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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 25, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Parenting Tips: बच्चों के साथ-साथ पेरेंट्स भी सीखें अच्छी आदतें, तभी होगी सही परवरिश

    Updated: Fri, 25 Jul 2025 07:28 PM (IST)

    बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने पेरेंट्स को करते हुए देखते हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आत्मविश्वासी संस्कारी और जिम्मेदार बने तो पहले खुद की आद ...और पढ़ें

    बदलते समय के साथ पेरेंट्स को बदलना भी है जरूरी (Picture Credit- Freepik)
    बदलते समय के साथ पेरेंट्स को बदलना भी है जरूरी (Picture Credit- Freepik)

    HighLights

    1. बच्चों की परवरिश पर माता-पिता के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।
    2. खासकर बदलते समय में यह और भी ज्यादा मुश्किल हो चुका है।
    3. ऐसे में अब बदलते समय में कुछ चीजों को बदलना जरूरी है।

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बच्चों की अच्छी परवरिश सिर्फ उन्हें डिसिप्लीन सिखाने या पढ़ाई में आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह पेरेंट्स की आदतों और लाइफ स्टाइल पर भी निर्भर करती है, क्योंकि बच्चे अपने पेरेंट्स से ही सीखते हैं, इसलिए अगर पेरेंट्स खुद को बेहतर बनाएंगे, तो बच्चों में भी सकारात्मक गुण विकसित होंगे।

    अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और संस्कारी बने, तो आपको अपनी कुछ आदतों में बदलाव करना होगा। तो आइए जानते हैं उन महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में जो बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए जरूरी हैं।

    गुस्से को नियंत्रित करें

    बच्चों पर बार-बार गुस्सा करने या चिल्लाने से उनका आत्मविश्वास कमजोर हो सकता है। अगर आप हर छोटी गलती पर नाराज होते हैं, तो वे डर की भावना विकसित कर सकते हैं। इसकी जगह धैर्य से उनकी गलतियों को समझाएं।

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    स्क्रीन टाइम कम करें 

    अगर आप खुद टीवी, मोबाइल या लैपटॉप पर ज्यादा समय बिताते हैं, तो बच्चे भी इसे एक सामान्य आदत मान लेंगे। इसलिए अपने स्क्रीन टाइम को कम करें।

    पॉजिटिव भाषा का प्रयोग करें

    नेगेटिव शब्द जैसे "तुमसे नहीं होगा" या "तुम बहुत जिद्दी हो" बच्चों के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकते हैं। इसकी जगह पॉजिटिव और इंस्पिरेशनल शब्दों का उपयोग करें, जैसे "तुम बहुत मेहनती हो", "तुम यह कर सकते हो"।

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    खुद अनुशासन का पालन करें

    बच्चे वही सीखते हैं, जो वे आपको करते हुए देखते हैं। अगर आप समय पर नहीं सोते, अनहेल्दी फूड्स खाते हैं या वादे पूरे नहीं करते, तो बच्चे भी ऐसा ही करेंगे। इसलिए, पहले खुद अनुशासन का पालन करें।

    बच्चों की तुलना न करें

    हर बच्चा अलग होता है और उसकी अपनी क्षमताएं होती हैं। अगर आप बार-बार अपने बच्चे की तुलना उसके भाई-बहनों या दोस्तों से करेंगे, तो इससे उसका सेल्फ रिस्पेक्ट प्रभावित होगा।इसलिए उनकी पर्सनल क्वालिटी के आधार पर प्रोत्साहित करें ।

    प्यार और सराहना जताने में संकोच न करें

    बच्चों को सिर्फ डिसिप्लीन ही नहीं, बल्कि इमोशनल अटैचमेंट की भी जरूरत होती है। इसलिए उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों की तारीफ करें, उन्हें गले लगाएं और उनके प्रयासों को सराहें।

    खुद की सेहत और आदतों का ध्यान रखें

    अगर आप खुद अपनी सेहत, खान-पान और दिनचर्या का ध्यान नहीं रखते, तो बच्चे भी ऐसी ही आदतें विकसित कर सकते हैं। उन्हें हेल्दी लाइफस्टाइल सिखाने के लिए आपको खुद एक उदाहरण देना होगा

    खुले संवाद का माहौल बनाएं

    आप अपने बच्चे से खुलकर बात नहीं करते, तो वे अपनी भावनाओं और समस्याओं को आपसे साझा करने में झिझकेंगे। इसलिए उनकी बातें ध्यान से सुनें और बिना डांटे या आलोचना करें उनकी बाते सुने।

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