भोजशाला से मांडू और बाग तक... धार का ऐसा सफर, जहां हर मोड़ पर मिलता है इतिहास, आस्था और सौंदर्य
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ओर से धार स्थित भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर घोषित किए जाने के बाद से यह स्थल देशभर में चर्चा का केंद्र बन गया है। ...और पढ़ें

धार स्थित भोजशाला का दृश्य

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प्रेम विजय पाटिल, धार। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ओर से धार स्थित भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर घोषित किए जाने के बाद से यह स्थल देशभर में चर्चा का केंद्र बन गया है।
आस्था, इतिहास और स्थापत्य का यह संगम अब सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक पूरा ट्रैवल सर्किट बन चुका है।
यदि आप भी भोजशाला देखने की योजना बना रहे हैं, तो इसके साथ मांडू और बाग की गुफाओं का भ्रमण कर एक यादगार यात्रा की जा सकती है।

भोजशाला धार: आस्था और इतिहास का संगम
धार की ऐतिहासिक भोजशाला सदियों से ज्ञान, संस्कृति और श्रद्धा का केंद्र मानी जाती रही है। माना जाता है कि परमार राजा भोज के काल में यहां मां सरस्वती की आराधना के साथ संस्कृत, दर्शन और शास्त्रों का अध्ययन होता था।
विशाल पत्थर के स्तम्भ, कमलाकार नक्काशी, प्राचीन शिलालेख और स्थापत्य की बारीक कलाकृतियां आज भी उस वैभवशाली युग की कहानी कहती हैं। परिसर में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो इतिहास स्वयं पत्थरों पर उकेरा हुआ खड़ा हो।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है। मंगलवार को पूजा-अर्चना के दौरान परिसर भक्ति और आस्था से सराबोर होता है। भोजशाला अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मालवा की सांस्कृतिक चेतना, प्राचीन विद्या परंपरा और स्थापत्य गौरव का जीवंत प्रतीक बन चुकी है।

मांडू: प्रेम और स्थापत्य की नगरी
धार से करीब 35 किमी दूर विंध्याचल की पहाड़ियों पर बसा मांडू इतिहास, प्रेम कथाओं और स्थापत्य का अनूठा संगम है। यहां का जहाज महल अपनी जल संरचना और वास्तुकला के कारण सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र रहता है। बारिश के मौसम में जब महल के आसपास पानी भर जाता है तो यह किसी तैरते जहाज जैसा दिखाई देता है।
रानी रूपमती मंडप से नर्मदा घाटी का मनोरम दृश्य दिखाई देता है, जबकि बाज बहादुर महल संगीत और प्रेम कथा की यादों को संजोए हुए है। इसके अलावा हिंडोला महल, जामा मस्जिद और होशंगशाह का मकबरा भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। मानसून और सर्दियों में मांडू का प्राकृतिक सौंदर्य चरम पर रहता है।
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बाग गुफाएं: प्राचीन चित्रकला की धरोहर
धार जिले के बाग कस्बे के पास स्थित बाग गुफाएं देश की प्राचीन बौद्ध कला और चित्रकला की महत्वपूर्ण धरोहर मानी जाती हैं। पांचवीं-छठी शताब्दी की इन गुफाओं को पहाड़ काटकर बनाया गया था। यहां की भित्ति चित्रों में बौद्ध जीवन, नृत्य, संगीत और सामाजिक जीवन के दृश्य उकेरे गए हैं।
इन चित्रों की शैली और रंग संयोजन अजंता गुफाओं की याद दिलाते हैं। गुफाओं के पास बहने वाली बागिनी नदी और आसपास का शांत वातावरण इसे और आकर्षक बनाता है। इतिहास, पुरातत्व और कला में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए यह स्थान बेहद खास अनुभव देता है।

दो से तीन दिन का करें टूर प्लान
- पहले दिन इंदौर से धार पहुंचकर भोजशाला का दर्शन करें और स्थानीय बाजार घूमें।
- दूसरे दिन मांडू जाएं और पूरे दिन वहां के प्रमुख स्थलों का भ्रमण करें।
- तीसरे दिन बाग गुफाओं की यात्रा करें और शाम तक वापसी करें।
खानपान, संस्कृति और सुविधाएं
धार और मांडू में मालवा का पारंपरिक स्वाद आसानी से मिल जाता है। दाल-बाफला, भुट्टे का कीस और पोहा-जलेबी यहां के खास व्यंजन हैं। स्थानीय लोगों की बोली और संस्कृति में मालवी रंग साफ झलकता है।
रहने के लिए धार और मांडू दोनों जगह होटल और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। मांडू में एमपी टूरिज्म के रिसार्ट भी बेहतर विकल्प हैं।

कब जाएं, कैसे पहुंचे?
इंदौर से धार की दूरी करीब 65 किमी है। यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। निजी वाहन, बस या टैक्सी से यात्रा की जा सकती है।
इंदौर से धार तक का सफर लगभग डेढ़ से दो घंटे में पूरा हो जाता है। घूमने के लिए यहां कभी भी आ सकते हैं, लेकिन अक्टूबर से मार्च का मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना होता है और मांडू की हरियाली अपने चरम पर रहती है।