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अब मालूम होगी शरीर के बूढ़े होने की सटीक रफ्तार! वैज्ञानिकों ने बनाया बुढ़ापा मापने वाला 'PASTA' टूल

Published: Sun, 23 Aug 2026 08:03 AM (GMT+05:30)

साइंस का मानना है कि उम्र का बढ़ना बहुत सी बीमारियों का प्रमुख कारक है, ऐसे में यह टूल असरदार साबित हो सकता है।

पास्ता नामक टूल पता लगाएगा जैविक उम्र (Image Source: AI Generated)

पास्ता नामक टूल पता लगाएगा जैविक उम्र (Image Source: AI Generated)

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प्रेट्र, नई दिल्ल। साइंस हर दिन कोई न कोई खोज कर रहा है ताकि जीवन के चक्र को बेहतर ढंग से समझा जा सके। अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा तरीका खोज निकाला है जिसकी मदद से जैविक उम्र को भी मापा जा सकता है। दरअसल, यह तकनीक शरीर के अंदरूनी हिस्से के बारे में बताने में मदद करेगी कि हमारा शरीर आखिर कितनी गति से अंदर से बूढ़ा हो रहा है। 

पास्ता नामक टूल पता लगाएगा जैविक उम्र 

शोधकर्ताओं ने एक ऐसा टूल बनाया है, जो सेल (कोशिका) की जीन एक्टिविटी का विश्लेषण करके और यह पता लगाकर कि कौन से जीन एक्टिव या इनएक्टिव हैं, सेल की जैविक आयु का अंदाजा लगा सकता है। पास्ता नाम के इस टूल के बारे में "एडवांस्ड साइंस" जर्नल में एक अध्ययन छपा है। यह टूल ऐसे पदार्थों की पहचान कर सकता है, जो सेल की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया पर असर डालते हैं और पुरानी, बूढ़ी हो रही सेल्स और युवा, स्टेम सेल जैसी सेल्स के बीच अंतर बता सकता है। 

टूल बनाने के लिए लिए गए हेल्दी लोगों के टिश्यू सैंपल्स

स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट और स्टाकहोम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि उम्र बढ़ना कई बीमारियों के लिए बड़ा रिस्क फैक्टर है, लेकिन ऐसे तरीकों की कमी है, जिनसे यह मापा जा सके कि सेल्स कितनी तेजी से बूढ़ी हो रही हैं। उन्होंने पाया कि अधिक जैविक आयु वाली सेल्स में अक्सर डीएनए डैमेज और सेलुलर स्ट्रेस से जुड़े जींस की एक्टिविटी ज्यादा होती है। इस टूल को बनाने के लिए स्वस्थ लोगों से लिए गए 17,000 से अधिक टिश्यू सैंपल्स के जीन एक्टिविटी डाटा का विश्लेषण किया गया। 

अगले चरण में, शोधकर्ताओं ने पब्लिक डाटाबेस से 30 लाख से अधिक जीन प्रोफाइल्स का विश्लेषण करने के लिए पास्ता का इस्तेमाल किया, जहां सेल्स को हजारों दवाओं और जेनेटिक बदलावों के संपर्क में लाया गया था। विश्लेषण में ऐसे पदार्थों और जैविक सिग्नलिंग पाथवेज की पहचान की गई जो सेल की जैविक आयु को बढ़ाते या घटाते हुए दिखे। इनमें से कुछ नतीजों की पुष्टि बाद में इंसानी सेल्स पर किए गए लैब प्रयोग में की गई। शोधकर्ता जेरोम सैलिग्नान ने कहा, "इस टूल से यह पता कर सकते हैं कि समय के साथ सेल्स में कैसे बदलाव आते हैं व उम्र बढ़ने को चलाने वाली के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं।"

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