जवानी वाला वर्कआउट बढ़ती उम्र में अब पड़ रहा भारी? सुरक्षित फिटनेस के लिए रूटीन में तुरंत करें ये सुधार
बढ़ती उम्र के साथ व्यायाम के बाद शरीर की रिकवरी में अधिक समय लग सकता है, और इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हैं।

बढ़ती उम्र में व्यायाम के बाद रिकवरी में समय लगने के कारण (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। एक अच्छा व्यायाम आपके शरीर की क्षमताओं को बताता है। हालांकि, कसरत के बाद अकड़न और दर्द जैसी तकलीफें आमतौर पर व्यायाम करने के 24 से 72 घंटे में ठीक हो जाती हैं, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इसमें अधिक समय लग सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि जब आप युवा होते हैं तो व्यायाम करने के बाद कुछ देर में आप सामान्य हो जाते हैं, लेकिन उम्र बढ़ने पर वर्कआउट और किसी खेल के लिए आपको अपने शरीर की क्षमताओं का अधिक ध्यान रखना पड़ता है, इसलिए जानना जरूरी है कि बढ़ती उम्र में एक्सरसाइज के बाद रिकवरी में अधिक समय क्यों लग सकता है और अपनी रुटीन में बदलाव करने के बारे में कब सोचना चाहिए।
मांसपेशियों पर तनाव का असर
व्यायाम के दौरान आपके शरीर पर तनाव बढ़ता है, आप शरीर को अनुकूलित होने के लिए मजबूर करते हैं, ताकि भविष्य में वह ऐसी स्थितियों का सामना कर सके। यह अनुकूलन तब होता है जब आपका शरीर मांसपेशियों का पुनर्निर्माण और पुनर्जनन करता है।
शोध बताते हैं कि वृद्ध लोगों में रिकवरी की यह प्रक्रिया दो कारणों से अधिक समय ले सकती है, क्योंकि वे व्यायाम के कारण होने वाली मांसपेशियों की क्षति के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं और प्रतिक्रिया में मांसपेशियों के पुनर्जनन में धीमापन आ जाता है। आमतौर पर 30 की उम्र के बाद मांसपेशियों का द्रव्यमान (मसल्स मास) कम होने लगता है और धीरे धीरे मांसपेशियों की संरचना में भी बदलाव आने लगता है।
अधेड़ उम्र में धीमी गति से सिकुड़ने वाली मांसपेशियों की तुलना में तेज गति से सिकुड़ने वाली मांसपेशियों के फाइबर (जो बल और शक्ति के लिए जिम्मेदार होते हैं) अधिक नष्ट हो जाते हैं, जबकि धीमी गति से सिकुड़ने वाली मांसपेशियां सहनशक्ति वाली गतिविधियों में सहायक होती हैं। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि इससे वृद्धावस्था में तनाव की संभावना बढ़ जाती है। उम्र के साथ पुरानी सूजन (जिसे वैज्ञानिक 'इन्फ्लेमेजिंग' कहते हैं) बढ़ सकती है और मांसपेशियों की पुनर्जनन क्षमता में बाधा डाल सकती है।
एक्सरसाइज फिजियोलाजिस्ट बताते हैं कि ये बदलाव शायद इस बात पर असर डालते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ आप एक्सरसाइज के बाद कैसे रिकवर करते हैं, लेकिन यह पता लगाना मुश्किल है कि हर बदलाव का कितना असर होता है। कुछ रिसर्चर का मानना है कि रिकवरी में अधिक समय लगना बायोलाजिकल एजिंग का सीधा नतीजा कम और उम्र बढ़ने के साथ एक्टिविटी लेवल में बदलाव का नतीजा अधिक हो सकता है। समय के साथ कई लोग कम एक्टिव हो जाते हैं, जिससे मसल्स भी कम हो सकती है।
वर्कआउट में करें सुधार
