युवाओं को तेजी से शिकार बना रहा कार्डियक अरेस्ट, सही समय पर CPR देकर ऐसे बचाएं किसी की जान
आजकल युवाओं में कार्डियक अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो हार्ट अटैक से अलग है। यह एक ऐसी आपातकालीन स्थिति है, जिसमें दिल अचानक काम करना बंद कर ...और पढ़ें

बढ़ रहा कार्डियक अरेस्ट का खतरा, डॉक्टर के बताए ये टिप्स बचा सकते हैं जान (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इन दिनों दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले काफी बढ़ने लगे हैं। कभी बुजुर्गों को होने वाली यह बीमारी अब युवाओं को भी तेजी से अपना शिकार बना रही है। ऐसे में जरूरी है कि समय रहते इस बीमारी से खुद का बचाव किया जाए।
आजकल कई ऐसी खबरें सुनने या वीडियो देखने को मिलते हैं, जहां कोई व्यक्ति चलते-फिरते, नाचते या जिम करते हुए अचानक गिर जाता है और उसकी मौत हो जाती है। इसे मेडिकल भाषा में 'कार्डियक अरेस्ट' (Cardiac Arrest) कहते हैं। यह एक ऐसी इमरजेंसी है जहां हर एक सेकंड कीमती होता है। ऐसे में यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आगरा में कंसल्टेंट- कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जन डॉ. पवन पारसनाथ सिंह से जानते हैं क्या है यह कंडीशन और कैसे इस दौरान घबराने के बजाय सही कदम उठाएं, तो हम किसी की जान बचा सकते हैं।
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर
लोग अक्सर हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन ये दोनों अलग हैं। डॉक्टर इन दोनों का अंतर बताते हैं-
- हार्ट अटैक (दिल का दौरा): इसे आप शरीर की 'प्लंबिंग' की समस्या समझ सकते हैं। इसमें नसों में ब्लॉकेज आ जाता है, जिससे दिल की मांसपेशियों तक खून नहीं पहुंच पाता। इसमें इंसान का दिल धड़कता रहता है।
- कार्डियक अरेस्ट: यह शरीर के 'इलेक्ट्रिकल सिस्टम' की खराबी है। इसमें दिल का सिस्टम अचानक काम करना बंद कर देता है और दिल धड़कना रुक जाता है। जब दिल खून पंप नहीं करेगा, तो शरीर और दिमाग को ऑक्सीजन नहीं मिलेगी, जिससे चंद मिनटों में इंसान की जान जा सकती है।
यह ज्यादा खतरनाक इसलिए है, क्योंकि अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट सिर्फ दिल के मरीजों को ही हो, किसी को भी हो सकता है।
कार्डियक अरेस्ट के लक्षण क्या हैं?
- बेचैनी
- कमजोरी
- सांस लेने में तकलीफ
- दिल की धड़कन बहुत तेज होना
- अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर जाना।
- नब्ज (Pulse) का न चलना।
- सांस का रुक जाना या बुरी तरह हांफना।
ऐसी इमरजेंसी में क्या करें?
डॉक्टर बताते हैं कि ऐसी स्थिति में आस-पास मौजूद लोगों की तुरंत की गई मदद लाइफ एंड डेथ के बीच का फासला तय करती है। आपको बिना घबराए ये कदम उठाने चाहिए:
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- अगर कोई गिर जाए और हिलाने-डुलाने या पुकारने पर कोई प्रतिक्रिया न दे, तो बिना समय बर्बाद किए एम्बुलेंस को कॉल करें। फोन को स्पीकर पर रख दें ताकि आप दोनों हाथों से मदद कर सकें।
- मरीज को पीठ के बल किसी सख्त सतह पर सीधा लिटाएं। अपने एक हाथ की हथेली को छाती के बीचों-बीच रखें और दूसरे हाथ को उसके ऊपर फंसा लें। अब छाती को तेजी से और जोर से दबाते हुए सीपीआर देना शुरू करें। एक मिनट में लगभग 100 से 120 बार छाती को 5-6 सेंटीमीटर नीचे तक दबाएं।
- अगर आपको माउथ-टू-माउथ सांस देना (रेस्क्यू ब्रीदिंग) नहीं आता है, तो परेशान न हों, केवल हाथों से लगातार छाती दबाते रहें। यह बहुत असरदार होता है।
- अगर आस-पास किसी मॉल या ऑफिस में AED (ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर) मशीन उपलब्ध हो, तो उसे मंगवाएं। यह मशीन आवाज के जरिए निर्देश देती है और जरूरत पड़ने पर दिल को एक शॉक देकर धड़कन वापस लाने में मदद करती है।
- जब तक एम्बुलेंस या डॉक्टर न आ जाएं, तब तक छाती दबाना (CPR) बिल्कुल न रोकें। आपका यह छोटा-सा लेकिन महत्वपूर्ण कदम किसी जिंदगी बचा सकता है।