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पूर्वांचल के इस ठेठ भोजपुरी गीत में लगा जापानी म्यूजिक का तड़का, अनोखी है इंटरनेट पर वायरल इस लोकगीत की कहानी

Published: Sun, 20 Sep 2026 02:47 PM (IST)Updated: Mon, 21 Sep 2026 12:01 PM (IST)

भोजपुरी की गूंज अब जापान तक पहुंच चुकी है, जिसकी झलक आप वायरल हो रहे 'चंपवा की कलियां' गाने में देख सकते हैं।

ठेठ पूर्वांचल के भोजपुरी गीत ‘चम्पवा की कलियां’ में जापानी शमिसेन का मेल (Image Source: AI Generated)

ठेठ पूर्वांचल के भोजपुरी गीत ‘चम्पवा की कलियां’ में जापानी शमिसेन का मेल (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल सोशल मीडिया पर पूर्वांचल का एक ठेठ भोजपुरी शैली में का गाना खूब वायरल हो रहा है। इस गाने की खास बात यह है कि इसमें जापानी संगीत का अनोखा संगम भी देखने को मिलता है। इसे सुनने पर किसी भी भारतीय को गर्व होगा, खासकर कि अगर उसका संबंध पूर्वांचल या बिहार से हो। 

इसने यह बात तो साबित कर दी है कि देशों की सरहद हो सकती है लेकिन कला, साहित्य और संगीत की कोई सीमा नहीं होती। चलिए आपको इस भोजपुरी गाने के साथ जापानी तड़के की दिलचस्प कहानी बताते हैं।

भोजपुरी लहर पहुंची जापान तक 

पूर्वांचली गीत ‘चम्पवा की कलियां’ आजकल सोशल मीडिया पर सुर्खियों में बना हुआ है। दरअसल, इस गीत में जापानी संगीत का अनूठा मेल देखने को मिलता है। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के अवधी-भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा गाया जाने वाला एक पारंपरिक गीत है।  

ठेठ पूर्वांचल में जापानी शमिसेन का मेल 

‘चम्पवा की कलियां’ गाना भोजपुरी शैली में गाया गया है, जो बिहार के साथ ही ठेठ पूर्वांचली क्षेत्र की संस्कृति भी दर्शाता है। यह गाना सुनने पर ऐसा लग सकता है कि इसमें किसी जश्न की बात की जा रही है जबकि इसमें विरह यानी बिछोह की गहरी कहानी छिपी हुई है। 

वहीं, इसमें जापानी शमिसेन वाद्य यंत्र का इस्तेमाल किया गया है। यह तीन तारों वाला ट्रेडिशनल इंस्ट्रूमेंट है जो एक बड़े से प्लैक्ट्रम की मदद से बजाया जाता है। इस इंस्ट्रूमेंट की खास बात यह है कि इसकी ध्वनि एकदम तीखी और गतिशील होती है। 

क्या है गीत का मतलब? 

"बाटो जोहे नदियां, काहे आये न पतवार..." इस पंक्ति में नायिका नाव और उसके किनारे से खुद की तुलना करते हुए कहती है कि वह कब से राह देख रही है, पर उसका प्रियतम अभी तक नहीं आया है। 

"पिया चल गइले कलकत्ता, संग ले गइलन बहार..." इसके बाद नायिका शिकायत करते हुए कहती है कि उसका पति कलकत्ता चला गया है, साथ में वो उसके जीवन की सारी खुशियां भी ले गया है। 

"अरे वो ही चम्पा कलिया का ककही... ककही बनवली झरेली, अरे सँवार लंबी केस झरेली..." गाने की यह लाइन चम्पा की कली से बनी कंघी पर आधारित है, जिससे नायिका अपने बाल संवार रही है और अपने प्रियतम को याद कर रही है। 

धोबिया नृत्य की दिखाई देती है झलक 

इस गाने में सिर्फ भोजपुरी गीत की शैली ही नहीं बल्कि लोकनृत्य की झलक भी देखने को मिलती है। कलाकार पूर्वांचल के धोबिया नृत्य पर भी थिरकते नजर आते हैं। यह खासतौर से आजमगढ़, जौनपुर और गाजीपुर का पारंपरिक नृत्य है। इसे एक दौर में शादी-ब्याह, त्योहार और जन्मदिन के शुभ अवसरों पर किया जाता था।