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भोपाल वेस्टर्न बायपास विवाद: IAS-IPS अधिकारियों की जमीन खरीद पर उठे गंभीर सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग

Published: Sun, 17 May 2026 05:19 PM (GMT+05:30)

भोपाल के कोलार इलाके में प्रस्तावित वेस्टर्न बायपास के पास IAS-IPS अधिकारियों द्वारा जमीन खरीदने को लेकर विवाद गहरा गया ...और पढ़ें

जमीन सौदे पर उठे सवाल (AI Generated image)

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। शहर के कोलार इलाके में स्थित गुराड़ी घाट गांव में 50 से अधिक आईएएस और आईपीएस अधिकारियों द्वारा कृषि भूमि खरीदे जाने और प्रस्तावित वेस्टर्न बायपास के रूट को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। 3200 करोड़ रुपये के वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को लेकर भ्रष्टाचार विरोधी संगठन ‘सिस्टम परिवर्तन अभियान’ (SPA) ने आरोप लगाया है कि परियोजना की मंजूरी से महीनों पहले अनेक वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों ने प्रस्तावित मार्ग के आसपास जमीन खरीदी थी, जिसकी कीमत अब कई गुना बढ़ चुकी है। संगठन ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और परियोजना रद्द करने की मांग की है।

अधिकारियों को लाभ पहुंचाने का आरोप

एसपीए के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी आजाद सिंह डबास ने आरोप लगाया कि 35 किलोमीटर लंबे वेस्टर्न बायपास का इस्तेमाल कुछ अधिकारियों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह अभियान प्रशासनिक, न्यायिक, पुलिस और मीडिया जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

संगठन के मुताबिक, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि विभिन्न राज्यों के करीब 50 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने 4 अप्रैल 2022 को भोपाल के कोलार क्षेत्र स्थित गुराड़ी घाट गांव में 2.023 हेक्टेयर कृषि भूमि एक ही रजिस्ट्री दस्तावेज के जरिए खरीदी थी। आरोप है कि यह जमीन करीब 5.5 करोड़ रुपये में खरीदी गई, जबकि उस समय इसकी बाजार कीमत 7.78 करोड़ रुपये बताई गई थी।

इसके करीब 16 महीने बाद, 31 अगस्त 2023 को वेस्टर्न बायपास परियोजना को मंजूरी मिली। वहीं जून 2024 में उक्त जमीन का भूमि उपयोग कृषि से बदलकर आवासीय कर दिया गया। SPA का दावा है कि 2022 में लगभग 5.5 करोड़ रुपये की यह जमीन अब बढ़कर 55 से 60 करोड़ रुपये तक की हो चुकी है।

पत्नी-बच्चों के नाम पर खरीदी जमीन

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि बायपास का एलाइनमेंट तीन बार बदला गया, लेकिन हर बार मार्ग उन्हीं जमीनों के पास से निकाला गया, जिन्हें अधिकारियों ने खरीदा था। एसपीए के अनुसार 2013 से 2016 बैच के कई अधिकारियों ने कथित तौर पर अपनी पत्नियों और बच्चों के नाम पर जमीन खरीदी और कुछ ने नियमों के विरुद्ध निर्माण भी कराया।

बायपास प्रोजेक्ट पर करें पुनर्विचार

आजाद सिंह डबास ने सवाल उठाया कि जब भोपाल में पहले से ईस्टर्न बायपास ट्रांजिट ट्रैफिक संभाल रहा है, तब वेस्टर्न बायपास की आवश्यकता क्या है। उन्होंने कहा कि यदि यह परियोजना केवल कुछ अधिकारियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाई जा रही है तो इसे राज्यहित में पुनर्विचार के लिए रोका जाना चाहिए।

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एसपीए ने पूरे भूमि सौदों की उच्चस्तरीय जांच कराने और “जनता के पैसे के अनावश्यक खर्च” को रोकने के लिए वेस्टर्न बायपास परियोजना निरस्त करने की मांग की है।

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