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छत्तीसगढ़ में 'मितान' तो उत्तराखंड में 'मिज्जू', फ्रेंडशिप डे से भी पुरानी हैं भारत की ये पारंपरिक 'दोस्ती रस्म'

Published: Sat, 01 Aug 2026 11:04 AM (IST)

दोस्ती भले ही खून का रिश्ता नहीं, पर किसी मुश्किल में सबसे पहले दोस्त ही याद आता है। इस वजह से इसे लेकर कई राज्यों में रस्में निभाई जाती हैं।

भारत में दोस्ती से जुड़ी पुरानी परंपराएं (Image Source: AI Generated)

भारत में दोस्ती से जुड़ी पुरानी परंपराएं (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत विविधताओं से भरा देश है, जहां रिश्तों को भी परंपराओं से जोड़कर उसे खूबसूरत रूप दिया गया है। फिर चाहे वो पति-पत्नी का रिश्ता हो, माता-पिता और बच्चे का रिश्ता हो या बुआ और ननद का।

इन सभी के बीच दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो भले ही खून का नहीं पर जिंदगी में उतना ही मायने रखता है। यही वजह है कि देश के कुछ राज्यों में दोस्तों के लिए भी परंपराएं बनाई गई हैं। अगर आपने ऐसा पहली बार सुना है तो चलिए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं। 

छत्तीसगढ़ की 'मितान' और 'मितानीन' प्रथा

जब पहले के जमाने में फ्रेंडशिप डे नहीं मनाया जाता था तब से ही छत्तीसगढ़ में 'मितान' और 'मितानीन' प्रथा

मनाई जाती है। उस समय जातिगत भेदभाव ज्यादा था और इसी को मिटाने के लिए इस परंपरा की शुरुआत हुई। छत्तीसगढ़ में मितान पुरुष मित्र को कहा जाता है और मितानीन महिला मित्र को। 

क्या है यह परंपरा? 

छत्तीसगढ़ की इस अनोखी परंपरा में एक पुरुष किसी दूसरे पुरुष को अपना दोस्त बना सकता है और एक महिला किसी दूसरी महिला को। यह कोई आम दोस्ती नहीं होती थी, इसमें वह दोस्त परिवार के सदस्य की तरह हो जाता है यानी अब वह उसके सुख-दुख का साथी भी है। इसमें दोनों तरफ के परिवार एक दूसरे को नारियल भेंट करते हैं और जिंदगी भर दोस्ती निभाने का वादा भी करते हैं। 

उत्तराखंड की 'मिज्जू' और 'संगझू' परंपरा

दोस्ती से जुड़ी एक खास परंपरा उत्तराखंड के कुमाऊं जिले में भी मनाई जाती है जिसका नाम है 'मिज्जू' और  'संगझू'। कहते हैं कि इस परंपरा की शुरुआत चंद वंश के राजा ने की थी, ताकि दो अलग-अलग जाति के लोगों के बीच भेदभाव मिटाया जा सके।  

क्या है यह परंपरा?

इस परंपरा की सबसे खास बात यह है कि उस समय में एक ब्राह्मण व्यक्ति की दोस्ती दलित से हो जाती थी और कोई उसपर सवाल नहीं उठाता था। इसमें भी दोनों परिवारों की सहमति होती थी कि आगे चलकर यह दोस्ती नहीं टूटेगी, बल्कि मजबूत होगी। 'मिज्जू' परंपरा को निभाने के लिए पीठ्या टिका नाम की एक रस्म होती है, जिसमें कुल देवता की पूजा कर अपनी दोस्ती को सलामत रखने का वर मांगते हैं। 

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 'महाप्रसाद' परंपरा 

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों ही जगह दोस्ती से जुड़ी यह परंपरा निभाई जाती है। यहां  'महाप्रसाद' का मतलब जिगरी दोस्त है। एक बार महाप्रसाद बन गया तो कई पीढ़ियों तक इसे निभाया जाता है। यह परंपरा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों का हिस्सा है। 

क्या है यह परंपरा?

इसमें भगवान जगन्नाथपुरी का महाप्रसाद, गंगाजल, तुलसी और फूलों को एक दूसरे को देकर दोस्ती की कसम खाई जाती है और वादा किया जाता है कि यह दोस्ती सालों नहीं बल्कि पीढ़ियों तक चलेगी।

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