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    कामकाजी महिलाओं में बढ़ रही है हार्ट डिजीज और एनीमिया जैसी बीमारियां, बचाव के लिए जरूरी हैं ये उपाय

    Updated: Sun, 21 Sep 2025 02:48 PM (IST)

    आज के दौर में महिलाएं घर और ऑफिस दोनों की बागडोर संभाल रही हैं। हालांकि इसका खामियाजा उनकी सेहत को भुगतना पड़ता है। अक्सर महिलाएं अपनी सेहत (Womens He ...और पढ़ें

    महिलाओं में बढ़ता बीमारियों का खतरा (Picture Courtesy: Freepik)
    महिलाओं में बढ़ता बीमारियों का खतरा (Picture Courtesy: Freepik)

    HighLights

    1. एक रिपोर्ट में कामकाजी महिलाओं की सेहत को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं
    2. देश की हर तीसरी महिला एनीमिया का शिकार है
    3. बड़ी संख्या में महिलाओं में हार्ट डिजीज के मामले भी बढ़ रहे हैं

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार दुनिया में कामकाजी महिलाएं घर और वर्कप्लेस, दोनों की जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं। लेकिन इस 'सुपरवुमन' की भूमिका निभाने की कीमत उनकी सेहत (Women's Health) को चुकानी पड़ रही है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक देश की हर पांचवीं महिला पीसीओएस से जूझ रही है, हर तीसरी महिला एनीमिया की शिकार है, और एक बड़ी आबादी में हार्ट डिजीज (Heart Disease in Women) का खतरा काफी ज्यादा है। ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करते हैं।

    ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं अपनी सेहत की ओर ज्यादा ध्यान दें, खासकर अगर वे ऑफिस और घर दोनों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। ये बीमारियां ज्यादातर लाइफस्टाइल से जुड़ी हैं, इसलिए इनसे बचने के लिए भी जीवनशैली में सुधार (Health Tips for Women) करने की जरूरत है। आइए जानें इस बारे में।

    किन कारणों से बढ़ रही हैं ये बीमारियां?

    • अनियमित खानपान- देर रात तक काम, समय की कमी, और सुविधा के चलते जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड्स और बाहर के खाने का बढ़ता चलन। पोषक तत्वों की कमी और कैलोरी की ज्यादा मात्रा एक बड़ी समस्या है।
    • तनाव- ऑफिस के टार्गेट और घर की जिम्मेदारियों के बीच तनाव एक स्थाई साथी बन गया है। क्रॉनिक स्ट्रेस शरीर के हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ता है, जो पीसीओएस और हार्ट डिजीज का प्रमुख कारण बनता है।
    • फिजिकल इनएक्टिविटी- डेस्क जॉब होने के कारण लगातार 8-9 घंटे बैठे रहना, एक्सरसाइज के लिए समय न निकाल पाना, और थकान के कारण फिजिकल एक्टिविटी की कमी मोटापा, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की समस्या को बुलावा देती है
    • अनियमित नींद- पूरी और गहरी नींद न ले पाना शरीर की मरम्मत की प्रक्रिया में बाधा डालता है और मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है।

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    इनसे बचने के लिए क्या करें?

    हेल्दी डाइट लें

    • नाश्ता जरूर करें- दिन की शुरुआत प्रोटीन और फाइबर से भरपूर हेल्दी नाश्ते से करें।
    • घर का बना खाना- घर का बना खाना खाने की आदत डालें।
    • आयरन और पोषक तत्व- एनीमिया से बचने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, दालें, और नट्स की मात्रा खाने में बढ़ाएं।
    • पानी पीते रहें- दिनभर में भरपूर मात्रा में पानी पीना मेटाबॉलिज्म ठीक रखने के लिए जरूरी है।

    फिजिकली एक्टिव रहें

    • छोटे ब्रेक- ऑफिस में लगातार बैठने की बजाय हर घंटे 5 मिनट का ब्रेक लेकर टहल लें।
    • एक्सरसाइज को रूटीन में शामिल करें- रोजाना सिर्फ 30 मिनट की तेज वॉक, योग, या डांस भी सेहत में बड़ा बदलाव ला सकता है।

    स्ट्रेस मैनेजमेंट सीखें

    • 'मी-टाइम' निकालें- दिन में कम से कम 15-20 मिनट सिर्फ अपने लिए निकालें। उस समय किताब पढ़ें, म्युजिक सुनें या मेडिटेशन करें।
    • हॉबी को समय दें- ऐसा काम करें जिससे आपको खुशी मिलती हो।

    नींद पूरी करें

    • रोजाना 7-8 घंटे की क्वालिटी स्लीप लेना बेहद जरूरी है। सोने से एक घंटे पहले मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बना लें।

    नियमित हेल्थ चेक-अप

    • साल में कम से कम एक बार पूरी बॉडी का प्रोफाइल चेक-अप, जिसमें ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, विटामिन लेवल और हार्मोनल टेस्ट शामिल हों। समस्या का पता शुरुआत में चल जाने पर उसका इलाज आसान होता है।

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    Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।