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    फिल्मी नहीं है ऋतिक रोशन का यह कल्ट सॉन्ग: 26 साल पहले बना गाना असल में है कश्मीरी लोकगीत

    Updated: Wed, 01 Jul 2026 06:36 PM (IST)

    शायद ही कोई ऐसा हो, जिसने बचपन में प्रीति जिंटा और ऋतिक रोशन के सुपरहिट सॉन्ग बुमरो-बुमरो पर डांस न किया हो। मिशन कश्मीर का यह गाना असल में कश्मीर का ...और पढ़ें

    मिशन कश्मीर का ये गाना असल में है कश्मीरी लोकगीत (Picture Credit- Youtube)

     मिशन कश्मीर का ये गाना असल में है कश्मीरी लोकगीत (Picture Credit- Youtube)

    HighLights

    1. 'बुमरो बुमरो' मिशन कश्मीर का प्रसिद्ध बॉलीवुड गीत है

    2. यह मूल रूप से 1950 के दशक का कश्मीरी लोकगीत है

    3. कश्मीरी शादियों में गाया जाता है यह गाना

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत अपनी विविधता के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। यहां हर एक राज्य की अपनी अलग संस्कृति और परंपरा है, जिनकी झलक हर तरफ देखने को मिलती है। लोकगीत सदियों में भारतीय कला और संस्कृति का हिस्सा रहे हैं और आज आपको ऐसे ही एक लोकगीत के बारे में आपको बताएंगे, जो फिल्मी गाने के तौर पर हिट हुआ, लेकिन असल में एक कश्मीरी लोकगीत है।

    दरअसल, हम बात कर रहे हैं मिशन कश्मीर के मशहूर गाने बुमरो-बुमरो की, जिसपर लगभग हर किसी ने अपने बचपन में डांस जरूर किया होगा। बच्चों का वॉकर हो या बार्बी वाला पिंक फोन, ये गाना बचपन से ही हमारे कानों पर मिठास घोलता आ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह गाना असल में कोई फिल्मी सॉन्ग नहीं है, बल्कि कश्मीर का एक मशहूर लोकगीत है। आइए आपको बताते हैं इस गाने की पूरी कहानी- 

    क्या है इस गाने का इतिहास?

    ज्यादातर लोग “बुमरो बुमरो” गाने को बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर 'मिशन कश्मीर' से जानते हैं, लेकिन असल में यह गाना 20वीं सदी के बीच का है। यह कश्मीर के साहित्य और थिएटर से जुड़ा एक पारंपरिक लोक गीत है। इसके बोल 1950 के दशक की शुरुआत में दीनानाथ नदीम ने लिखे थे, जो उस दौर के मशहूर कश्मीरी कवियों में से एक थे। उन्होंने "बुमरो" यानी कि "भौंरा" को एक बड़े म्यूज़िकल प्रोजेक्ट के मुख्य हिस्से के तौर पर लिखा था।

    पहली बार कब गाया था यह गीत 

    यह गाना असल में "बोम्बुर ता यंबरजल" (Bombur Ta Yemberzal) के लिए बनाया गया था। यह पहला कश्मीरी ओपेरा था, जिसने पहली बार इस गाने को 1953 में मंच पर पेश किया गया था। इस गाने में एक खूबसूरत फूल के आस-पास मंडराते भंवरे का एक रोमांटिक तरीके से वर्णन किया गया है, जो प्यार, आकर्षण और सुंदरता का प्रतीक है।

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    धीरे-धीरे बना शादी का हिस्सा

    इस गाने को लोगों ने इतना पसंद किया कि यह थिएटर की सीमाओं से बाहर निकल आया। देखते ही देखते "बुमरो" को लोगों ने इस कदर अपनाया कि यह कश्मीर घाटी की संस्कृति का अहम हिस्सा बन गया। बॉलीवुड में आने से बहुत पहले ही, यह कश्मीरी शादियों में गाया जाने वाला एक खास लोक गीत बन चुका था।

    पारंपरिक रूप से इसे महिलाएं मेहंदी की रात गाती हैं, और आमतौर पर इसके साथ 'तुम्बकनारी' (कश्मीर का पारंपरिक ड्रम) की ताल होती है। इस गीत में, दुल्हन बगीचों के फूलों से रंग लाने के लिए भंवरे का आभार व्यक्त करती है। इस गीत में, दुल्हन गाती है कि कैसे भौंरा दूल्हे के बगीचे से रंग लाया है, ताकि उसकी मेहंदी और भी ज्यादा चटख और सुंदर बन सके।

    बॉलीवुड से मिली पूरे देश में पहचान

    सदियों पर कश्मीर की वादियों में गूंजने के बाद यह गीत आखिरकार जब बड़े पर्दे पर आया, तो पूरे देश में छा गया। साल 2000 में आई ऋतिक रोशन और प्रीति जिंटा की फिल्म 'मिशन कश्मीर' में इस गाने को शामिल किया गया। फिल्म के लिए शंकर-एहसान-लॉय ने इस लोकगीत को नया रूप दिया। 

    उन्होंने इसके साथ मॉडर्न और तेज म्यूजिक जोड़ा, लेकिन इसकी मूल पारंपरिक धुन और कश्मीरी हुक लाइन को बनाए रखा। सुनिधि चौहान, जसपिंदर नरूला और शंकर महादेवन की आवाज और स्क्रीन पर ऋतिक- प्रीति जिंटा की जोड़ी ने इस गाने को पूरे देश में जबरदस्त हिट बना दिया।

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