कोलकाता को 'सिटी ऑफ जॉय' नाम कैसे मिला? एक फ्रांसीसी किताब से जुड़ी है दिलचस्प कहानी
कोलकाता कई वजहों से बेहद खास है। इसे सिटी ऑफ जॉय कहा जाता है, तो इसे और भी ज्यादा खास बना देता है। आइए जानते हैं इस नाम की कहानी। ...और पढ़ें

कोलकाता को क्यों कहते हैं सिटी ऑफ जॉय? (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
कोलकाता को कहते हैं सिटी ऑफ जॉय
कई वजहों से मिला यह नाम
सबसे पहले एक किताब में इस्तेमाल हुआ यह नाम
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। विविधताओं का देश भारत दुनियाभर में अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। घूमने के लिहाज से यहां कई ऐसी जगहे हैं, जिनका दीदार करने देश ही न हीं, विदेश से भी लोग यहां आते हैं। यहां हर एक जगह की अपनी एक खासियत है और इन्हीं खास जगहों में से एक है बंगाल की राजधानी कोलकाता।
कोलकाता सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि जीती-जागती संस्कृति, गहरी आस्था और उत्सवों से भरा हुआ समंदर है। इस शहर का इतिहास बयां करने के लिए यहां पुरानी इमारतें हैं, आस्था की गवाही देती गलियों में गूंजती शंख की ध्वनि और खुशियों को दर्शाते त्योहारों की रौनक है। यही सारी चीजें इस शहर को 'सिटी ऑफ जॉय' बनाती हैं। आइए आज इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं क्यों कोलकाता को यह नाम दिया गया?
क्यों कहा जाता है 'सिटी ऑफ जॉय'?
कोलकाता को यह नाम फ्रांसीसी लेखक डोमिनिक लैपियर की प्रसिद्ध किताब से मिला। 'सिटी ऑफ जॉय' नाम की इस किताब के बाद ही यह नाम पूरी दुनिया में गूंजा। इस पुस्तक ने दिखाया कि कैसे बेहद चुनौतीपूर्ण हालातों में भी यहां के लोग करुणा, आशा और आपसी जुड़ाव को जिंदा रखते हैं। इसके अलावा कुछ और वजहें भी इसे 'सिटी ऑफ जॉय' बनाती हैं-
- जीवन का जश्न मनाते त्योहार: कोलकाता का हर त्योहार सामूहिक भक्ति का प्रतीक है। खासकर दुर्गा पूजा के दौरान पूरा शहर एक भव्य पंडाल और देवलोक में बदल जाता है। यहां हर कोई मां की भक्ति के रंग और संगीत में डूबकर खुशियां मनाता है।
- लोगों की गर्मजोशी: यहां के लोगों में दूसरों के प्रति एक अलग सेवा भाव होता है। किसी अजनबी को भी अपनापन महसूस कराना और हर मुश्किल हालात से मिलकर निपटना यहां की परंपरा है।
- सांस्कृतिक विरासत: रवींद्र सदन, नंदन फिल्म केंद्र, ललित कला एकेडमी और भारतीय संग्रहालय जैसी जगहें इस शहर की कलात्मक आत्मा को संजोए हुए हैं।
- दिल तक पहुंचता है यहां का स्वाद: यहां मिलने वाले व्यंजनों का स्वाद लोगों के दिलों को जोड़ता है। फिर चाहे वो तीखा पुचका हो या रोल्स, यहां की पारंपरिक मिठाइयां हो और गर्मागर्म चाय सबकुछ इस शहर की धड़कन हैं।
कोलकाता घूमने का सही समय
इस शहर की खासियत के बारे में जानने के बाद अब अगर आप यहां घूमने की प्लानिंग बना रहे हैं, तो अक्टूबर से फरवरी के बीच का मौसम यहां के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना होता है और दुर्गा पूजा की दिव्य रौनक भी देखने को मिलती है।
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कैसे पहुंचें?
अगर आप हवाई मार्ग से कोलकाता जा रहे हैं, तो नेताजी सुभाष चंद्र बोस एयरपोर्ट जा सकते हैं। वहीं, रेल मार्ग से हावड़ा और सियालदह स्टेशन पहुंचे और सड़क मार्ग से यह पूरे देश से काफी अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।