विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

MP में रक्षा उत्पाद बनाने के प्रयास तेज, निवेश से निर्यात तक सहायता करेगी राज्य सरकार, अडाणी-बीईएल जैसे समूहों ने दिखाई रुचि

By Saurabh SoniEdited By: Ravindra Soni
Published: Fri, 14 Nov 2025 05:06 PM (IST)

मप्र सरकार निवेशकों को रक्षा उत्पादन क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित कर रही है। निर्यात के लिए उत्पाद के ...और पढ़ें

रक्षा उपकरण (प्रतीकात्मक चित्र)

रक्षा उपकरण (प्रतीकात्मक चित्र)

HighLights

  1. आत्मनिर्भर भारत की दिशा में तैयार होंगे स्वदेशी रक्षा उत्पाद।

  2. इससे विदेशी रक्षा उत्पादों पर हमारी निर्भरता भी होगी कम।

  3. मप्र में रक्षा उत्पादन के लिहाज से नजर आ रही संभावनाएं।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में रक्षा उत्पाद बनाए जाने के प्रयास फिर तेज हो गए हैं। निवेशकों को रक्षा उत्पादन क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। निवेश पर प्रोत्साहन से लेकर रक्षा उत्पादों के निर्यात में भी राज्य सरकार सहायता करेगी। स्टार्टअप और रक्षा उत्पाद की कोई बेहतर तकनीक है तो उसे प्रोत्साहित किया जाएगा।

निर्यात के लिए उत्पाद के परीक्षण को सरल किया गया है और इसकी फीस भी घटाई गई है। किसी व्यक्ति के पास किसी नए रक्षा उत्पाद का आइडिया है तो चयन होने पर 25 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रोत्साहन बतौर दी जाएगी। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में स्वदेशी रक्षा उत्पाद तैयार किए जाने से विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम होगी।

भारत में इस वर्ष डेढ़ लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन हुआ और 23 हजार करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। आगामी तीन वर्ष में इसे दोगुना करने का लक्ष्य है। भारत सरकार की योजना के तहत रक्षा उत्पाद बनाने के लिए तीन से पांच साल अनुभव की अनिवार्यता नहीं होगी। नवाचार या तकनीक अच्छी है तो उसे विशेष मामला मानकर प्रोत्साहित किया जाएगा। मध्य प्रदेश में रक्षा उत्पादन के लिए अदाणी डिफेंस, हिंदुस्तान शिपयार्ड, बीईएल और जेबीएम जैसे समूहों ने रुचि दिखाई है।

2700 हेक्टेयर से अधिक लैंड बैंक

सागर, कटनी, रतलाम, सतना और मुरैना सहित आठ जिलों में रक्षा क्षेत्र के लिए 2700 हेक्टेयर से अधिक लैंड बैंक उपलब्ध है। भौगोलिक स्थिति और सहयोगी इको सिस्टम के कारण मध्य प्रदेश रक्षा उत्पादन के लिए देश में सबसे उपयुक्त स्थान है। धार के पीएम मित्रा पार्क में रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए प्रस्ताव बुलाए गए हैं। ग्वालियर क्षेत्र में डिफेंस क्लस्टर बनाने की तैयारी है। सरकार की निवेश नीतियों के तहत डीपीआर बनाकर निवेश करने वालों को इकाई लगाने तुरंत जमीन दी जाएगी। मध्य प्रदेश में जबलपुर, इटारसी में आर्डनेंस फैक्टरी है। ग्वालियर के पास और इंदौर के नजदीक महू में फायरिंग रेंज है। राज्य के चारों ओर रक्षा क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं।

इको सिस्टम पहले से मौजूद

जबलपुर में पहले से रक्षा इको सिस्टम मौजूद है, जैसे व्हीकल फैक्ट्री और गन कैरिज फैक्ट्री। व्हीकल फैक्ट्री में भारतीय सेना के टैंकों की रिपेयरिंग की क्षमता बढ़ाई जाएगी। जबलपुर में भारतीय सेना के टी-90 और टी-72 जैसे मुख्य युद्धक टैंकों का ओवरहालिंग शुरू हो गई है।

डिफेंस कारिडोर की संभावनाएं

प्रदेश में कटनी, जबलपुर, इटारसी और सागर के बीच भी डिफेंस कारिडोर की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। सरकार का मानना है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर रक्षा क्षेत्र में हर साल 400 करोड़ रुपये तक की स्थानीय आपूर्ति कर सकता है। महाकोशल क्षेत्र में मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ) हब इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।