विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 29, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

World Stroke Day 2025: स्ट्रोक क्यों है साइलेंट किलर? सफदरजंग हॉस्पिटल के डॉक्टर ने बताया बचने का तरीका

Published: Wed, 29 Oct 2025 10:32 AM (GMT+05:30)

स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सा आपातकाल है जिसमें मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बाधित होता है। इस्केमिक और हेमरेजिक स्ट्रोक दो ...और पढ़ें

स्ट्रोक: कारण, बचाव और जागरूकता - विश्व स्ट्रोक दिवस 2025 (Picture Credit- AI Generated)

स्ट्रोक: कारण, बचाव और जागरूकता - विश्व स्ट्रोक दिवस 2025 (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. स्ट्रोक होने पर ब्रेन में ब्लड फ्लो रुक जाता है

  2. डॉक्टर की मानें तो 80% स्ट्रोक रोके जा सकते हैं

  3. इसके लिए लक्षणों और कारणों को जानना जरूरी है

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। स्ट्रोक को मस्तिष्क आघात कहा जाता है। यह एक बेहद गंभीर तरह की मेडिकल इमरजेंसी की कंडीशन होती है। यह तब होता है जब दिमाग के एक हिस्से में ब्लड फ्लो अचानक रुक हो जाता है, जिससे ब्रेन सेल्स को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों नही मिल पाते हैं। कुछ ही मिनटों में इससे प्रभावित सेल्स मरने लगती हैं, जिससे पैरालाइसिस, बोलने की समस्या, यहां तक कि इससे मौत भी हो सकती है।

सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली में न्यूरो सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. केबी शंकर पहले इसे बुजुर्गों की समस्या मानते थे, लेकिन अब यह युवाओं को तेजी से प्रभावित करने लगी है। इसका एक बड़ा कारण है कि लोग खराब जीवनशैली, गलत आहार, तनाव की गिरफ्त में आ रहे हैं, लेकिन कुछ उपायों से इसे रोका भी जा सकता है।

दो तरह के होते हैं स्ट्रोक

  • इस्केमिक स्ट्रोक: यह ब्रेन की ब्लड सेल्स में थक्का बनने से होता है, लगभग 80-85 प्रतिशत मामलों में यही होता है। 
  • हेमरेजिक स्ट्रोक: इसमें कमजोर ब्लड वेसल के फटने से ब्लीडिंग होती है। ऐसे ही ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (टीआइए) या मिनी स्ट्रोक में इस तरह अस्थायी लक्षण उत्पन्न होते हैं, जो 24 घंटे के अंदर ही गायब हो जाते हैं। ये बड़े स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण भी हो सकते हैं।

संभव है स्ट्रोक से बचाव

80 प्रतिशत स्ट्रोक को रोका जा सकता है। इसके लिए बस कुछ बातों का ख्याल रखना जरूरी है जैसे-  

  • ब्लड प्रेशर कंट्रोल करें: नियमित जांच और आवश्यकता पड़ने पर दवा लें।
  • सही और संतुलित डाइट: ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन को प्राथमिकता दें। नमक, चीनी और तले-भुने भोजन से दूरी बनाएं। 
  • नियमित व्यायाम करें: सप्ताह में पांच दिन कम से कम 30 मिनट तेज चलने का अभ्यास डालें। 
  • धूम्रपान और अल्कोहल सीमित करें : दोनों सीधे धमनियों को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • वजन सही रखें: यह डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम को कम करता है। 
  • तनाव से दूर रहें: योग, ध्यान और विश्राम तकनीकें ब्लड प्रेशर नियंत्रित करती है। 
  • नियमित स्वास्थ्य जांच: इससे किसी भी बीमारी को शुरुआत में ही पकड़ा जा सकता है।

स्ट्रोक के रिस्क फैक्टर

स्ट्रोक का खतरा जेनेटिक और लाइफस्टाइल फैक्टर्स के साथ बढ़ता है। हालांकि, फैमिली हिस्ट्री और बढ़ती उम्र जैसे जोखिम को नहीं बदला जा सकता, लेकिन कुछ बातें हमारे नियंत्रण में होती हैं। 

  • हाई ब्लड प्रेशर : यह सबसे बड़ा कारण है।
  • डायबिटीज: इससे रक्त वाहिकाओं को नुकसान होता है व धमनियां कमजोर होती हैं। 
  • हाई कोलेस्ट्रालः फैट के जमा होने के कारण ब्लड फ्लो बाधित होता है।
  • धूम्रपान और अल्कोहल: रक्तचाप बढ़ता है व रक्त वाहिकाओं को नुकसान होता है।
  • मोटापा और निष्क्रियता: इससे हार्ट डिजीज और हाइपरटेंशन का जोखिम बढ़ता है।
  • हार्ट डिजीज: जैसे कि एट्रियल फिब्रिलेशन, जो मस्तिष्क में थक्के भेज सकता है। 
  • लक्षणों को पहचानें: स्ट्रोक की स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। इससे मरीज की जान बचाई जा सकती है।

क्यों जरूरी है जागरूकता 

स्वजन को स्ट्रोक के लक्षणों के बारे में पता होना चाहिए। भारत में स्ट्रोक की समस्या लगातार बढ़ रही है। जागरूकता, समय पर उपचार और सामुदायिक स्तर पर भागीदारी से हर साल हजारों लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। रोकथाम जागरूकता से शुरू होती है और जागरूकता आपसे । इसलिए, जीवनशैली सही रखें और नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें।

FA.S.T को याद रखें

  • F- फेस : क्या चेहरे का एक हिस्सा
  • लटक रहा है?
  • A- आर्म: क्या एक हाथ कमजोर
  • या सुन्न हो रहा है?
  • S- स्पीच: क्या बोलने में परेशानी या अस्पष्टता हो रही है ? 
  • T-टाइम : तुरंत अस्पताल पहुंचें।


क्या हैं स्ट्रोक से बचने के उपाय

स्ट्रोक का उपचार इस बात निर्भर करता है कि कितनी जल्दी मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। 

  • इस्केमिक स्ट्रोक के लिए, डॉक्टर थक्के को तोड़ने वाली दवाएं जैसे टीपीए का उपयोग करते हैं, जो कुछ ही घंटों में रक्त प्रवाह को सही कर देती है। कुछ मामलों में आपरेशन से थक्का हटाया जाता है। 
  • हेमरेजिक स्ट्रोक में रक्तस्राव को रोकने और मस्तिष्क के भीतर दबाव को कम करने का प्रयास किया जाता है। फटी हुई रक्त वाहिकाओं की मरम्मत और रक्त को निकालने के लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।
  • आपात स्थिति से निकलने के बाद समुचित देखभाल की जरूरत होती है। इसमें फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और आक्युपेशनल थेरेपी मरीज को सामान्य करने में काफी सहायक होती है। सही होने में भावनात्मक सहयोग भी महत्वपूर्ण होता है ।

यह भी पढ़ें- 30-40 की उम्र में क्यों आ रहा है स्ट्रोक? डॉक्टर बोले- "खराब लाइफस्टाइल बन रहा खतरे की घंटी"

यह भी पढ़ें- वायु प्रदूषण के कारण 50% तक बढ़ रहे स्ट्रोक के मामले, बचाव के लिए काम आएगी डॉक्टर की ये सलाह


देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।