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    पर्यटकों के लिए खुला उत्तराखंड का Valley of Flowers, यहां जानें परमिट, बजट और ट्रेकिंग का पूरा प्रोसेस

    Updated: Wed, 03 Jun 2026 03:13 PM (IST)

    उत्तराखंड का वैली ऑफ फ्लावर्स पर्यटकों के लिए खुल चुका है। यहां आपको 600 से ज्यादा प्रकार के फूल और दुर्लभ जानवर देखने को मिल सकते हैं। ...और पढ़ें

    आप भी देखना चाहते हैं वैली ऑफ फ्लावर्स? (Picture Courtesy: uttarakhandtourism)

    आप भी देखना चाहते हैं वैली ऑफ फ्लावर्स? (Picture Courtesy: uttarakhandtourism)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तराखंड का वैली ऑफ फ्लावर्स पर्यटकों और ट्रेकर्स के लिए खोल दिया गया है। समुद्र तल से लगभग 3,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह घाटी सर्दियों में पूरी तरह बर्फ से ढकी रहती है, लेकिन मानसून की दस्तक के साथ ही यह एक जादुई दुनिया में बदल जाती है। 

    यह घाटी की खूबसूरती बेमिसाल है, जिसे शब्दों में बयां करना काफी मुश्किल है। अगर आप भी इस साल फूलों की घाटी को करीब से देखना चाहते हैं, तो आइए जानें आप यहां कैसे पहुंच सकते हैं और बुकिंग की क्या प्रक्रिया है।  

    Valley of Flowers (2)

    (Picture Courtesy: Instagram)

    क्यों इतनी खास है वैली ऑफ फ्लावर्स?

    फ्लावर ऑफ वैली यूनेस्को की वर्ल्ड हैरिटेज साइट्स में भी शामिल है। यह नेशनल पार्क 87 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इस घाटी को सबसे पहले एक ब्रिटिश ट्रैकर फ्रैंक एस. स्मिथ ने 1931 में खोजा था। दरअसल, वे अपने दो साथियों के साथ ट्रैकिंग के दौरान रास्ता भटक कर यहां पहुंच गए थे। रंग-बिरंगे फूलों से ढकी इस घाटी की खूबसूरती देखकर वे हैरान रह गए थे और इसलिए इसका नाम वैली ऑफ फ्लावर्स या फूलों की घाटी रखा गया। 

    Valley of Flowers (3)

    (Picture Courtesy: Instagram)

    इस घाटी की खासियत यहां खिलने वाले 600 से ज्यादा प्रजातियों के फूल हैं, जिनमें ऑर्किड्स, पॉपी, प्रिमुलस, मैरीगोल्ज और एनीमोन जैसे फूल शामिल हैं। सर्दियों में यह घाटी बर्फ से ढकी रहती है, लेकिन मई से सितंबर के बीच यह पूरी घाटी रंग-बिरंगे फूलों से ढक जाती है। इसके अलावा, यहां कई दुर्लभ जानवर, जैसे- कस्तूरी मृग, ग्रे लंगूर, लाइम बटरफ्लाई, हिमालयी वीजल्स, हिमालयी भालू और स्नो लैपर्ड्स भी पाए जाते हैं।  

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    Valley of Flowers (4)

    (Picture Courtesy: Instagram)

    ट्रेकिंग और परमिट के लिए बुकिंग कैसे करें?

    • रजिस्ट्रेशन- पवित्र हेमकुंड साहिब के पास होने के कारण, सभी यात्रियों के लिए उत्तराखंड सरकार के ऑफिशियल टूरिस्ट केयर उत्तराखंड पोर्टल या मोबाइल ऐप पर रिजेस्ट्रेशन करवाना जरूरी है। 
    • नेशनल पार्क एंट्री परमिट- घाटी में एंट्री के लिए उत्तराखंड वन विभाग से ई-परमिट लेना होता है। इसके लिए सबसे बेहतर तरीका है कि आप घांघरिया में बने फॉरेस्ट चेकपोस्ट से ट्रेक की एक शाम पहले ही ऑफलाइन परमिट ले लें, ताकि खराब मौसम या किसी देरी के कारण डेट्स लॉक न हो। इसे उत्तराखंड टूरिज्म की आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन भी लिया जा सकता है। यह परमिट 3 दिनों तक वैध रहेगा और भारतीय नागरिकों के लिए ₹150 और विदेशी नागरिकों के लिए ₹600 फीस है।
    • ट्रेक पैकेज- आप खुद गोविंदघाट और घांघरिया में होमस्टे या गाइड बुक करके खुद भी जा सकते हैं। हालांकि, ज्यादातर लोग भरोसेमंद ट्रेकिंग एजेंसियों के जरिए गाइडेड पैकेज चुनते हैं, जिनकी कीमत ₹9,900 से ₹11,500 प्रति व्यक्ति के बीच होती है। इसमें बेस कैंप में रहना, खाना, गाइड और परमिट शामिल होते हैं।

    इस बात का खास ध्यान रखें कि वैली ऑफ फ्लावर्स में रात को रुकने या कैंपिंग करने की अनुमति बिल्कुल नहीं है। आपको हर हाल में शाम 5:00 बजे तक बेस कैंप घांघरिया वापस लौटना होगा।

    Valley of Flowers (1)

    (Picture Courtesy: Instagram)

    यहां कैसे पहुंचें? 

    • हवाई मार्ग- सबसे करीबी हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है। यहां से आपको ऋषिकेश या गोविंदघाट के लिए टैक्सी या बस लेनी होगी।
    • रेल मार्ग- सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है, जो गोविंदघाट से करीब 273 किमी पहले है।
    • सड़क और ट्रेक मार्ग- आपको ऋषिकेश से बस या शेयरिंग कैब के जरिए गोविंदघाट पहुंचना होगा। गोविंदघाट से गाड़ियां पुलना तक जाती हैं, जहां से ट्रेक शुरू होता है। पुलना से 10 किमी की चढ़ाई पूरी करके आप घांघरिया पहुंचेंगे। घांघरिया से वैली ऑफ फ्लावर्स की दूरी सिर्फ 4 किमी है।


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