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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 08, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    World Thalassemia Day 2025 पर जानें क्या होता है थैलेसीमिया और कैसे होता है शरीर पर इसका असर

    Updated: Thu, 08 May 2025 08:35 AM (IST)

    वर्ल्ड थैलेसीमिया डे 2025 (World Thalassemia Day 2025) हर साल 8 मई को मनाया जाता है। थैलेसीमिया एक जेनेटिक बीमारी है जो खून में हीमोग्लोबिन की कमी से ...और पढ़ें

    थैलेसीमिया के कितने प्रकार होते हैं? (Picture Courtesy: Freepik)
    थैलेसीमिया के कितने प्रकार होते हैं? (Picture Courtesy: Freepik)

    HighLights

    1. हर साल 8 मई को World Thalassemia Day मनाया जाता है
    2. इस बीमारी में शरीर में हीमोग्लोबिन कम हो जाता है
    3. यह एक जेनेटिक बीमारी है, जो माता-पिता से बच्चों में आता है

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। थैलेसीमिया (Thalassemia) एक जेनेटिक ब्लड डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर सही मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता या असामान्य हीमोग्लोबिन का प्रोडक्शन करता है। हीमोग्लोबिन रेड ब्लड सेल्स में पाया जाने वाला प्रोटीन है, जो ऑक्सीजन को शरीर के अलग-अलग अंगों तक पहुंचाता है।

    यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में जीन के माध्यम से ट्रांसफर होता है। थैलेसीमिया दो प्रकार का होता है- अल्फा थैलेसीमिया और बीटा थैलेसीमिया, जो हीमोग्लोबिन के किस भाग में समस्या है, इस पर निर्भर करता है। इसी बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक बनाने के लिए हर साल 8 मई को वर्ल्ड थैलेसीमिया डे (World Thalassemia Day 2025) मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस बीमारी के बारे में सही जानकारी मिल सके।

    आइए डॉ. नीरज तियोतिया (कंसल्टेंट- पीडियाड्रिक हीमौटो- ऑन्कोलॉजी एंड बोन मैरो ट्रांसप्लांट, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल गुरुग्राम) से जानते हैं कि थैलेसीमिया कैसे शरीर को प्रभावित (Thalassemia Affects on Body) करता है।

    थैलेसीमिया के प्रकार

    • अल्फा थैलेसीमिया- इसमें अल्फा ग्लोबिन चेन का प्रोडक्शन कम होता है।
    • बीटा थैलेसीमिया- इसमें बीटा ग्लोबिन चेन का प्रोडक्शन प्रभावित होता है, जो ज्यादा गंभीर हो सकता है।

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    थैलेसीमिया शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

    थैलेसीमिया के कारण शरीर में कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं-

    एनीमिया

    हीमोग्लोबिन की कमी के कारण शरीर में ऑक्सीजन का ट्रांसपोर्टेशन ठीक से नहीं हो पाता, जिससे व्यक्ति को थकान, कमजोरी, चक्कर आना और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं

    हड्डियों का डिसऑर्डर

    शरीर रेड ब्लड सेल्स की कमी को पूरा करने के लिए बोन मैरो को ज्यादा एक्टिव कर देता है। इससे हड्डियां चौड़ी हो जाती हैं, खासकर चेहरे और खोपड़ी की हड्डियों का डिसऑर्डर हो सकता है।

    विकास में देरी

    बच्चों में थैलेसीमिया के कारण शारीरिक विकास धीमा हो जाता है और प्यूबरटी में देरी हो सकती है।

    अंगों का बढ़ना

    स्प्लीन और लिवर रेड ब्लड सेल्स को फिल्टर करने के लिए ज्यादा मेहनत करते हैं, जिससे ये अंग बढ़ सकते हैं (स्प्लीनोमेगाली, हेपेटोमेगाली)।

    आयरन ओवरलोड

    थैलेसीमिया के मरीजों को बार-बार खून चढ़ाने (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) की जरूरत पड़ती है, जिससे शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है। एक्स्ट्रा आयरन दिल, लिवर और एंडोक्राइन ग्लैंड्स को नुकसान पहुंचा सकता है।

    इन्फेक्शन का खतरा

    खासकर अगर स्प्लीन को निकाल दिया गया हो, तो मरीज को इन्फेक्शन होने का खतरा ज्यादा होता है।

    थैलेसीमिया एक गंभीर जेनेटिक बीमारी है, लेकिन सही इलाज और देखभाल से मरीज एक बेहतर जीवन जी सकते हैं। अगर परिवार में किसी को थैलेसीमिया है, तो प्रेग्नेंसी के दौरान जांच करवाना जरूरी है, ताकि इस बीमारी को रोका जा सके।

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