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    जुकाम होने पर आप भी खुद से ले लेते हैं एजिथ्रोमाइसिन? समझें एंटीबायोटिक्स का ओवरयूज कैसे है घातक

    Updated: Tue, 25 Nov 2025 01:44 PM (IST)

    भारत और दुनिया में एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) एक गंभीर समस्या है, जिसका मुख्य कारण बिना डॉक्टर की सलाह के एंटी-बायोटिक्स का गैर-जरूरी इस्तेमाल ...और पढ़ें

    केमिस्ट की नहीं, डॉक्टर की सलाह मानें (Picture Courtesy: Freepik)

    केमिस्ट की नहीं, डॉक्टर की सलाह मानें (Picture Courtesy: Freepik)

    HighLights

    1. एंटीबायोटिक्स का गलत इस्तेमाल खतरनाक साबित हो सकता है

    2. इसके कारण एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का रिस्क बढ़ता है

    3. भारत में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस तेजी से बढ़ रहा है

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और दुनिया का एक बड़ा हिस्सा आज एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) नाम की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। यह एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें बैक्टीरिया दवाओं के खिलाफ रेजिस्टेंस पैदा कर लेते हैं और सामान्य एंटी-बायोटिक्स का उन पर कोई असर नहीं होता। 

    इसका सीधा कारण है बिना जरूरत या बिना डॉक्टर की सलाह के एंटी-बायोटिक्स का इस्तेमाल। भारत में एंटी-बायोटिक्स का गलत इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है। हल्का जुखाम होने या कोई एलर्जी होने पर लोग केमिस्ट से एंटी-बायोटिक्स ले लेते हैं। कई बार इन परेशानियों में एंटी-बायोटिक्स की जरूरत भी नहीं होती, लेकिन फिर भी लोग ये दवाएं बिना डॉक्टर से पूछे ले लेते हैं। 

    आज यह समस्या इतनी बड़ी हो चुकी है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से लेकर हाल ही में पब्लिश हुई लैंसेट की एक स्टडी ने भारत में एंटी-बायोटिक्स के गलत इस्तेमाल (Antimicrobial Resistance in India) पर खास चेतावनी दी है। अस्पतालों से लेकर आम मेडिकल स्टोर्स तक, एंटी-बायोटिक्स के गलत इस्तेमाल के कारण सुपर बग्स तेजी से फैल रहे हैं, जिनपर साधारण एंटी-बायोटिक्स का कोई असर नहीं होता।

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    (Picture Courtesy: Freepik)

    भारत में कौन-सी एंटी-बायोटिक्स सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रही हैं?

    भारत में तीन एंटी-बायोटिक्स का इस्तेमाल सबसे ज्यादा और कई बार गलत तरीके से हो रहा है-

    • ऐजिथ्रोमाइसिन (Azithromycin)- आमतौर पर खांसी, जुकाम और गले के इन्फेक्शन में तुरंत दे दी जाती है, जबकि ये इन्फेक्शन ज्यादातर वायरल होते हैं। कोविड के दौरान इसके अनियंत्रित इस्तेमाल ने भी समस्या को बढ़ाया।
    • अमोक्सिसिलिन (Amoxicillin)- यह एंटी-बायोटिक भी हर दूसरे प्रिस्क्रिप्शन में देखने को मिलती है। दांत के दर्द से लेकर हल्के बुखार तक, कई बार ऐसे मामलों में दी जाती है जहां इसकी जरूरत नहीं होती।
    • ओफ्लोक्सासिन (Ofloxacin)- यह फ्लूरोक्विनोलोन ग्रुप की दवा है और आसानी से बिना प्रिस्क्रिप्शन के भी मिल जाती है। डायरिया या यूरिनरी इन्फेक्शन में इसका ज्यादा और गलत इस्तेमाल बैक्टीरिया को और स्ट्रॉन्ग बना रहा है।

    इन दवाओं का ओवरयूज बैक्टीरिया पर "सेलेक्शन प्रेशर" बनाता है, यानी कमजोर बैक्टीरिया मर जाते हैं, लेकिन कुछ बैक्टीरिया इनके खिलाफ रेजिस्टेंस बना लेते हैं। यही सुपरबग आगे चलकर गंभीर इन्फेक्शन पैदा करते हैं, जिनपर दवाएं काम करना बंद कर देती हैं।

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    AMR क्यों खतरनाक है?

    • सामान्य इन्फेक्शन का इलाज मुश्किल हो जाता है।
    • अस्पतालों में इलाज लंबा और महंगा हो जाता है।
    • गंभीर स्थिति में मरीज की जान को भी खतरा हो सकता है, क्योंकि दवाओं के विकल्प सीमित हो जाते हैं।

    बचाव कैसे करें?

    • डॉक्टर की सलाह के बिना एंटी-बायोटिक्स कभी न लें।
    • सर्दी, खांसी और बुखार हर बार बैक्टीरियल नहीं होते। डॉक्टर ही यह तय कर सकते हैं कि एंटी-बायोटिक की जरूरत है या नहीं।
    • पूरी दवाई का कोर्स पूरा करें। अगर इलाज बीच में ही रोक देंगे तो बैक्टीरिया पूरी तरह नहीं मरते और जल्दी रेजिस्टेंट बन जाते हैं।
    • दूसरों की बची हुई दवाई न लें। हर मरीज के लिए दवा की डोज और प्रकार अलग होते हैं।
    • फार्मेसी से बिना प्रिस्क्रिप्शन एंटी-बायोटिक्स न खरीदें। ओवर-द-काउंटर मिल जाना इसका सबसे बड़ा कारण है।
    • साफ-सफाई और हाइजीन पर ध्यान दें। हाथ धोना, साफ पानी पीना और स्वस्थ आदतें इन्फेक्शन के खतरे को कम करती हैं, जिससे दवाओं की जरूरत भी कम पड़ेगी।

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