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    'मैं राज्यसभा की सीट खाली कर रहा...' दिग्विजय सिंह ने उच्च सदन के लिए दावेदारी की अटकलों पर लगाया विराम

    Updated: Tue, 13 Jan 2026 07:36 PM (IST)

    दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा सीट खाली करने की घोषणा की है, जिससे उनके तीसरे कार्यकाल की अटकलों पर विराम लग गया। उनका कार्यकाल जून 2026 में ...और पढ़ें

    दिग्विजय सिंह (फाइल फोटो)

    दिग्विजय सिंह (फाइल फोटो)

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    डिजिटल डेस्क, भोपाल। जून 2026 को मध्य प्रदेश से राज्य सभा की दो सीटें रिक्त हो जाएंगी। नौ अप्रैल को कांग्रेस के दिग्विजय सिंह और भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी की कार्यावधि पूरी हो रही है। इसके पहले निर्वाचन आयोग चुनाव कराएगा। इसे लेकर सुगबुगाहट भी शुरू हो गई है। दिग्विजय सिंह के एक बार फिर राज्य सभा जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिस पर उन्होंने विराम लगा दिया। उन्होंने मंगलवार को भोपाल में मीडिया से कहा कि मैं अपनी राज्य सभा की सीट खाली कर रहा हूं।

    जून में खत्म हो रहा कार्यकाल

    दरअसल, राज्य सभा में दिग्विजय का कार्यकाल 19 जून 2026 को खत्म हो रहा है। तीसरी बार राज्य सभा जाने की अटकलें तबसे लगाई जा रही हैं, जब उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के संगठन कौशल की प्रशंसा की थी। उनके इस बयान को संगठन में वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा और दबाव की राजनीति से जोड़कर देखा गया।

    यह माना गया कि वे तीसरी बार राज्य सभा जाने के लिए दबाव बनाने रहे हैं, पर उन्होंने तमाम अटकलों पर यह कहते हुए ब्रेक लगा दिया कि मैं अपनी राज्य सभा की सीट खाली कर रहा हूं।

    उधर, इस बीच प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को पत्र लिखकर प्रदेश से रिक्त हो रही राज्य सभा की सीट पर अनुसूचित जाति वर्ग के व्यक्ति को भेजने की मांग की।

    इस पर उन्होंने कहा कि यह मेरे हाथ में नहीं है, पर मैं अपनी सीट खाली कर रहा हूं। वहीं, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने अहिरवार की बात का समर्थन करते हुए कहा कि लंबे समय से अनुसूचित जाति वर्ग के व्यक्ति को राज्य सभा नहीं भेजा गया है।

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    एक सदस्य भेजने की स्थिति में है कांग्रेस

    मध्य प्रदेश विधानसभा में 230 सदस्य यानी विधायक हैं। राज्यसभा के तीन सदस्यों के पद रिक्त हो रहे हैं। ऐसे में एक प्रत्याशी को चुनाव जीतने के लिए 58 मतों की आवश्यकता होगी। विधानसभा में भाजपा के 164 और कांग्रेस के 65 विधायक हैं, एक अन्य है। इस हिसाब से कांग्रेस को एक सीट मिलना तय है।