आलस या तनाव? दोनों में है बड़ा फर्क, शरीर और दिमाग के ये संकेत बताएंगे असली वजह
हर बार थकान और काम में ध्यान न लगना आलस नहीं होता, बल्कि तनाव, मानसिक थकान भी इसकी वजह हो सकती है।

आलस और तनाव के बीच फर्क समझना जरूरी (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हर बार किसी तरह की मोटिवेशन महसूस न करने, थकान रहने और काम में ध्यान न लगा पाने का मतलब व्यक्ति का आलस नहीं होता। कई मामलों में तनाव, मानसिक थकान, खराब नींद और इमोशनल भारीपन भी किसी काम को शुरू करने या उसे खत्म करने में रुकावट बनता है।
आलस और तनाव के बीच फर्क कैसे करें?
आलस को ज्यादातर समय कम दिलचस्पी या काम करने की कम इच्छा से जोड़कर देखा जाता है। जबकि तनाव मन के भारीपन, चिंता और मानसिक थकान की वजह से होता है। ऐसे में यह हो सकता है कि कोई व्यक्ति तनाव से घिरे होने के बावजूद काम करना चाहता हो। लेकिन लगातार चिंता करने और दिमाग में चल रही बातों की वजह से वह काम ठीक से कर नहीं पा रहा। इसे कई लक्षणों से पहचाना जा सकता है:
सिर दर्द
मांसपेशियों में तनाव
नींद पूरी न होना
चिड़चिड़ापन
भूख में बदलाव
खुद पर करके अपने स्ट्रेस ट्रिगर की पहचान करें
एक आसान तरीका और है जो यह बता सकता है कि आप तनाव में थे। अपने ऊपर ध्यान दें कि जब आप अच्छे से आराम करते हैं तो आपको किसी काम को करने के लिए ज्यादा मोटिवेटेड महसूस होता है या नहीं। अगर हां, तो आप आराम न कर पाने की वजह से तनाव में थे। हालांकि, अगर हर तरह की गतिविधि करते समय आपको मोटिवेशन नहीं मिलती तो आपको अपने लाइफस्टाइल और इमोशनल हेल्थ पर खास ध्यान देने की जरूरत है।
तनाव को कम कैसे करें?
मन को शांत करने और फोकस बढ़ाने के लिए बड़े काम को एक साथ करने की जगह छोटे-छोटे कामों से शुरुआत करें।
अपने काम के बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें।
रोजाना डीप ब्रीदिंग की प्रैक्टिस करने के साथ मेडिटेशन को भी रूटीन का हिस्सा बनाएं।
मेंटल हेल्थ अच्छी रखने के लिए हर रोज घर या ऑफिस से बाहर थोड़ा समय बिताएं।
रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी बड़ी फायदेमंद साबित हो सकती है।
पर्यापट नींद लेने और खुद को हाइड्रेट रखने के साथ ही फलों-सब्जियों, अनाज वाली बैलेंस डाइट लें।
सबसे जरूरी बात कि अपने स्क्रीन टाइम को लिमिट में रखें।
अपने आप को आलसी होने का लेबल न दें
इन सब में सबसे जरूरी बात यह कि जब भी खुद को ज्यादा प्रोडक्टिव न पाएं तो आलसी होने का लेबल देने से बचें। अपने शरीर और मन की सुनें, तनाव के पीछे के कारणों का पता लगाएं और खुद को पर्याप्त आराम दें। यहां इस बात पर ध्यान दें कि अगर तनाव, कम मोटिवेशन, एंग्जायटी और कम फोकस की समस्या भरपूर आराम करने के बावजूद बनी हुई है तो डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है।
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(डॉ. गौरव गुप्ता, नई दिल्ली- तुलसी हेल्थकेयर में सीनियर साइकियाट्रिस्ट और सीईओ हैं)
