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    सावधान! आपका पसंदीदा AI टूल बढ़ा रहा है डिप्रेशन और एंग्जायटी? नई स्टडी में आए चौंकाने वाले नतीजे

    Updated: Thu, 29 Jan 2026 03:32 PM (IST)

    अमेरिका में हुई एक रिसर्च स्टडी के अनुसार, जो लोग आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स और चैटबॉट्स का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनमें डिप्रेशन और एंग् ...और पढ़ें

    एआई चैटबॉट ही तो नहीं मानसिक स्वास्थ्य का दुश्मन? (AI Generated Image)

    एआई चैटबॉट ही तो नहीं मानसिक स्वास्थ्य का दुश्मन? (AI Generated Image)

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    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। चाहे ऑफिस का काम हो या कोई पर्सनल सवाल, हम तुरंत चैटबॉट्स की मदद लेते हैं। लेकिन क्या यह सुविधा हमारी मानसिक सेहत पर भारी पड़ रही है? अमेरिका में हुई एक नई रिसर्च स्टडी ऐसा ही दावा कर रही है। आइए जानें इसके बारे में। 

    क्या कहती है यह रिसर्च स्टडी?

    21 जनवरी को अमेरिका के प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल 'JAMA Network Open' में एक रिसर्च पब्लिश हुई, जिसमें पाया गया कि जो लोग AI टूल्स और चैटबॉट्स का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनमें डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षण दूसरों की तुलना में ज्यादा देखे गए हैं।  

    AI Chatbot

    (AI Generated Image)

    कैसे की गई यह रिसर्च?

    इस रिसर्च की प्रामाणिकता इसके डेटा पर आधारित है। शोधकर्ताओं ने साल 2025 में अप्रैल से मई के बीच एक ऑनलाइन सर्वे किया, जिसमें 20,847 अमेरिकी वयस्कों को शामिल किया गया। सर्वे के दौरान प्रतिभागियों से यह पूछा गया कि वे जेनरेटिव AI और चैटबॉट्स का इस्तेमाल कितनी बार करते हैं। उनकी मानसिक स्थिति को सटीक रूप से मापने के लिए PHQ-9 (Patient Health Questionnaire-9) नाम के स्टैंडर्ड टूल का इस्तेमाल किया गया, जो डिप्रेशन के स्तर को जांचने में मदद करता है।

    स्टडी के चौंकाने वाले नतीजे

    • डिप्रेशन का स्तर- जो लोग रोजाना या बार-बार AI का इस्तेमाल करते हैं, उनमें लो से मीडियम स्तर के डिप्रेशन के लक्षण काफी ज्यादा पाए गए।
    • एंग्जायटी और चिड़चिड़ापन- ऐसे लोगों में न केवल उदासी, बल्कि घबराहट और चिड़चिड़ापन जैसी मानसिक समस्याएं भी जुड़ी हुई दिखीं।
    • कारण और नतीजे- हालांकि, शोधकर्ताओं ने साफ किया है कि यह स्टडी केवल एक कनेक्शन दिखाती है; यह पूरी तरह साबित नहीं करती कि AI ही इन बीमारियों का इकलौता कारण है।

    क्यों खास है यह शोध?

    यह स्टडी इसलिए बेहद अहम है, क्योंकि पहली बार इतने बड़े स्तर पर वैज्ञानिक तरीके से AI के इस्तेमाल और मानसिक स्वास्थ्य के बीच के रिश्ते को खंगाला गया है। यह हमें सचेत करती है कि तकनीक जहां एक ओर हमारी मुश्किलें हल कर रही है, वहीं दूसरी ओर यह हमारी भावनाओं और दिमाग पर भी असर डाल रही है।

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    संतुलन है जरूरी

    AI ने बेशक हमारी जिंदगी को आसान और तेज बना दिया है, लेकिन यह स्टडी हमें एक चेतावनी भी देती है। जब तकनीक हमारी रोजमर्रा की आदत बन जाए, तो उसके इस्तेमाल को लेकर सजग और संतुलित रहना जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी लक्षण को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। खुद को डिजिटल दुनिया से थोड़ा ब्रेक देना और असल दुनिया से जुड़े रहना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।


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