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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 07, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    ठीक नहीं बच्चों में अति चंचलता, एक्सपर्ट से जानें कैसे करें ऐसे बच्चों को हैंडल

    By Priyanka SinghEdited By:
    Updated: Sun, 07 Jun 2020 09:43 AM (IST)

    बच्चे शरारती होते हैं लेकिन जब उनकी शरारतें हद से ज्यादा बढ़ जाएं तो जरूरत होती है उसे कंट्रोल करने की। तो आइए जानते हैं इस समस्या से जुड़ी कुछ जरूरी ...और पढ़ें

    ठीक नहीं बच्चों में अति चंचलता, एक्सपर्ट से जानें कैसे करें ऐसे बच्चों को हैंडल
    ठीक नहीं बच्चों में अति चंचलता, एक्सपर्ट से जानें कैसे करें ऐसे बच्चों को हैंडल

    ऐसा माना जाता है कि बच्चे तो शरारती होते ही हैं, लेकिन जब उनके व्यवहार में अति चंचलता नजर आए तो अनदेखा न करें। यह एडीएचडी यानी अटेंशन डेफिसिट हाइपर ऐक्टिविटी डिसॉर्डर का लक्षण हो सकता है। तो इसे कैसे सुलझाया जा सकता है, जानेंगे चाइल्ड काउंसलर गगनदीप कौर से।

    क्यों होता है ऐसा

    जैसा कि इसके नाम से ही जाहिर है कि इस समस्या से ग्रस्त बच्चे किसी भी काम में अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते और ये हाइपर एक्टिव होते हैं, अर्थात हद से ज्यादा चंचल होते हैं। ये पल भर के लिए भी शांत नहीं बैठ पाते। पढ़ाई हो या टीवी देखना या फिर खाना खाना, किसी भी काम को ये आराम और स्थिरता से नहीं कर पाते। इसलिए लक्षणों के आधार पर इस समस्या को तीन श्रेणियों में बांटा जाता है- पहली श्रेणी में वैसे बच्चे आते हैं, जो किसी भी कार्य में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। दूसरी श्रेणी में हाइपर ऐक्टिव आते हैं, जो पल भर के लिए भी शांत नहीं बैठ पाते, तीसरी श्रेणी में वैसे बच्चों को शामिल किया जाता है, जिनमें अटेंशन डेफिसिट और हाइपर ऐक्टिविटी के लक्षण एक साथ पाए जाते हैं। 

    क्या है इलाज

    1. ऐसे बच्चों का ध्यान बहुत जल्दी भटकता है, इसलिए पढ़ाई के दौरान स्टडी टेबल पर बहुत ज्यादा सामान न रखें। मोबाइल तो खासतौर से नहीं।

    2. बच्चे की हॉबी को पहचान कर उसे उसकी रूचि से जुड़े कार्यों में व्यस्त रखने की कोशिश करें, जिससे उसकी ऊर्जा का सदुपयोग हो सके। साथ ही उसका मन भी लगा रहेगा।

    3. छोटी-छोटी बातों के लिए उसके साथ ज्यादा रोक-टोक न करें, लेकिन हां, कोई बड़ी गलती होने पर उसे जरूर समझाएं और जरूरत पड़े तो डांटे भी।

    4. हर एक कार्य के लिए निश्चित समय सीमा तय करें।

    5. बच्चे को समय की पाबंदी सिखाएं। सोने, उठने से लेकर खाने-खेलने तक का तय समय हो।

    6. उसके हर अच्छे व्यवहार की प्रशंसा करें।