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    महाशिवरात्रि पर भोपाल में किन्नर अखाड़े ने हिमांगी सखी को घोषित किया पहला शंकराचार्य, पुष्कर बनी पीठ

    Updated: Sun, 15 Feb 2026 09:31 PM (IST)

    भोपाल में महाशिवरात्रि पर किन्नर अखाड़े ने हिमांगी सखी को अपना पहला शंकराचार्य घोषित किया। उनका पट्टाभिषेक किन्नर धर्म सम्मेलन में हुआ, जिसमें पुष्कर ...और पढ़ें

    हिमांगी सखी का देश की पहली किन्नर शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक किया गया।

    हिमांगी सखी का देश की पहली किन्नर शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक किया गया।

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    डिजिटल डेस्क, भोपाल। शंकराचार्य परंपरा को लेकर प्रयागराज माघ मेला से शुरू हुए किन्नर अखाड़े के विवाद में एक नया अध्याय जुड़ गया है। रविवार को भोपाल में जुटे किन्नर अखाड़े के लोगों ने अपना शंकराचार्य घोषित कर दिया। पहले शंकराचार्य के तौर पर हिमांगी सखी का पट्टाभिषेक किया गया। मूल रूप से मुंबई से संबंध रखने वाली हिमांगी सखी का वर्तमान पीठ पुष्कर होगा।

    ऐसा इसलिए, क्योंकि आयोजकों के अनुसार, राजस्थान के ब्रह्मसरोवर पुष्कर पीठ को पहली किन्नर शंकराचार्य पीठ घोषित किया गया है। बता दें कि देश की पहली किन्नर शंकराचार्य घोषित हिमांगी सखी अभी तक मां वैष्णो किन्नर अखाड़ा में जगद्गुरु घोषित थीं। वह पहली किन्नर भागवत कथा वाचक भी हैं।

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    महाशिवरात्रि के अवसर पर भोपाल के लालघाटी स्थित एक मैरिज गार्डन में किन्नर वैष्णव अखाड़ा की ओर से आयोजित किन्नर धर्म सम्मेलन में यह पट्टाभिषेक संपन्न हुआ। किन्नर अखाड़ा संस्थापक अजय दास की उपस्थिति में मंत्रोच्चार के बीच यह घोषणा की गई। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में किन्नर समुदाय के प्रतिनिधि और विभिन्न राज्यों से आए अनुयायी मौजूद रहे।

     

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    जगद्गुरु व महामंडलेश्वर भी नियुक्त किए

    सम्मेलन में, किन्नर परंपरा के अंतर्गत पांच जगद्गुरुओं और छह महामंडलेश्वरों की घोषणा भी की गई। 35 किन्नरों को महंत बनाया गया है। काजल ठाकुर (भोपाल), तनीषा सनातनी (राजस्थान), संजना ठाकुर (भोपाल), संचिता पाटिल (महाराष्ट्र) को जगद्गुरु घोषित किया गया है। वहीं, सरिता भार्गव (ग्वालियर) , मंजू सनातनी (विदिशा), पिंकी माई (इटारसी), रानी ठाकुर (सागर), नकुशा सनातनी (हैदराबाद), माही शेखावत (सीकर) को महामंडलेश्वर बनाया गया है।

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    200 किन्नरों ने की घरवापसी

    सम्मेलन के दौरान मतांतरित हो चुके 200 किन्नरों की घर वापसी का भी दावा किया गया। मंच से कहा गया कि मुस्लिम बने किन्नरों ने शुद्धीकरण की प्रक्रिया के साथ पुनः सनातन धर्म स्वीकार किया है।

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    मप्र में ही बना था किन्नर अखाड़ा

    सनातन परंपरा में संन्यासियों के 13 अखाड़े हैं। इनका समन्वय अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद करती है। इन अखाड़ों के समानांतर किन्नर अखाड़े की शुरुआत 2016 के सिंहस्थ से ठीक पहले हुई। 2015 में किन्नर अखाड़ा अस्तित्व में आ गया। 2019 में प्रयागराज कुंभ में इस अखाड़े को जूना अखाड़े से संबद्ध बताकर शाही स्नान की अनुमति मिली थी। बाद में जूना अखाड़े में इसे लेकर मतभेद खड़े हो गए।

    विद्वानों ने जताई आपत्ति, कहा- परंपरागत पीठ सिर्फ चार

    किन्नरों की पीठ और उसके शंकराचार्य बनाने का विरोध करते हुए महामंडलेश्वर मनेश्वरनंद महाराज ने कहा है कि शंकराचार्य की पीठों की अनुमति के बिना कोई नई पीठ नहीं बन सकती। आयोजकों को सभी अखाड़ों में जाकर इसके लिए अनुमति लेनी चाहिए थी। उनके प्रतिनिधि या पीठाधीश आते तो सम्मेलन को मान्यता मिलती। महाकुंभ में भी ममता कुलकर्णी के महामंडलेश्वर बनाने का विरोध हो चुका है।

    वहीं, भोपाल में ज्योतिष मठ संस्थान के संचालक पंडित विनोद गौतम का कहना है कि सनातन परंपरा में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मूल पीठ हैं। पांचवां पीठ हो ही नहीं सकता। जो मठ का संविधान होता है, उसके अनुसार चार पीठ पर ही शंकराचार्य हो सकते हैं। पांचवां शंकराचार्य स्वीकार नहीं है। हमें ऐसी घोषणा पर आपत्ति है।

    शंकराचार्यों के नियम मनुष्यों पर, किन्नरों पर नहीं : अजय दास

    विरोध पर किन्नर अखाड़ा के संस्थापक अजय दास का कहना है कि शंकराचार्य ने चार पीठों की स्थापना कर पुजारी नियुक्त किए थे। शंकराचार्य को लेकर कोई स्पष्ट प्रविधान नहीं है। उनके बनाए नियम मनुष्यों पर लागू होते हैं, किन्नरों पर नहीं, क्योंकि किन्नर मनुष्यों से ऊपर और देवतुल्य हैं। अभी तक बने शंकराचार्यों ने किन्नरों की कभी कोई चिंता नहीं की है।