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कभी पुरुषों के जख्मों पर लगाए जाते थे सैनिटेरी पैड, फिर कैसे बने महिलाओं के पीरियड हाइजीन का साथी?

Published: Fri, 06 Nov 2026 11:29 AM (IST)

सैनिटेरी पैड्स का इतिहास युद्ध के मैदान से जुड़ा है, जहां इनका इस्तेमाल घायल सैनिकों के खून रोकने के लिए होता था।

पुरुषों के लिए बने थे सैनिटेरी पैड्स (Image Source: AI Generated)

पुरुषों के लिए बने थे सैनिटेरी पैड्स (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज सैनिटेरी पैड्स महिलाओं के पीरियड हाइजीन का साथी बन चुके हैं, पर क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि इसका इतिहास पीरियड्स से न जुड़ा होकर युद्ध के मैदान से जुड़ा है? जी हां, तेजी से बढ़ने वाले इस व्यापार का सफर गोला-बारूद और युद्ध भूमि से होकर जाता है। आइए आपको सैनिटेरी पैड का दिलचस्प इतिहास बताते हैं। 

पुरुषों के लिए बने थे सैनिटेरी पैड्स 

कहा जाता है कि डिस्पोजेबल पैड बनाने का सबसे पहले ख्याल युद्ध के मैदान में सैनिकों की सेवा में लगीं फ्रांस की नर्सों के मन में आया था। जब युद्ध से घायल सैनिक लौटते थे, तो उनका खून रोकने के लिए इन पैड्स का इस्तेमाल होता था। उस समय पैड को लकड़ी के गूदे से तैयार किया जाता था, इसी वजह से पैड के सोखने की क्षमता अच्छी होती थी और ये सस्ते होने के चलते आसानी से फेंके भी जा सकते थे। 

यूनान के इतिहास में पहली बार जिक्र 

वैसे तो पैड्स को बनाने और उसके इस्तेमाल का जिक्र फ्रांस से ही मिलता है, लेकिन यूनान के इतिहास में इसका पहले से ही जिक्र था। कहते हैं कि यहां के 10 वीं सदी के आसपास किसी महिला ने पुरुष से अपना पीछा छुड़ाने के लिए कपड़े से बना रैग उसके ऊपर फेंक दिया था।  

डिस्पोजेबल पैड की देखा-देखी शुरू हुआ बिजनेस 

नर्सों की तरकीब के बाद इसका बिजनेस आयडिया सोचा गया और साल 1888 में बनकर तैयार हुआ 'साउथबॉल पैड' नाम का डिस्पोजेबल पैड। इसके बाद तो बाकी कंपनियों में भी इसे बनाने की होड़ शुरू हो गई, अमेरिका में जॉनसन एंड जॉनसन ने भी साल 1896 में 'लिस्टर्स टॉवल: सेनेटरी टॉवेल्स फॉर लेडीज' नाम से अपना प्रोडक्ट भी बाजार में लॉन्च कर दिया।  

शर्म के मारे रखा गया अजीबो-गरीब नाम  

उस दौर में भी आज की ही तरह महिलाएं पीरियड्स पर खुलकर बात करने से झिझकती थीं, फिर यह कैसे हो सकता था कि वो सैनिटेरी पैड की खरीदारी बिना शर्म के कर पाएं। उनकी इस परेशानी को देखते हुए 1920 के दशक की शुरुआत में डिस्पोजेबल पैड का नाम 'नुपाक' रख दिया गया। एक अजीब और छिपा हुआ नाम, जिससे प्रोडक्ट की पहचान न की जा सके।

ज्यादा कीमत की वजह से नहीं हुई बिक्री 

भले ही सैनिटेरी पैड्स 130 साल पहले ही बन गए थे, लेकिन ये इतने महंगे होते थे कि आम महिलाएं इसे खरीद ही नहीं पाती थीं। ऐसे में वो पीरियड्स के दौरान पारंपरिक तरीकों का ही उपयोग करती रहीं। इसमें भी सबसे दिलचस्प बात यह कि जब वो इसे खरीदने काबिल हुईं, तब भी डिब्बे में पैसे डालकर पैड्स ले जाने का चलन शुरू हुआ ताकि बिना कुछ कहे ही दुकानदार समझ जाए। 

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