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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 08, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    मॉर्डन पेरेंटिंग का बेहद आसान तरीका है Horizontal Parenting, समझें इसके फायदे और क्रिएटिव तरीके

    Updated: Wed, 08 Jan 2025 05:20 PM (IST)

    बदलते समय के साथ ही पेरेंटिंग का तरीका भी काफी बदल चुका है। इन दिनों पेरेंट्स काफी बिजी रहते हैं जिसकी वजह से उन्हें दो पल आराम करने का भी नहीं मिलता ...और पढ़ें

    क्या होती है हॉरिजॉन्टल पेरेंटिंग? (Picture Credit- Freepik)
    क्या होती है हॉरिजॉन्टल पेरेंटिंग? (Picture Credit- Freepik)

    HighLights

    1. बच्चों की परवरिश पर माता-पिता के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।
    2. हालांकि, बदलते समय के साथ पेरेंटिंग का तरीका भी काफी बदल चुका है।
    3. हॉरिजॉन्टल पेरेंटिंग एक ऐसा तरीका है, जो इन दिनों काफी प्रचलति है।

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बदलते समय के साथ ही पेरेंटिंग का तरीका भी बदलने लगा है। अपनी सुविधा और सोच के अनुसार लोग पेरेंटिंग के प्रकार को भी चुनने लगे हैं। जेंटल पेरेंटिंग, सबमिसिव पेरेंटिंग, ऑथोरोटेटिव पेरेंटिंग जैसे पेरेंटिंग के कई तरह लोगों के बीच इन दिनों प्रचलित हो चुका है।

    हालांकि, बहुत कम लोग ही पेरेंटिंग के एक और प्रकार को जानते होंगे और वह है हॉरिजॉन्टल पेरेंटिंग। दिनभर की भागदौड़ और काम के प्रेशर के बाद अक्सर हर कोई आराम करना चाहता है, लेकिन घर में छोटे बच्चों के होने पर ऐसा हो पाना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में हॉरिजॉन्टल पेरेंटिंग काफी कारगर साबित होती है। आइए आपको बताते हैं क्या है हॉरिजॉन्टल पेरेंटिंग और इसके फायदे-

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    क्या है हॉरिजॉन्टल पेरेंटिंग?

    इस प्रकार की पेरेंटिंग में आप लेटे-लेटे ही बच्चे का ध्यान रख सकते हैं, जिससे आपको जरूरी आराम भी मिलता है और आपका बच्चा भी सुरक्षित तरीके से व्यस्त रहता है। अगर आपका बच्चा आराम करने और सोने से दूरी बनाता है, तो उसके चक्कर में अपनी सेहत के साथ समझौता न करें। अगर आप सो नहीं सकते तो कम से कम लेट कर लंबी सांसें लेकर रिलैक्स कर सकते हैं। मेंटली ड्रेन पेरेंट्स के लिए हॉरिजॉन्टल पेरेंटिंग एक बून है।

    आइए जानते हैं हॉरिजॉन्टल पेरेंटिंग के फायदे

    • एनर्जी कंजरवेशन– इससे बहुत ज्यादा थके हुए पेरेंट्स अपनी एनर्जी सेव कर सकते हैं और थकान से राहत पा सकते हैं।
    • क्रिएटिव इंगेजमेंट– लेटे हुए कई प्रकार के ऐसे गेम्स के क्रिएटिव तरीके खेलने को मिलते हैं, जिससे पेरेंट्स को थकान से राहत मिलने के साथ ही बच्चे का बौद्धिक विकास भी होता है।
    • शारीरिक रूप से करीब– बच्चे के लेवल पर जब आप लेट कर उनके साथ लगातार गेम्स खेलते हैं और कोई क्रिएटिव तरीके से उन्हें बिजी रखते हैं, तो वे शारीरिक रूप से आपके करीब होते हैं, जिससे पेरेंट्स और बच्चे की बॉन्डिंग और भी बेहतर होती है।

    हॉरिजॉन्टल पेरेंटिंग करने के क्रिएटिव टिप्स

    • रोड मैप टीशर्ट- टीशर्ट पर पीछे की तरफ रोड मैप बनाएं या फिर रोड का ट्रैक बनाएं, जहां बच्चे अपनी छोटी-छोटी कार चलाएंगे। इससे आप पेट के बल लेट कर शरीर को आराम भी दे पाएंगे, पीठ पर बच्चे कार चलाएंगे तो वे आपसे शारीरिक रूप से करीब होंगे, इससे एक प्रकार की मसाज भी होगी और साथ ही वे घंटों व्यस्त भी रहेंगे। रोड मैप की जगह आप टिक टैक टो गेम भी बना सकते हैं।
    • स्टोरीटाइम स्नगल- लेट कर किताबें पढ़ें और वैरायटी की कहानियां सुनें और सुनाएं। इससे बच्चों की बौद्धिक क्षमता का विकास भी होगा और साथ ही एकसाथ स्नगल कर के सोने से बच्चे आपके और भी करीब आएंगे।
    • सॉफ्ट टॉयज थ्रो- लेटे हुए सॉफ्ट टॉयज या पिलो को फेंकें और बच्चे से उठा कर लाने को कहें। इससे बच्चा उछल कूद कर के आपके सामने ही खेलेगा और इस तरह के गेम में घंटों व्यस्त रहेगा।

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