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    क्या मेनोपॉज आपकी पर्सनैलिटी बदल रहा है? 40 पार की हर महिला को पढ़ना चाहिए यह कड़वा सच

    Updated: Wed, 21 Jan 2026 05:27 PM (IST)

    महिलाएं अक्सर मेनोपॉज को सिर्फ पीरियड्स बंद होना समझकर अपनी सेहत को अनदेखा कर देती हैं। यह शारीरिक और भावनात्मक बदलावों का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिस ...और पढ़ें

    महिलाओं की फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर कैसे असर डालता है मेनोपॉज (Picture Credit- AI Generated)

    महिलाओं की फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर कैसे असर डालता है मेनोपॉज (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. मेनोपॉज महिलाओं में गहरा शारीरिक-भावनात्मक बदलाव लाता है

    2. थकान, वजन बढ़ना, मूड स्विंग्स इसके आम लक्षण हैं

    3. यह महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों को प्रभावित करता है

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। रोज की भागदौड़ और घर-परिवार की जिम्मेदारियों के चलते अक्सर महिलाएं अपनी सेहत को अनदेखा कर देती हैं। ऐसे में वह उम्र के साथ अपने अंदर होने वाले बदलावों को आम समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। एक महिला को अपने जीवन में कई सारे पड़ावों से गुजरती हैं।

    मेनोपॉज इन्हीं पड़ावों में से एक है, जो महिलाओं में होने वाले बदलावों का आखिर पड़ाव होता है। हालांकि, आज तक लोग इसके बारे में न तो ठीक से जानते हैं और न ही इसके बारे में खुलकर बात करते हैं। मेनोपॉज (Menopause) न सिर्फ महिलाओं में शरीर में बदलाव का कारण बनता है, बल्कि उन्हें इमोशनली भी काफी प्रभावित करता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कैसे एक महिला के जीवन पर पूरी तरह असर डालता है मेनोपॉज- 

    मेनोपॉज का महिलाओं पर असर 

    अक्सर ऐसा माना जाता है कि 40 की उम्र पार करते ही एक महिला का 'सुनहरा दौर' खत्म हो जाता है। हालांकि, यह भी सच है कि कथनी और करनी में काफी अंतर होता है। मनोपॉज, जिसे लोग सिर्फ 'पीरियड्स का बंद होना' समझते हैं, असल में एक महिला के अंदर होने वाले गहरे शारीरिक और भावनात्मक उथल-पुथल का समय होता है।

    menopause

    (Picture Credit- AI Generated)

    इसके कुछ लक्षणों में लगातार थकान, वजन का बढ़ना, रातों की नींद उड़ना, अचानक गर्मी लगना (हॉट फ्लैशेस) और मूड का पल-पल बदलना शामिल हैं। चूंकि ये तकलीफें बाहर से नहीं दिखतीं, इसलिए अक्सर महिलाओं को 'चिड़चिड़ी' या 'गुस्सैल' कहकर उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। जबकि सच यह है कि उनका शरीर और मन एक ऐसे बदलाव से गुजर रहा होता है, जिसके लिए उन्हें कभी तैयार ही नहीं किया गया।

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    क्या है मेनोपॉज? 

    मेनोपॉज महिलाओं में होने वाला बायोलॉजिकल बदलाव है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार, मेनोपॉज आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच होता है। इसे तब माना जाता है जब किसी महिला को लगातार 12 महीनों तक पीरियड्स न आएं।

    पेरीमेनोपॉज क्या है? 

    पेरीमेनोपॉज (Perimenopause), जैसाकि नाम से पता चलता है यह मेनोपॉज से पहले की अवस्था है, जो कई साल पहले शुरू हो सकती है। इस स्थिति में महिलाओं में मौजूद एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्तर गिरने लगता है। इसका असर सिर्फ रिप्रोडक्टिव सिस्टम पर ही नहीं, बल्कि हड्डियों की मजबूती, दिल की सेहत, मेटाबॉलिज्म और दिमागी क्षमता पर भी पड़ता है।

    menopause (1)

    (Picture Credit- AI Generated)

    आज भी भारत में प्रेग्नेंसी और डिलीवरी पर तो खूब बातें की जाती हैं, लेकिन मेनोपॉज का समय और जिक्र होते ही अक्सर चुप्पी साध ली जाती है। खुद महिलाएं इसे 'बुढ़ापे' की निशानी मानकर चुपचाप सहती रहती हैं।

    मेंटल हेल्थ पर मेनोपॉज का असर

    मेनोपॉज सिर्फ शरीर का बदलना नहीं है, यह एक महिला का पूरा नजरिए को (Self-perception) को बदल देता है। जब महिलाओं का शरीर साथ नहीं देता- जैसे थकान होना या वजन बढ़ना- तो महिलाएं खुद को अनजान महसूस करने लगती हैं। 

    उनके मन में सवाल उठता है, "क्या मैं अब भी उतनी ही सक्षम और आकर्षक हूँ?" यह दौर पुराने 'मैं' को खोने का दुख भी लाता है, लेकिन अगर इस दौरान सही सपोर्ट मिले, तो यह खुद को नए सिरे से परिभाषित करने का एक मौका भी बन सकता है।

    रोजमर्रा की जिंदगी पर असर

    मेनोपॉज के कारण होने वाले ये बदलाव सिर्फ मेडिकल नहीं हैं। इनका असर ऑफिस के काम, घर की जिम्मेदारियों और रिश्तों पर भी पड़ता है। कई बार थकान और मूड स्विंग्स के कारण महिलाएं अपने काम पर फोकस नहीं कर पातीं या रिश्तों में दूरियां आ जाती हैं। छोटी-छोटी बातें उन्हें प्रभावित करती हैं और अक्सर कन्फ्यूजन बना रहता है।

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