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पोर्टेबल एक्स-रे मशीन से मिलेगी सीटी स्कैन जैसी थ्रीडी इमेज, आपात स्थिति में त्वरित होगा इलाज; AIIMS भोपाल और IIT इंदौर का साझा प्रोजेक्ट

By Mukesh VishwakarmaEdited By: Ravindra Soni
Published: Wed, 14 Jan 2026 07:36 PM (IST)

एम्स भोपाल और आईआईटी इंदौर मिलकर एक पोर्टेबल एक्स-रे मशीन विकसित कर रहे हैं। यह मशीन सीटी स्कैन जैसी थ्रीडी ...और पढ़ें

सीटी स्कैन का परीक्षण करता चिकित्सक (प्रतीकात्मक चित्र)

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मुकेश विश्वकर्मा, भोपाल। अभी तक हमें हड्डियों की थ्रीडी तस्वीर देखने के लिए महंगी और भारी-भरकम सीटी स्कैन मशीन की जरूरत पड़ती थी, जिसमें रेडिएशन (हानिकारक किरणों) का खतरा भी ज्यादा होता है। लेकिन अब AIIMS, भोपाल और IIT इंदौर के विज्ञानी एक ऐसी एक्स-रे मशीन तैयार कर रहे हैं, जो सीटी स्कैन जैसी थ्रीडी तस्वीरें देगी।

हल्की पोर्टेबल होगी मशीन

यह मशीन हल्की और पोर्टेबल होगी, रेडिएशन भी बेहद कम होगा। ऐसे में इसे एम्बुलेंस आपदा स्थलों और ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक आसानी से इस्तेमाल किया जा सकेगा। फायदा यह होगा कि मरीज के अस्पताल पहुंचने से पहले ही एम्बुलेंस में उसकी चोट की गंभीरता का सटीक आकलन हो सकेगा।

टीम में ये शामिल

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने इस मशीन को अपनी प्रतिष्ठित योजना 'फर्स्ट इन द वर्ल्ड चैलेंज-2025' में जगह दी है। यह 'हाई-रिस्क, हाई-रिवार्ड' प्रोग्राम है, जिसके तहत मशीन को विकसित करने के लिए आठ करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। मशीन बनाने वाली टीम में एम्स से डॉ. अंशुल राय, डॉ. सैकत दास, डॉ. सुदीप कुमार और आईआईटी इंदौर से डा. लोकेश बसवराजप्पा व डा. पुनीत गुप्ता शामिल हैं।

इस परियोजना के प्रधान अन्वेषक और एम्स के ट्रामा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. बीएल सोनी ने कहा कि एक्सीडेंट या ट्रॉमा मरीजों को अभी सीटी स्कैन के लिए बड़े अस्पतालों में ले जाना पड़ता है। हमारी कोशिश है कि मशीन इतनी पोर्टेबल हो कि इसे एंबुलेंस, छोटे क्लीनिक और गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) तक पहुंचाया जा सके।

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AI से लैस

इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग भी कर रहे हैं। अभी हम इसे चेहरे और जबड़े (मैक्सिलोफेशियल) की इमेजिंग के लिए तैयार कर रहे हैं। इससे एक्सीडेंट में चेहरे पर लगी चोटों, कैंसर और रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी में डाक्टरों को सटीक थ्रीडी इमेज मिलेगी, जिससे इलाज बेहतर होगा। बाद में इसे पूरे शरीर की जांच के लिए विकसित किया जाएगा।

क्यों खास है यह परियोजना?

  • सस्ता और सुलभ: भारी मशीनों की जरूरत खत्म होगी, जिससे जांच सस्ती होगी।
  • सुरक्षित: इसमें अल्ट्रा-लो रेडिएशन तकनीक है, यानी सीटी स्कैन के मुकाबले मरीजों (खासकर बच्चों) को रेडिएशन का खतरा बहुत कम होगा।
  • तुरंत इलाज: एंबुलेंस में मशीन होने से अस्पताल पहुंचने से पहले ही डाक्टर मरीज की हालत देख सकेंगे।

एम्स भोपाल और आईआईटी इंदौर की टीम काम कर रही हैं। यह मशीन न केवल सर्जरी और कैंसर के इलाज में मददगार होगी, बल्कि भविष्य में सस्ता और सुरक्षित इलाज मुहैया कराने में सफल होगी।
- प्रो. डा. माधबानंद कर, कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल।

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