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डायबिटीज के मरीजों के लिए डबल अटैक है स्मोकिंग; बढ़ रहा है 55% तक मौत का खतरा, नई रिपोर्ट की चेतावनी

Published: Sun, 06 Sep 2026 12:41 PM (IST)

एक तो डायबिटीज और उसपर स्मोकिंग की यह आदत बेहद जानलेवा है।

डायबिटीज पीड़ित स्मोकिंग करने वालों में मृत्यु का ज्यादा खतरा (Image Source: AI Generated)

डायबिटीज पीड़ित स्मोकिंग करने वालों में मृत्यु का ज्यादा खतरा (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जैसे-जैसे लोगों में आधुनिक जीवनशैली को अपनाने का क्रेज बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे स्मोकिंग की लत के मामलों में भी इजाफा हो रहा है। फिर हम सभी जानते हैं कि भारत दुनिया भर में डायबिटीज कैपिटल भी बन गया है। ऐसे में इन दोनों का कॉम्बिनेशन सेहत के लिए किस तरह हानिकारक हो सकता है, इसे लेकर हाल ही में एक स्टडी आई है।

डायबिटीज पीड़ित स्मोकिंग करने वालों में मृत्यु का ज्यादा खतरा 

नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जिन डायबिटीज के मरीजों को स्मोकिंग की बुरी आदत है, उनमें मृत्यु का खतरा 55% तक बढ़ जाता है। इसे देखते हुए एक्स्पर्ट्स ने अब नई मांग रख दी है कि टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के इलाज में 'स्मोकिंग’ की लत छुड़ाने को भी शामिल किया जाना चाहिए। 

उनका मानना है कि डॉक्टर मरीजों को केवल एक बार चेतावनी न देकर बार-बार फॉलो-अप लें और काउंसलिंग करें। बताते चलें कि यह स्टडी 'डायबिटीज रिसर्च एंड क्लिनिकल प्रैक्टिस' में प्रकाशित हुई है, जिसे भारत समेत 13 देशों के कुल 35 एक्स्पर्ट्स ने तैयार किया है। 

स्मोकिंग छुड़ाने के विकल्प क्या हैं? 

इस स्टडी में केवल समस्या ही नहीं बल्कि उसके समाधान का भी जिक्र है। रिपोर्ट डायबिटीज के मरीजों में स्मोकिंग की लत छुड़ाने के लिए पहली पसंद के तौर पर वैरेनिक्लिन नामक दवा लेने की सलाह देती है। वहीं, अगर यह दवा उपलब्ध न हो तो दूसरे विकल्पों में निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी या बुप्रोपियन को भी शामिल किया गया है। 

1.13 मिलियन लोगों में मृत्यु का खतरा 

स्टडी के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं क्योंकि 1.13 मिलियन लोगों पर हुए 48 अध्ययनों के मेटा-विश्लेषण में 55% लोगों पर मृत्य का सबसे ज्यादा खतरा था। जबकि 1.3 लाख मरीजों पर हुई दूसरी स्टडी में यह खतरा 48% देखा गया, जिनमें से दिल की बीमारी से होने वाली मौतों का जोखिम 36% था। 

इलाज के दौरान निगरानी रखना जरूरी 

डॉक्टरों को जरूरी सलाह देते हुए कहा गया है कि मरीजों के इलाज के दौरान स्मोकिंग छोड़ने के 2 हफ्ते के अंदर और फिर दोबारा 4 हफ्ते के बाद चेकअप किया जाए। इनमें ब्लड शुगर लेवल, बीपी और वजन कम करने जैसे टेस्ट के साथ काउंसलिंग करना भी जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि कई मामलों में जब मरीज स्मोकिंग छोड़ता है तो दवा की खुराक भी बदलनी पड़ जाती है। 

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