जंगल, पहाड़ और बादलों के बीच से गुजरती हैं भारत की ये टॉय ट्रेनें, सफर के लिए याद रखें ये 5 खूबसूरत रूट
भारत की इन टॉय ट्रेनों का संबंध ब्रिटिश काल से है, लेकिन आज भी इनका सफर उतना ही यादगार हो सकता है।

भारत की फेमस टॉय ट्रेन (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आपने शहर से दूर अपने गांव जाते हुए या ग्रामीण जीवन से शहर की तरफ आते हुए ट्रेन का सफर तो जरूर किया होगा। पर कभी ऐसी ट्रेन में बैठें हैं जो हरे-भरे जंगलों, बादलों और पहाड़ों के बीच से होते हुए निकले? हम बात कर रहे हैं भारत की टॉय ट्रेनों की, जिसके इतिहास के बारे में हमने पिछली बार जिक्र किया था।
चलिए आज इन्हीं फेमस टॉय ट्रेनों के सफर पर चलते हैं, और जानते हैं भारत में इन ट्रेनों से जुड़े बेस्ट रूट्स।
हिमालयन क्वीन
कालका से शिमला के बीच चलने वाली हिमालयन क्वीन टॉय ट्रेन को साल 1903 में अंग्रेजों ने बनवाया था। करीब 96-97 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली इस नैरोगेज ट्रेन को अपना सफर पूरा करने में 5 से 5.5 घंटे का समय लगता है। आपको जानकर हैरानी कि अपने सफर के दौरान यह ट्रेन 102 सुरंगों और 82 पुलों से होकर गुजरती है।
ऐसे में अगर आप बच्चों के साथ एक मजेदार ट्रिप एन्जॉय करना चाहते हैं तो हिमालयन क्वीन को विश लिस्ट में शामिल करें।
दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे
दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे भारत की पहली टॉय ट्रेन है, जिसका निर्माण ब्रिटिश काल में साल 1881 में किया गया था।जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग तक चलने वाली यह ट्रेन करीब 88 किलोमीटर की दूरी तय करती है। इसे अपना सफर पूरा करने में 7-8 घंटे का समय लगता है। अगर आप चाय के बागान, हरे-भरे जंगल और बादलों की बीच वाली सैर करना चाहते हैं तो यहां का रुख करें।
कांगड़ा वैली रेलवे
कांगड़ा वैली रेलवे का रूट पंजाब के पठानकोट से हिमाचल प्रदेश के जोगिंदरनगर तक का है। यह टॉय ट्रेन लगभग 164 किलोमीटर लंबी है, जिसकी शुरुआत साल 1929 में की गई थी। महज 10 घंटे में यह पूरा सफर तय कर लेती है। इसके रास्ते में पड़ने वाली हरी-भरी घाटियां, सीढ़ीदार खेत, ग्रामीण जीवनशैली की झलक देखकर आपको वहीं बसने का मन करने लगेगा।
माथेरान हिल रेलवे
माथेरान हिल रेलवे टॉय ट्रेन की सेवा नेरल से माथेरान हिल स्टेशन तक है। इसकी यात्रा बहुत छोटी है क्योंकि यह महज 21 किलोमीटर की दूरी तय करती है और इसे पूरा करने में 1.5 से 2 घंटे ही लगते हैं। यहां पर गाड़ियों का जाना मना है, ऐसे में ट्रेन का सफर ही एकमात्र विकल्प रह जाता है। यहां रास्ते में आने वाले घने जंगल और घुमावदार मोड़ किसी फिल्मी सीन से कम नहीं।
नीलगिरी माउंटेन रेलवे
नीलगिरी माउंटेन रेलवे नाम की तमिलनाडु की यह टॉय ट्रेन जितनी ऐतिहासिक है, उतनी ही खूबसूरत भी। नीले रंग की इस ट्रेन का सफर मेट्टूपलायम से शुरू होता है जो कुन्नूर होते हुए अपने गंतव्य ऊटी तक पहुंचता है। यह पूरी यात्रा 46 किलोमीटर लंबी है, जिसे पूरा करने में 5 घंटे तक का समय लगता है। इस दौरान न सिर्फ हरे-भरे पहाड़ दिखते हैं, बल्कि बादलों के बीच से गुजरते हुए सफर जन्नत जैसा लगने लगता है।
