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आलिया भट्ट का ये गाना असल में है कश्मीरी लोकगीत, वानवुन की धुन पर बेटियों की विदाई से जुड़ी है इसकी कहानी

Published: Sat, 03 Oct 2026 04:38 PM (IST)Updated: Sun, 04 Oct 2026 01:15 PM (IST)

आलिया भट्ट की फिल्म राजी के दिलबरो गाने की जड़ें कश्मीरी लोकगीत से जुड़ी हैं, आइए जानते हैं इसकी कहानी।

कश्मीरी लोकगीत ‘खानमूज कूर’ से निकला है दिलबरो गाना (Image Source: AI Generated)

कश्मीरी लोकगीत ‘खानमूज कूर’ से निकला है दिलबरो गाना (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बेटी की विदाई से जुड़ा कोई भी गाना हो, हमेशा ही भावुक कर देता है। हमने फिल्मों में बहुत से विदाई गीत सुने हैं, लेकिन बीते कुछ सालों में फिल्म राजी के ‘दिलबरो’ गाने ने मॉडर्न विदाई गीतों में सबसे ज्यादा लोकप्रियता बटोरी है। फिर इसकी एक वजह यह भी है कि इस गीत का संबंध कश्मीर की सदियों पुरानी परंपरा से है। 

जी हां, विदाई गीत ‘दिलबरो’ की जड़ें कश्मीरी पंडितों की शादियों से जुड़ी हुई हैं, आइए आपको इस लोकगीत के बारे में विस्तार से बताते हैं।

कश्मीरी लोकगीत ‘खानमूज कूर’ से निकला है दिलबरो गाना 

साल 2018 में आई आलिया भट्ट की ‘राजी’ फिल्म के मशहूर दिलबरो गाने का आधार कश्मीरी लोकगीत ‘खानमूज कूर’ है। जिसके बोल कुछ इस प्रकार हैं: 

‘ब छसे खानमूज कूर 

द्यु म रुखसात म्यान बोय जानो 

मै छुय वरिव स्था दोर

त्यूर हो यज़ुम लगेयो पार जानो

दियु मै रुक्सत म्यौने भाइजानो…

बाब ते मौज गये परेशान,

येलि हा पोरहुम वरिवुक सामान…’

इस गीत में विदाई के समय एक लड़की अपने भाई से कह रही है कि मैं इस घर की शीशे जैसी नाजुक बेटी हूं, अब मुझे यहां से विदा करो मेरे प्यारे भाईजान। इसके बाद वो अपने ससुराल के लंबे और दूर के रास्ते का भी जिक्र करती है, फिर अपने माता-पिता और भाई-बहन के प्रति अपना प्यार भी जाहिर करती नजर आती है। यह गीत विदाई के उन भावुक पलों को बड़ी ही खूबसूरती से बयां करता है।  

कश्मीरी पंडितों की शादियों का पारंपरिक विदाई गीत 

यह गीत कश्मीरी पंडितों की शादियों से जुड़ी परंपरा का एक अहम हिस्सा है। जिस तरह उत्तर भारत में शादियों की कई रस्म होती हैं, उसी तरह कश्मीर की पारंपरिक शादियों में भी कई दिन चलने वाले कार्यक्रमों की एक पूरी शृंखला होती है। इनमें हर एक रस्म का अपना अलग 'वानवुन' संगीत भी होता है, जो उस समय के मूड के हिसाब से बनाया गया है। 

'वानवुन' की 'बट-ए-वानवुन' शैली में गया गया है गीत 

'वानवुन' का मतलब होता है एक समूह में गीत गाना। हम सभी जानते हैं कि कश्मीर में रहने वाले लोग दो समुदायों में बंटे हुए है। ऐसे में उनकी गायन शैली भी दो हैं 'बट-ए-वानवुन' और 'मुसलमान वानवुन'। इनमें से 'बट-ए-वानवुन' कश्मीरी पंडितों की शैली है, जिसमें संस्कृति शब्दों की बहुलता देखने को मिलती है। 

इसी 'बट-ए-वानवुन' शैली में खानमूज कूर गया गया है, जिसका मतलब घर की लाडली बेटी होता है। जब बेटी घर से विदा हो रही होती है, तब घर की सभी महिलाएं समूह में इस गीत को गाकर अपनी भावनाएं व्यक्त करती हैं।