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डायबिटीज में सूजन बढ़ाने वाले प्रोटीन से बढ़ता है हार्ट व किडनी की बीमारियों का खतरा; GMC भोपाल के शोध में चौंकाने वाला खुलासा

Updated: Thu, 13 Aug 2026 07:07 PM (IST)

गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल के शोध में सामने आया है कि डायबिटीज के मरीजों में IL-6 और TNF-अल्फा प्रोटीन की ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र

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HighLights

  1. डायबिटीज मरीजों में IL-6, TNF-अल्फा प्रोटीन सूजन बढ़ाते हैं।

  2. ये प्रोटीन हृदय, किडनी रोगों का खतरा 12-14 गुना बढ़ाते हैं।

  3. नियमित जांच, स्वस्थ जीवनशैली से डायबिटीज जटिलताओं का जोखिम कम करें।

मुकेश विश्वकर्मा, भोपाल। डायबिटीज से लंबे समय से पीड़ित मरीजों के अंदरूनी अंगों में सूजन बढ़ने लगती है। इनकी वजह से हृदय, किडनी, आंख और तंत्रिका तंत्र में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अब गांधी मेडिकल कालेज (जीएमसी) भोपाल के डॉक्टरों ने नए शोध में पाया है कि यह सूजन खून में दो खास प्रोटीन का स्तर बढ़ने से होती है। इनकी पहचान इंटरल्यूकिन (आईएल)-6 और ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर (टीएनएफ)-अल्फा के तौर पर हुई।

492 व्यक्तियों पर किया गया अध्ययन

डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय से इसकी जांच हो जाए तो इसके अनुरूप उपचार से कई बीमारियों का खतरा कम किया जा सकता है। जीएमसी की मेडिसिन ओपीडी में आए 246 टाइप-2 डायबिटीज मरीजों और 246 स्वस्थ व्यक्तियों को इस शोध में शामिल किया गया।

इंसुलिन के असर को भी करते हैं प्रभावित

अध्ययन में सामने आया कि जिन मरीजों को किडनी, आंख या हृदय से जुड़ा रोग था, उनमें सूजन वाले ये प्रोटीन सामान्य मरीजों और स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में तीन से पांच गुना अधिक पाए गए। ये प्रोटीन इंसुलिन के असर को कम करते हैं और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इसी वजह से हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी फेलियर जैसी बीमारियों का खतरा 12 से 14 गुना बढ़ जाता है।

इस शोध के नतीजों को जर्नल ऑफ क्लीनिकल एंड डायग्नोस्टिक रिसर्च में प्रकाशित किया गया है। शोध में बायोकेमिस्ट्री विभाग के डिमांस्ट्रेटर डॉ. पवन करे, शोध छात्रा सहिबा नाज, बायोकेमिस्ट्री विभाग की अध्यक्ष डॉ. तृप्ति सक्सेना और मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. सिम्मी दुबे शामिल रहे।

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जांच से कम होगा खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि वक्त रहते आईएल-6 और टीएनएफ-अल्फा की जांच कराकर भविष्य के जोखिम से बचा जा सकता है। डायबिटीज के पुराने मरीजों को डॉक्टर की सलाह पर नियमित अंतराल पर ब्लड शुगर के साथ-साथ आईएल-6 और टीएनएफ-अल्फा (इन्फ्लेमेटरी मार्कर्स) की जांच करवाते रहना चाहिए।

बरतें ये सावधानियां

- प्रोसेस्ड फूड, अत्यधिक मीठे, तले-भुने और जंक फूड से पूरी तरह परहेज करें।
- आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, ओमेगा-तीन और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें, जो शरीर में सूजन कम करने में मददगार होते हैं।
- प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट का व्यायाम, योग या टहलना इंसुलिन की संवेदनशीलता को सुधारता है और खून में इन्फ्लेमेटरी प्रोटीन्स के स्तर को घटाता है।
- तनाव और धूमपान रक्त वाहिकाओं को क्षति पहुंचाते हैं और सूजन बढ़ाते हैं। इनसे दूर रहें।
- रोजाना सात-आठ घंटे की पर्याप्त नींद लें यह शुगर स्तर को नियंत्रित रखने में मददगार है।

डायबिटीज के मरीजों को केवल अपना ब्लड शुगर लेवल नापने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। आईएल-6 और टीएनएफ- अल्फा जैसे सहयोगी डायग्नोस्टिक टेस्ट से पहले ही पता चल सकता है कि मरीज के अंगों को भविष्य में कितना नुकसान होने का जोखिम है। इससे शुरुआती चरण में ही पता चल जाने पर डाक्टर दवाओं में आवश्यकतानुसार बदलाव कर सकते हैं। ऐसा करके मरीज को गंभीर जटिलताओं और मृत्यु के खतरे से बचाया जा सकता है।
- डा. पवन करे, डिमांस्ट्रेटर, बायोकेमिस्ट्री विभाग, गांधी मेडिकल कॉलेज