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    ओवेरियन सिस्ट का मतलब कैंसर ही होता है? डॉक्टर ने दूर किए इस बीमारी से जुड़े ऐसे 5 मिथक

    Updated: Wed, 04 Feb 2026 04:25 PM (IST)

    ओवेरियन कैंसर के मामले अब कम उम्र की महिलाओं में भी बढ़ रहे हैं, जिसके मुख्य कारण लक्षणों का देर से पता चलना और इससे जुड़ी गलतफहमियां हैं। यह कैंसर कि ...और पढ़ें

    आप भी करते हैं ओवेरियन कैंसर के इन मिथकों पर यकीन? (Picture Courtesy: Freepik)

    आप भी करते हैं ओवेरियन कैंसर के इन मिथकों पर यकीन? (Picture Courtesy: Freepik)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ओवेरियन कैंसर के मामले अब कम उम्र की महिलाओं में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है इसके लक्षणों का देर से सामने आना। साथ ही, ओवेरियन कैंसर को  लेकर लोगों के मन में कई गलतफहमियां भी घर बना चुके हैं, जो सही इलाज और बचाव में रुकावट बनते हैं। 

    इसलिए विश्व कैंसर दिवस के मौके पर हमने डॉ. मधुलिका सिंह (सीनियर कंसल्टेंट ऑब्स्ट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट, अंकुर हॉस्पिटल, पुने) से ओवेरियन कैंसर से जुड़े कुछ मिथकों की सच्चाई जानने की कोशिश की। आइए जानें इस बारे में डॉक्टर क्या बता रही हैं। 

    मिथक 1- ओवेरियन कैंसर केवल 50 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को होता है

    सच- यह एक आम गलतफहमी है। हालांकि, यह 50 वर्ष और उससे ज्यादा उम्र की महिलाओं में ज्यादा देखा जाता है, लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकता है। जिन महिलाओं के परिवार में इसका इतिहास रहा है, उन्हें खासतौर से सतर्क रहना चाहिए और नियमित जांच करानी चाहिए।

    मिथक 2- केवल पारिवारिक इतिहास वाली महिलाओं को ही इसका खतरा है

    सच- हालांकि, पारिवारिक इतिहास जोखिम बढ़ाता है, लेकिन ओवेरियन कैंसर से पीड़ित ज्यादातर महिलाओं का कोई पुराना पारिवारिक इतिहास नहीं होता। BRCA1 और BRCA2 जैसे जीन म्यूटेशन भी इसका कारण बन सकते हैं। इसलिए, सभी महिलाओं के लिए लक्षणों के बारे में पता होना चाहिए और नियमित जांच करवाना जरूरी है।

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    मिथक 3- पैप स्मीयर टेस्ट से ओवेरियन कैंसर का पता चल सकता है

    सच- यह एक बड़ा भ्रम है। पैप स्मीयर टेस्ट सर्वाइकल कैंसर की पहचान के लिए होता है, ओवेरियन कैंसर के लिए नहीं। ओवेरियन कैंसर की पहचान के लिए एक्सपर्ट्स ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड और CA-125 ब्लड टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। हालांकि, ये टेस्ट सामान्य स्क्रीनिंग के लिए नहीं हैं, बल्कि उन महिलाओं के लिए हैं जिनमें लक्षण दिख रहे हों या जो हाई रिस्क पर हों।

    मिथक 4- ओवेरियन सिस्ट का मतलब कैंसर ही होता है

    सच- ओवेरियन सिस्ट और ओवेरियन कैंसर दोनों अलग-अलग चीजें हैं। ज्यादातर सिस्ट बेनाइन यानी नॉन कैंसरस होते हैं और बिना किसी इलाज के ठीक हो सकते हैं। अगर सिस्ट बड़ा है, तो डॉक्टर उसकी जांच करते हैं, ताकि कैंसर की आशंका को दूर किया जा सके। हर गांठ खतरनाक नहीं होती, इसलिए घबराने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना सही कदम है।

    मिथक 5- ओवेरियन कैंसर का मतलब है जीवन का अंत

    सच- मेडिकल साइंस में हुई प्रगति ने अब इस बीमारी के इलाज में सुधार किया है। अगर सही समय पर इसका पता चल जाए और सही इलाज मिले, तो महिला के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है। समय पर डॉक्टर की सलाह और हस्तक्षेप रिकवरी के लिए बेहद जरूरी हैं।

    इन लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज

    अगर आप इनमें से कोई भी लक्षण लगातार महसूस कर रही हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें-

    • पेट में लगातार ब्लोटिंग महसूस होना
    • पेल्विक या पेट के निचले हिस्से में दर्द
    • जल्दी पेट भरा हुआ महसूस होना या खाने की आदतों में बदलाव
    • बार-बार पेशाब आना
    • वजन में अचानक और बिना कारण बदलाव
    • थकान, पीठ दर्द या पीरियड साइकिल में बदलाव