाने के लिए कई लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट की जगह रोजाना अपनी कार से ट्रैवल करना पसंद करते हैं। ऐसे में कई बार लंबी ड्राइविंग के बाद पीठ और टेल बोन में दर्द या गर्दन में अकड़न महसूस होने लगती है।
ड्राइव करते समय एक ही पोजीशन में बैठे रहने या झटके लगने के कारण हो सकता है। अगर आपको भी यह समस्या होती है, तो इससे कैसे बच सकते हैं इस बारे में डॉ. अमित शर्मा (स्पाइन सर्जन, जसलोक हॉस्पिटल, मुंबई) से जानते हैं।
ड्राइविंग आपकी पीठ को नुकसान क्यों पहुंचाती है?
- लगातार बैठना- घंटों एक ही जगह बैठने से रीढ़ की डिस्क पर दबाव पड़ता है।
- गलत पोस्चर- झुककर बैठने से कमर और गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव आता है।
- झटके- ऊबड़-खाबड़ सड़कें और गाड़ी का कंपन रीढ़ की स्पाइन में चोट लग सकती है।
- गतिहीनता- मूवमेंट न होने से ब्लड सर्कुलेशन रुकता है और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।
सुरक्षित सफर के लिए अपनाएं ये सावधानियां
- सही पोस्चर बनाए रखें- बैठने से पहले अपनी पिछली जेब से वॉलेट या फोन जैसी चीजें निकाल दें। स्टीयरिंग व्हील से सही दूरी पर बैठें और सीट को थोड़ा पीछे झुकाकर रखें। अगर जरूरत हो, तो लम्बर सपोर्ट पिलो का इस्तेमाल करें।
- नियमित ब्रेक लें- लगातार गाड़ी न चलाएं। हर 1.5 से 2 घंटे में 5-10 मिनट का ब्रेक लें। गाड़ी से बाहर निकलें, थोड़ा टहलें और स्ट्रेचिंग करें। इससे मांसपेशियों का तनाव कम होता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।
- गाड़ी का रखरखाव और आराम- ऐसी कार चुनें जिसकी सीटें आरामदायक हों। गाड़ी के शॉक एब्जॉर्बर और टायरों को दुरुस्त रखें, ताकि झटके कम लगें। अचानक ब्रेक लगाने से बचें और पैरों को पैडल पर कम्फर्टेबल में रखें।
- ड्राइविंग के दौरान हलचल- पूरी तरह जकड़ कर न बैठें। हर 15-20 मिनट में अपनी बैठने की स्थिति को थोड़ा बदलें। अगर हो सके, तो लंबी ड्राइव पर ड्राइविंग की जिम्मेदारी आपस में बांट लें।
अगर पहले से दर्द है, तो क्या करें?
अगर आप पहले से ही स्लिप डिस्क या साइटिका जैसी समस्या से जूझ रहे हैं, तो-
- हीट और कोल्ड थेरेपी- ब्रेक के दौरान गर्म या ठंडी सिकाई करें। सर्दियों में हीटेड सीट का इस्तेमाल राहत दे सकता है।
- सपोर्टिव एक्सेसरीज- टेल बोन के दर्द के लिए कॉक्सिक्स कुशन या कमर के लिए सपोर्ट बेल्ट का इस्तेमाल करें।
- दवाएं- डॉक्टर की बताई गई पेन रिलीफ दवाएं साथ में रखें।
कब है डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत?
दर्द को नजरअंदाज करना स्थिति को गंभीर बना सकता है। अगर ड्राइविंग के बाद आपको कुछ लक्षण दिखें, तो तुरंत स्पाइन एक्सपर्ट से संपर्क करें-
खबरें और भी
- दर्द जो कुछ दिनों से ज्यादा समय तक बना रहे।
- हाथों या पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन या कमजोरी महसूस होना।
- चलने या सीधा खड़े होने में परेशानी।