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कीमोथेरेपी के दर्द से राहत! पैंक्रियाटिक कैंसर पर साइंस की बड़ी जीत, नई दवा से डबल होगा सर्वाइवल टाइम

Updated: Thu, 27 Aug 2026 12:07 PM (IST)

मेडिकल साइंस की दुनिया में दशकों की कोशिशों के बाद क्रांति हुई है, अब दवा के जरिए भी हो सकेगा पैंक्रियाटिक कैंसर का इलाज।

पैंक्रियाटिक कैंसर की दवा ‘डाराक्सोनरासिब’ को मंजूरी (Image Source: AI Generated)

पैंक्रियाटिक कैंसर की दवा ‘डाराक्सोनरासिब’ को मंजूरी (Image Source: AI Generated)

HighLights

  1. FDA ने पैंक्रियाटिक कैंसर की नई दवा को दी मंजूरी

  2. 'डाराक्सोनरासिब' ट्यूमर की ग्रोथ 90% तक कम करती है

  3. यह दवा मरीजों का सर्वाइवल टाइम दोगुना करती है

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पैंक्रियाटिक कैंसर सभी कैंसर के प्रकारों में सबसे आम लेकिन घातक माना जाता है, जिसके शुरुआती लक्षण बहुत कम दिखाई देते हैं। फिर कीमोथेरेपी से शरीर को होने वाले साइडइफेक्ट्स भी बेहद दर्दनाक होते हैं। ऐसे में हाल ही में अमेरिका से आई एक खबर राहत दे सकती है क्योंकि एफडीए ने पैंक्रियाटिक कैंसर के दवा को मंजूरी दे दी है। 

पैंक्रियाटिक कैंसर की दवा ‘डाराक्सोनरासिब’ को मंजूरी  

अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने बीते बुधवार को पैंक्रियाटिक यानी अग्नाशय कैंसर को मंजूरी दे दी है। यह नई दवा इस इस घातक कैंसर के इलाज में उम्मीद की नई किरण बनकर आई है। नए ड्रग का नाम ‘डाराक्सोनरासिब’ है जिसे पहली बार विकसित किया गया है। 

मेडिकल की दुनिया में दशकों बाद क्रांति 

दवा किस तरह काम करती है इसपर बात करें तो यह शरीर में म्यूटेटेड प्रोटीन को ब्लॉक कर ट्यूमर की ग्रोथ को लगभर 90% तक कम कर देती है। सालों से एक ऐसी दवा बनाने की कोशिश जारी थी जिसमें म्यूटेटेड प्रोटीन को निशाना बनाया जा सके। इस तरह यह तरीका मेडिकल की दुनिया में किसी क्रांति समान है क्योंकि दशकों से कैंसर की इतनी असरदार दवा नहीं बन पाई। वहीं इसकी बिक्री रिवॉल्यूशन मेडिसिन्स नामक कंपनी करेगी जिसकी एक महीने की दवा की कीमत करीब 39,800 अमेरिकी डॉलर के आसपास है। 

कम साइडइफेक्ट्स के साथ ज्यादा सर्वाइवल टाइम 

जिन मरीजों को यह दवा दी गई, उनका सर्वाइवल टाइम यानी जीने की अवधि डबल हो गई, जबकि साइडइफेक्ट्स बहुत कम देखने को मिले। यह स्टडी कैंसर के मरीजों पर एक एक्सपेरिमेंटल ट्रीटमेंट था जिसमें कीमोथेरेपी दिया जाना भी इलाज का हिस्सा था। बताते चलें कि इसमें वो 500 मरीज शामिल थे जिनमें कैंसर पहले से फैल चुका था और उनका पहला ट्रीटमेंट भी अब काम नहीं कर रहा था। 

दवा लेने वाले मरीजों की ज्यादा जीवन अवधि 

स्टडी में पाया गया कि जिन मरीजों को दवा ट्रीटमेंट के तौर पर दी गई थी उनकी जीवन अवधि 13.5 महीने थी। वहीं, जिन मरीजों को कीमोथेरेपी दी गई उनका सर्वाइवल टाइम ड्रग से कम 6.7 महीने ही था। जान लेने वाली बात यह है कि यह दवा पैंक्रियाटिक कैंसर का पूरा इलाज कर पाने में सक्षम नहीं है, पर मरीजों के लिए कीमोथेरेपी का अच्छा ऑप्शन जरूर है।