अगर रिकवरी में आपको को पहले की तुलना में अधिक समय लगने लगा है और थका हुआ महसूस करते हैं या पहले तुलना में व्यायाम करते हुए कठिनाई महसूस हो रही है, तो वर्कआउट की तीव्रता को कम देना चाहिए। आप स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के दौरान किसी खास मांसपेशी पर होने वाले दबाव को कम करने के लिए वर्कआउट की संख्या कम करने या धीमी गति से अधिक बार करने की कोशिश कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है कि उम्र बढ़ने के साथ एक्सरसाइज के जाल में फंसने के बजाय आपका सक्रिय रहना अधिक महत्वपूर्ण है।
अगर आप सामान्य से अधिक थका हुआ महसूस करते हैं तो प्रयास करें कि अपना हाइड्रेशन और पर्याप्त प्रोटीन को सुनिश्चित करें। हालांकि, युवावस्था की तुलना में कुछ बुजुर्गों में प्यास कम लगने लगती है। साथ ही, उम्र बढ़ने के साथ शरीर की मांसपेशियां भोजन से मिलने वाले प्रोटीन का इस्तेमाल करने में कम असरदार हो जाती हैं, इसलिए आपको पूरे दिन प्रोटीन लेने की कोशिश करनी चाहिए। अगर आपको कोई सेहत संबंधी समस्या है, जिससे रोजमर्रा की गतिविधि के दौरान दर्द महसूस होता है तो अपनी गतिविधि में बदलाव करना चाहिए।
अगर लंबे समय तक दर्द बना रहता है या पुरानी चोट फिर से उभर आती है, तो यह संकेत हो सकता है कि आपको कम जोर वाली एक्सरसाइज करने के बारे में सोचना चाहिए। कभी-कभी दिनचर्या में बदलाव करने का मतलब कुछ कम करना नहीं, बल्कि कोई दूसरी मददगार एक्टिविटी जोड़ना भी हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर आप सिर्फ दौड़ते या साइकिल चलाते हैं, तो स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के जरिये मांसपेशियां मजबूत करने से आपको चोटों से बचने में मदद मिल सकती है।
उम्र बढ़ने के साथ वर्कआउट
अमेरिकन कालेज आफ स्पोर्ट्स मेडिसिन की मानें तो वयस्कों को हर सप्ताह 150 मिनट तक मध्यम-तीव्रता वाली एरोबिक एक्सरसाइज और दो बार मांसपेशियां मजबूत करने वाली एक्टिविटीज करनी चाहिए। खासकर, 65 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों को भी इन्हीं दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए, बशर्ते कि उनकी मेडिकल हिस्ट्री कोभी ध्यान में रखा जाए। ध्यान रखें कि मध्यम-तीव्रता वाली एक्सरसाइज का अनुभव अब वैसा नहीं हो सकता, जैसा जवानी में होता था। कोई भी नया रुटीन शुरू करने से पहले डाक्टर से अवश्य सलाह लेनी चाहिए।
उम्र बढ़ने के साथ गिरने के जोखिम को कम करने के लिए संतुलन और गतिशीलता (मोबिलिटी) वाले व्यायाम बहुत आवश्यक हैं। वजन उठाने वाले व्यायाम (वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज) हड्डियों का घनत्व बनाए रखने और फ्रैक्चर से बचाने में मदद करते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ ओवरट्रेनिंग से बचने के लिए शरीर को आराम का समय देना- व्यायाम के बीच और उसके बाद के बहुत जरूरी है। इससे अगले वर्कआउट के लिए तैयार करने में आसानी होती है। अगर आपको रिकवरी के लिए एक अतिरिक्त दिन की जरूरत पड़े, तो अधिक चिंता नहीं करनी चाहिए। कभी-कभी लोग भूल जाते हैं कि बेशक हमें जिम जाना है और व्यायाम करना है, लेकिन असल में सारा शारीरिक लाभ (फिजियोलाजिकल मैजिक) तब होता है जब आप रिकवर करते हैं।
