जंकफूड और मोबाइल ने बिगाड़ी बच्चों की सेहत, कमजोर हो रहा इम्यूनिटी सिस्टम
रिम्स ऑडिटोरियम में आयोजित नियोकान मेडिकल सेमिनार में डॉ. राकेश कुमार ने कमजोर इम्यूनिटी, डॉ. पीके चौधरी ने खांसी, डॉ. एस. सिडाना ने डायबिटीज और डॉ. र ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, रांची। वर्तमान समय में जंकफूड के बढ़ते चलन और खराब जीवनशैली का सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कमजोर हो रही है, जिसके कारण वे मौसम बदलते ही बीमार पड़ जा रहे हैं।
यह बातें शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार ने रिम्स ऑडिटोरियम में आयोजित नियोकान मेडिकल सेमिनार में कही। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे घर का पौष्टिक और संतुलित भोजन लेने के बजाय बाहर के खाने की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं।
इसके साथ ही उनका अधिकांश समय मोबाइल फोन और अन्य गैजेट्स पर बीत रहा है, जिससे उनकी शारीरिक गतिविधियां लगभग समाप्त हो गई हैं। खेल के मैदान से दूरी और निष्क्रिय जीवनशैली बच्चों की सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।
डॉ. राकेश कुमार ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के खानपान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान दें। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को जंकफूड से दूर रखें, उनके साथ समय बिताएं और उन्हें शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें। खासकर कामकाजी अभिभावकों को इस दिशा में अधिक सजग रहने की जरूरत है।
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रिम्स के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पीके चौधरी ने बच्चों में खांसी की समस्या पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खांसी कई कारणों से हो सकती है, जिनमें वायरल संक्रमण, अस्थमा, टीबी और निमोनिया प्रमुख हैं।
कम उम्र के बच्चों को बार-बार कफ सिरप देना सही नहीं है। पहले घरेलू उपाय अपनाएं, लेकिन समस्या लगातार बनी रहे तो चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। कई मामलों में नेबुलाइजेशन की भी आवश्यकता पड़ती है।
वहीं, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एस. सिडाना ने बताया कि बदलती जीवनशैली के कारण बच्चों में डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अब टाइप-1 डायबिटीज बच्चों में अधिक देखने को मिल रहा है। मोटापा, जंकफूड और आनुवांशिक कारण इसके प्रमुख कारण हैं। ऐसे बच्चों को नियमित रूप से इंसुलिन लेना पड़ता है।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि शेखर ने बच्चों में पेट से जुड़ी बीमारियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जंकफूड, अस्वच्छ खानपान और गलत जीवनशैली के कारण पेट के संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। नवजात शिशुओं के लिए मां का दूध अत्यंत आवश्यक है।
बाहर का दूध या पाउडर देने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, खासकर जब बोतल और पानी की साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता। सेमिनार में मौजूद विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वच्छता और समय पर चिकित्सकीय जांच बेहद जरूरी है।