कहीं आपका बॉस भी तो नहीं कर रहा 'Quiet Firing'? इन 4 संकेतों से पहचानें खतरा
क्या आप क्वायट फायरिंग (Quiet Firing) का मतलब जानते हैं? दरअसल, कॉर्पोरेट डिक्शनरी में यह नया शब्द जुड़ा है, लेकिन यह कोई नई चीज नहीं है, बल्कि कई साल ...और पढ़ें

किसे कहते हैं क्वायट फायरिगं? (Picture Courtesy: Freepik)
HighLights
क्वाइट फायरिंग में कर्मचारी को सीधे तौर पर नौकरी से नहीं निकाला जाता
इसमें कर्मचारी की जिम्मेदारियों को धीरे-धीरे कम किया जाता है
क्वायट फायरिंग का असर कर्मचारी और कंपनी दोनों पर पड़ता है
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। वर्कप्लेस से जुड़े नए ट्रेंड और टर्म्स अक्सर सुनने को मिलते रहते हैं। ऐसा ही एक टर्म आजकल खूब सुनने को मिल रहा है, जिसे Quiet Firing कहते हैं। आपको बता दें कि यह शब्द भले ही नया हो सकता है, लेकिन यह प्रैक्टिस काफी पुरानी है।
जी हां, Quiet Firing आज से शुरू नहीं हुई है, बल्कि काफी समय से कॉर्पोरेट वर्ल्ड की कड़वी सच्चाई बनी हुई है। आज भी कई कंपनियां इसे फॉलो करती हैं। लेकिन सवाल आता है कि Quiet Firing होती क्या है और कर्मचारी पर इसका कैसा असर होता है। आइए जानें इन सवालों के जवाब।
क्या होती है Quiet Firing?
वर्कप्लेस पर जरूरी नहीं हर चेतावनी ई-मेल के जरिए या लिखित नोटिस के रूप में आए। कई बार आपके साथ हो रहा व्यवहार भी इस ओर इशारा करता है कि आपको धीरे-धीरे टीम से बाहर किया जा रहा है। जैसे कि आपके भेजे ई-मेल का समय पर जवाब नहीं आता या आपके बिना मीटिंग्स होने लगती हैं या बिना वजह बनाए आपकी जिम्मेदारियों को कम किया जाने लगे, तो इसे महज इत्तेफाक नहीं समझें। इसे कॉर्पोरेट डिक्शनरी में Quiet Firing कहते हैं।
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(Picture Courtesy: Freepik)
यह एक तरह की मैनेजमेंट टैक्टिक है, जहां किसी कर्मचारी को सीधे तौर पर नौकरी से नहीं निकाला जाता, बल्कि धीरे-धीरे उसे बाहर धकेला जाता है। यह Quiet Quitting का ठीक उल्टा है। जहां 'क्वाइट क्विटिंग' में कर्मचारी केवल उतना ही काम करता है जितना जरूरी है, वहीं 'क्वाइट फायरिंग' में मैनेजर कर्मचारी के लिए काम के माहौल को इतना मुश्किल या नीरस बना देता है कि वह खुद इस्तीफा देने पर मजबूर हो जाए।
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कैसे होते हैं Quiet Firing के संकेत?
- अवसरों में कटौती- प्रोमोशन या जरूरी प्रोजेक्ट्स से दूर रखना।
- फीडबैक की कमी- परफॉर्मेंस पर कोई चर्चा न करना या पॉजिटिव क्रिटिसिज्म के बजाय नजरअंदाज करना।
- रिसोर्स की कमी- काम पूरा करने के लिए जरूरी बजट, टूल या टीम सपोर्ट छीन लेना।
- अलगाव- टीम मीटिंग्स में शामिल न करना।
यह कितना गंभीर है?
- मानसिक स्वास्थ्य पर असर- एक कर्मचारी के लिए यह स्थिति 'गैसलाइटिंग' जैसी होती है। उसे अपनी क्षमताओं पर संदेह होने लगता है। सीधी बातचीत के अभाव में कर्मचारी लगातार स्ट्रेस, एंग्जायटी और आत्म-विश्वास की कमी से जूझता है। यह स्थिति प्रोफेश्नल से ज्यादा पर्सनल नुकसान पहुंचाती है।
- वर्क कल्चर को नुकसान- जब कोई संस्थान ट्रांसपेरेंट होने के बजाय इस तरह की रणनीतियां अपनाता है, तो वहां डर का माहौल पैदा होता है। दूसरे कर्मचारियों का भी मैनेजमेंट पर से भरोसा उठ जाता है। इससे टीम की प्रोडक्टिविटी गिरती है और एक टॉक्सिक कल्चर का जन्म होता है।
- जवाबदेही से भागना- क्वाइट फायरिंग दरअसल मैनेजमेंट की विफलता है। यह दिखाता है कि मैनेजर मुश्किल बातचीत करने में सक्षम नहीं है। लंबे प्रोसेस से बचने के लिए इसे एक शॉर्टकट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जो कंपनी की ब्रांड वैल्यू को नुकसान पहुंचाता है।