Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    मुन्नार की वादियां और कुमारकोम के बैकवाटर, 'ईश्वर के अपने देश' केरल में बिताएं परफेक्ट छुट्टियां

    Updated: Sun, 07 Jun 2026 11:56 AM (GMT+05:30)

    केरलम में मुथिरापुझा, नल्लाथन्नी और कुंडला नदियों का संगम स्थल मुन्नार अंग्रेजों के जमाने में गर्मियों का विश्राम स्थल हुआ करता था, तो वहीं अलौकिक है ...और पढ़ें

    छुट्टियों के लिए परफेक्ट है केरल (Picture Courtesy: Freepik)

    छुट्टियों के लिए परफेक्ट है केरल (Picture Courtesy: Freepik)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मुन्नार की सुबह पक्षियों की आवाजों से हुई। अलग-अलग डालों पर बैठकर उन्होंने सुर और लय स्वयं ही तय कर लिए थे। काफी दिनों बाद बिना अलार्म के किसी अन्य आवाज से सूर्योदय से पहले नींद खुली। बालकनी में आने पर ठंडी हवाओं और धुंध ने स्वागत किया। 

    सामने दूर-दूर तक आंखों को सुकून देने वाली हरियाली। चाय के बागान। सूर्य की किरणों से पहाड़ी की चोटी का स्वर्णिम रंग। शांति, चैन और इत्मीनान का अनुभव कराने वाला दृश्य। प्राकृतिक सौंदर्य का साक्षात्कार करते हुए कॉफी या चाय के अलावा कुछ और नहीं चाहिए था। 

    कोच्ची हवाई अड्डे से लगभग 130 किलोमीटर दूर मुन्नार पहुंचने में हमें चार घंटे लगे थे। घुमावदार सड़कें, पहाड़ी पर हरी लहरों की तरह चाय बागान व नारियल के पेड़ों के साथ चारों तरफ फैली हरियाली ने पता ही नहीं चलने दिया कि समय कैसे निकल गया। 

    केरलम के इडुक्की जिले में स्थित इस पर्यटन क्षेत्र में पूरे वर्ष सैलानी पहुंचते हैं परंतु आराम और आनंद का समय तो अक्टूबर से फरवरी ही है। मई तक ट्रैकिंग का मजा है मानसून आगमन से जून-जुलाई से सितंबर तक बारिश में हरियाली का अद्भुत नजारा रहता है। 

    खबरें और भी

    पहाड़ियों और हरियाली का नजारा 

    मुन्नु का अर्थ तीन है तो आरु का अर्थ नदी। समुद्रतल से लगभग 1600 मीटर ऊपर मुथिरापुझा, नल्लाथन्नी और कुंडला नदियों का संगम स्थल मुन्नार अंग्रेजों के जमाने में भी गर्मी का विश्राम स्थल था। इंग्लैंड भेजने के लिए चाय, काफी व गर्म मसालों के संग्रहण का क्षेत्र। यहीं 2700 मीटर ऊंची आनामुड़ी चोटी ट्रैकिंग के लिए अच्छी जगह है तो माट्पेट्टी में सुंदर झील किनारे बैठकर आस-पास की पहाड़ियों व हरियाली का नजारा लिया जा सकता है।  

    संग्रहालय में सफेद चाय 

    मुन्नार में टाटा टी द्वारा विकसित संग्रहालय में चाय की विकास यात्रा समझ सकते हैं। यह चाय उसी पौधे से बनती है जिससे काली या हरी चाय तैयार होती है, परंतु इसे तैयार करने का तरीका कुछ अलग ही है। सफेद चाय के लिए पौधे की सबसे नई पत्तियों को तोड़ा जाता है। 

    हरी पत्तियों से चाय तैयार करने की प्रक्रिया देखने के बाद स्वाद का आनंद और खरीदारी करते हुए यात्रा आगे बढ़ी। संग्रहालय में चाय उत्पादन की कहानी के साथ दूरसंचार (टेलीफोन) व्यवस्था के विकास की कहानी भी ताजा हो गई। मुन्नार में ही 1.8 किलोमीटर जिपलाइन हिलटाप एडवेंचर का भी मजा लिया जा सकता है। 

    Munnar (1)

    (Picture Courtesy: Instagram)

    कुमारकोम गांव में बैकवाटर 

    कुमारकोम इसका उदाहरण है कि नारियल के बागानों से ढका कोई गांव कैसे पर्यटन केंद्र बन सकता है। कोट्टायम जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूरी पर देश की सबसे लंबी वेंबनाड़ झील किनारे स्थित इस गांव के शांत बैकवाटर (पश्चजल) में कई हाउसबोट तैरते नजर आते हैं। 

    झील में केरलम की चार प्रमुख नदियों– अचनकोविल, मणिमला, मीनच्चिल और पंपा के मीठे जल के साथ कोच्चि के पास अरब सागर का खारा पानी भी मिश्रित होता है। हाउसबोट से गुजरते हुए पक्षी अभयारण्य में साइबेरियाई सारस और अन्य पक्षियों की उड़ान देखने के बाद आंखें बंद कर अपने अरमानों को पंख लगया जा सकता है।  

    पर्यटक यहां केरलम के पारंपरिक आयुर्वेदिक मसाज से तरोताजा होने का अवसर भी नहीं चूकते। पूर्व का वेनिस कहे जाने वाले केरलम के अलप्पुझा की यात्रा में बोट पर ही तैयार भोजन का स्वाद प्राकृतिक नजारे के बीच कुछ और ही बढ़ जाता है। 

    पद्मनाभस्वामी के दर्शन

    कोच्ची से शुरू हुई छह दिवसीय यात्रा तिरुवनंतपुरम होते हुए पूर्णता की तरफ बढ़ी। मध्य केरलम में कोच्ची से मात्र 15 किलोमीटर दूर पेरियार (पर्णा) नदी के तट पर अद्वैत वेदांत के संस्थापक आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली कलाडी है। तिरुवनंतपुरम में परंपरागत धोती में पद्मनाभस्वामी के दर्शन का अनुभव अलौकिक है। 

    खजानों से भरे इस सात तहखानों वाले रहस्यमय मंदिर में ब्रह्मा, विष्णु व महेश एक साथ पूजित हैं। ‘ईश्वर के देश’ केरलम में इस मंदिर की स्थापना और विकास की चर्चा द्वापर में भगवान परशुराम से लेकर 18वीं सदी में त्रावनकोर के राजा मार्तंड वर्मा तक विस्तारित है। राजधानी से मात्र 15 किलोमीटर दूर स्थित कोवलम बीच पर तीन अर्धचंद्राकार समुद्र तटों का अलग आकर्षण है। चट्टानी किनारे, नारियल और ताड़ के पेड़ सुंदर नजारा प्रस्तुत करते हैं।