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क्या सिर्फ गुलाबी रंग की वजह से आप भी चुका रही हैं ज्यादा कीमत? समझिए क्या है पिंक टैक्स

Published: Sat, 07 Mar 2026 12:00 PM (IST)

महिलाओं को पुरुषों की तुलना में एक ही प्रोडक्ट या सर्विस के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है, जिसे पिंक टैक्स कहते हैं।

क्या होता है पिंक टैक्स? (AI Generated Image)

क्या होता है पिंक टैक्स? (AI Generated Image)

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संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आप और आपका एक पुरुष मित्र बाजार से एक ही कंपनी का रेजर, परफ्यूम या साधारण टी-शर्ट खरीदते हैं। गुणवत्ता और वजन बिल्कुल समान है, बस फर्क इतना है कि आपके लिए बने प्रोडक्ट का रंग गुलाबी है या उस पर फॉर विमेन लिखा है। 

जब आप बिल चुकाती हैं, तो पता चलता है कि आपने अपने दोस्त की तुलना में 10% से 20% ज्यादा पैसे दिए हैं। इसी अंतर को पिंक टैक्स (Pink Tax) कहा जाता है।

पिंक टैक्स कोई आधिकारिक सरकारी टैक्स नहीं है, बल्कि यह बाजार की एक ऐसी रणनीति है, जिसमें महिलाओं के लिए बनाए गए प्रोडक्ट और सर्विसेज की कीमत पुरुषों के समान प्रोडक्ट्स से ज्यादा रखी जाती है।

कहां-कहां देना पड़ता है पिंक टैक्स?

यह हिडन टैक्स हमारी रोजमर्रा की जिंदगी के लगभग हर हिस्से में मौजूद है-

  • पर्सनल केयर प्रोडक्ट- साबुन, शैम्पू, रेजर और डियोडरेंट इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। अक्सर महिलाओं के रेजर केवल रंग और पैकेजिंग के आधार पर पुरुषों के रेजर से महंगे बेचे जाते हैं।
  • कपड़े और लॉन्ड्री- महिलाओं के कपड़ों की सिलाई या डिजाइन के नाम पर उनसे ज्यादा कीमत वसूली जाती है। यहां तक कि ड्राई क्लीनिंग शॉप पर भी एक महिला की शर्ट को साफ करने का खर्च पुरुष की शर्ट से ज्यादा हो सकता है।
  • सैलून सर्विसेज- एक साधारण हेयरकट के लिए महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कई गुना ज्यादा पैसों का भुगतान करना पड़ता है, भले ही बाल छोटे ही क्यों न हों।
  • बच्चों के खिलौने- लड़कियों के लिए बने गुलाबी खिलौने या साइकिल, लड़कों के लिए बने समान खिलौनों से महंगे होते हैं।
Pink Tax (4)
(AI Generated Image)

कंपनियां इसे कैसे सही ठहराती हैं?

कंपनियों का तर्क होता है कि महिलाओं के प्रोडक्ट्स बनाने में ज्यादा बारीकी, अलग सुगंध या खास पैकेजिंग की जरूरत होती है। वे इसे मार्केटिंग कॉस्ट और कस्टमाइजेशन का नाम देती हैं। असल में, यह महिलाओं की खरीदारी की आदतों और बेहतर दिखने के सामाजिक दबाव का फायदा उठाने का एक तरीका है।

पे डिसपैरिटी के कारण बढ़ता दबाव

यह केवल कुछ रुपयों का अंतर नहीं है। एक महिला अपने पूरे जीवनकाल में पिंक टैक्स के रूप में लाखों रुपये ज्यादा खर्च कर देती है। हैरान करने वाली बात यह भी है कि दुनिया भर में पे डिसपैरिटी के कारण एक ही काम के लिए महिलाओं की सैलरी पुरुषों से कम है, लेकिन उन्हें अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।

घर का किराया और ट्रांसपोर्ट का खर्चा

यह सिर्फ यहीं खत्म नहीं होता। सुरक्षा के लिहाज से भी महिलाओं को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं। देर रात को कहीं जाने के लिए महिलाएं पब्लिक ट्रांसपोर्ट की जगह महंगे कैब बुक करती हैं, ताकि रास्ते में वे सुरक्षित रह सकें। इसके अलावा, रहने के लिए भी महिलाएं हाई-राइज सोसायटी में घर लेती हैं, जिसका किराया और मेंटेंस काफी ज्यादा होता है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों को यह चिंता कम होती है।