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79 साल की आजादी या 80वां जश्न? 15 अगस्त की कंफ्यूजन दूर करेगा यह आसान 'नंबर गेम'!

Published: Fri, 14 Aug 2026 06:30 PM (IST)Updated: Sat, 15 Aug 2026 09:01 AM (IST)

हर साल 15 अगस्त के मौके पर हम कैलकुलेशन बिठाने लगते हैं कि यह कौन सा वा दिवस है, चलिए यह कन्फ्यूजन हमेशा के लिए दूर करते हैं।

इस साल भारत 80 वां आजादी का दिवस मना रहा है (Image Source: AI Generated)

इस साल भारत 80 वां आजादी का दिवस मना रहा है (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अंग्रेजों ने भारत पर 200 सालों तक राज किया, फिर एक लंबे संघर्ष के बाद भारत देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ। जिसे जवाहरलाल नेहरू ने भाग्यवधयु से चिर प्रतिक्षित भेंट की संज्ञा दी थी। लेकिन हर साल जब भी यह दिवस आता है तो मन में ये सवाल जरूर उठते हैं कि हम इस साल कौन सा वा दिवस मना रहे हैं और हर बार लाल किला ही क्यों ध्वजारोहण के लिए चुना जाता है। आज हम इन्हीं दो बातों को विस्तार से जानेंगे। 

भारत को आजाद हुए कितने साल हुए? 

भारत देश 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों की हुकूमत से आजाद हुआ था। इस हिसाब से गणित लगाएं तो देश को आजाद हुए 79 साल हो गए और इस तरह यह 79 वां दिवस होना चाहिए। पर यहीं पर आकर बच्चों से लेकर बड़ों तक सबको कंफ्यूजन रहती है। 

क्या है इसके पीछे का गणित? 

इसके पीछे का गणित कुछ ऐसा है कि 1947 से 2026 तक भारत को आजाद हुए 79 साल हो चुके हैं, लेकिन यह भारत का 80 वां आजादी का दिवस है। दरअसल, जिस साल कोई घटना पहली होती है उसे पहली एनिवर्सरी के तौर पर मनाया जाता है। इस हिसाब से भारत ने अपना स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 1947 को मनाया था। इसी वजह से भले ही आजादी को 79 साल हो चुके हों, इस साल भारत 80 वां आजादी का दिवस मना रहा है। 

लाल किले पर ही क्यों फहराया जाता है झंडा? 

पहली बार जब देश ने आजादी दिवस मनाया था तो राजधानी में इंडिया गेट के पास स्थित प्रिंसेस पार्क में अंग्रेजों का झंडा उतारकर पहली बार तिरंगा झंडा फहराया गया था। इसके बाद इस जगह को बदलने का फैसला लिया गया, इसके पीछे की वजह प्रिंसेस पार्क का ब्रिटिश शासन से कनेक्शन था। अब ऐसी जगह की तलाश थी जिसकी एक ऐतिहासिक पहचान हो। 

लाल किले को चुनने का लिया गया फैसला 

लाल किला को इसलिए ध्वजारोहण के लिए चुना गया क्योंकि यह किला इतिहास में सत्ता के केंद्र रहा है। इसे साल 1648 में मुगल बादशाह ने बनवाया था, जिसने मुगल काल, ब्रिटिश काल और आजादी का समय, इतिहास के तीनों ही बदलावों के दौर को देखा है। फिर आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पहली बार लाल किले पर तिरंगा फहराते हुए देश को संबोधित किया। इसके बाद से ही इस परंपरा को फॉलो किया जाता रहा है। 

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