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रील्स पर छाया हरियाणा का ये ठेठ देसी गीत, क्या आपने सुना हर पत्नी के दर्द को बयां करने वाला ये गाना

Published: Fri, 31 Jul 2026 05:36 PM (IST)

हरियाणा का मशहूर लोकगीत 'मेरे ही करम में बावलिया लिखा था' शादियों पर खूब गाया जाता है। इस गीत में शादीशुदा जीवन की मीठी शिकायतों को बयां किया गया है।

हरियाणा का मशहूर लोकगीत (AI Generated Image)

हरियाणा का मशहूर लोकगीत (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हरियाणा की लोक संस्कृति में लोकगीतों की खास जगह है। शादी ब्याह से लेकर बच्चे के जन्म और तीज-त्योहार, हर मौके पर लोकगीत जरूर गाए जाते हैं। ये लोकगीत गांव के जीवन, रिश्तों के ताने-बाने और हंसी-मजाक से जोड़कर बनाए जाते हैं। इन्हीं में एक लोकगीत है मेरे ही करम में बावलिया लिखा था। 

ये लोकगीत काफी मशहूर है और सालों से हरियाणा में महिलाएं ये गीत गाती आई हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस गीत की खासियत क्या है और ये क्यों गाया जाता है? आइए जानें क्यों खास है ये गीत और इसमें क्या कहा गया है।

क्यों गाया जाता है ये गीत?

हरियाणा का ये मशहूर गीत शादी-ब्याह और तीज-त्योहार के मौकों पर महिलाओं के सांस्कृतिक कार्यक्रम में गाया जाता है। महिलाएं ढोलक, मंजीरे और थाली लेकर एक साथ बैठती हैं और इस गीत से हंसी-मजाक का खास माहौल बनता है। इस गीत में महिलाएं अपने पति और ससुराल वालों पर व्यंग्य कसती हैं। 

क्या कहते हैं इस गीत के बोल?

हरियाणवी में बावलिया या बावला का मतलब होता है नासमझ या बहुत सीधा-साधा। महिला अपने पति को बावलिया कह रही है और उसके सीधेपन और बचकानी हरकतों को लेकर शिकायत कर रही है। महिला कहती है कि उसकी सास के पांच बेटे हैं, लेकिन उसके ही भाग्य में ये नासमझ लिखा था। फिर गाने के आगे के हिस्सों में वो अपने पति की नासमझियों की कहानी बताती है। इन्हीं शिकायतों से माहौल हंसी-मजाक वाला हो जाता है और इसमें पति-पत्नि के बीच के अपनेपन और मीठी तकरार की झलक मिलती है। 

क्यों इतना खास है ये गीत?

हरियाणवी लोकगीतों की सबसे बड़ी खासियत है उनका बेबाक और मस्ती भरा अंदाज। यह गीत शादी-शुदा जीवन की खट्टी-मिठी तकरारों कों बड़े ही मजाकिया ढंग में बताता है। इस गीत की धुन भी काफी मजेदार है और ढोलक की थाप पर ऐसा समा बंधता है कि महिलाएं इस पर जमकर डांस करती हैं। आमतौर पर शादी-ब्याह के मौकों पर महिलाएं हरियाणा की पारंपरिक पहनावा दामण, कुर्ती और गोटा लगी चूनर पहनकर तैयार होती हैं। 

कैसे हुई इस गीत की शुरुआत?

इस गीत को सबसे पहले किसने लिखा या किसने गाया इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती, लेकिन हरियाणा की संस्कृति में यह काफी घुला-मिला है और ऐसे ही पीढ़ी-दर-पीढ़ी गाते हुए यह गीत आगे बढ़ा है। हालांकि, आज इस गीत पर कई वीडियो बन चुके हैं और सोशल मीडिया पर भी इस गाने पर कई रील्स बनाए गए हैं।