यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 24, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Relationship Goals: पति-पत्नी के रिश्ते में बना रहे प्यार और अपनापन, इसके लिए बचें इन गलतियों से
Relationship Goals अकसर देखा गया है कि लोग अपने साथी को अपने ही रंग में ढालने की कोशिश में जुट जाते हैं। वे ऐसा इसलिए करते हैं कि वह परफेक्ट और बेस्ट ...और पढ़ें

नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Relationship Goals: शादी एक ऐसा खूबसूरत रिश्ता है, जहां मैं और तुम का कोई फर्क नहीं रह जाता। दो लोग एक-दूसरे के रंग में रंग कर हम बन जाते हैं। लोग अपने साथी को ही दोस्त और हमराज बना लेते हैं। सच्चा साथ एक-दूजे का हाथ थामे जीवन में आने वाले हर उतार-चढ़ाव को हंसते-हंसते पार कर जाते हैं। दिक्कत तब होती है, जब लोग जीवनसाथी को प्रतिदंद्वी समझने लगते हैं। आप भी अपने रिश्ते का मूल्यांकन करें, अगर आपके मन में अपने साथी के प्रति ऐसी भावना पनप रही हो तो सचेत हो जाएं।
तुमसे नहीं होगा
कोई व्यक्ति किसी काम में अपने पार्टनर की मदद करता है, तो उसका साथी सराहना करने के बजाय इस कोशिश में गलतियां निकालने लगता है। अरे..ये क्या किया तुमने? तुमसे नहीं हो पाएगा। तुम मदद न ही करो तो अच्छा है। क्या आप ऐसे जुमले अक्सर अपने पार्टनर से कहते हैं? अगर ऐसा करते हैं तो खुद को बदलने की कोशिश करें। इन बातों से रिश्ता और उलझता है।
अगर हो पार्टनर की तारीफ
आपके दोस्त या रिश्तेदार अगर आपके पार्टनर के गुणों को सराहते हैं, तो आपको खुशी होती है या ईषर्या? आपके पार्टनर की तरक्की से आपके अभिमान को तो ठेस नहीं पहुंचती? क्या आपके मन में ऐसा ख्याल अक्सर पनपता है कि जिसे देखे मेरी पति/पत्नी की ही तारीफ में लगा रहता है जैसे मुझमें तो कोई गुण है ही नहीं। इस तरह के तमाम नकारात्मक विचार ही मन में ईर्ष्या को जन्म देते हैं और आपको भी ईगोइस्ट बनाते चले जाते हैं। ऐसे में आप यह समझ ही नहीं पाते कि आप जिससे ईर्ष्या रख रहे हैं, वह आपका साथी है न कि प्रतिस्पर्धी।
हेल्दी कॉम्पिटिशन का भाव
कॉम्पिटिशिन करना बुरी बात नहीं, लेकिन वह कॉम्पिटिशन हेल्दी होना जरूरी है। कोशिश करें कि अपने मन में नकारात्मक विचारों को न आने दें और अपने हमसफर को अपनी जिंदगी का हिस्सा समझें न कि अपना जिंदगी का हिस्सा समझें न कि अपना प्रतियोगी। दरअसल, होता यह है कि साथ रहते-रहते कब छोटी-छोटी बातों पर मीन-मेख निकालने की आदत आपके मन में प्रतियोगिता की भावना भर देती है। इसका एहसास ही नहीं होता। पति-पत्नी दोनों में ही यह भावना घर करने लगती है कि अपने पार्टनर से ज्यादा गुणी हूं। ऐसे हंसी-मजाक से शुरू होने वाली बातचीत कब तानों में बदल जाती है और एक-दूसरे के प्रतिद्वंदी कैसे बन जाते हैं, इस बात से खुद ही बेखबर रहते हैं।
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कमियां न गिनाएं
अकसर कपल अपने दांपत्य जीवन को बेहतर साबित करने के लिए अपने पार्टनर की कमजोरियां गिनाने लगते हैं। यहां तक कि उनके रंग-रूप और कद-काठी पर भी ताने देने से नहीं चूंकते। पत्नियों को अक्सर वाद-विवाद या झगड़े में कहते सुना जाता है कि मुझे तो डॉक्टर और तुमसे ज्यादा हैंडसम लड़के मिल रहे थे पर नसीब देखो। वही पति भी पत्नियों के फीगर व रंग को लेकर कहते हैं कि शर्माजी की लड़की का रिश्ता आया था जो तुमसे ज्यादा गोरी और सुंदर थी लेकिन मां को पता नहीं तुमने क्या दिखा? यह भले ही छोटी-छोटी बातें हैं पर इनसे बचें।
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