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    दिग्विजय के खिलाफ कांग्रेस में मुखर होने लगे सुर, प्रदेश महासचिव निधि चतुर्वेदी ने साधा निशाना; बोलीं- 'पुत्रमोह में भूले पार्टी अनुशासन'

    Updated: Wed, 01 Jul 2026 07:03 PM (IST)

    कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी ने उज्जैन भूमि विवाद पर जीतू पटवारी के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी के लिए दिग्विजय सिंह पर निशाना साधा है। उन्होंने दिग्व ...और पढ़ें

    दिग्विजय सिंह (फाइल फोटो)

    दिग्विजय सिंह (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह पर सार्वजनिक विरोध का आरोप लगाया।

    2. उज्जैन भूमि विवाद पर जीतू पटवारी के खिलाफ बयानबाजी की निंदा।

    3. 'पुत्र-मोह' में पार्टी अनुशासन तोड़ने का आरोप लगाया।

    डिजिटल डेस्क, छतरपुर। उज्जैन में वीर भारत न्यास की जमीन को लेकर कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी से इतर राय रखने वाले पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के खिलाफ पार्टी में सुर मुखर होते जा रहे हैं। कभी दिग्विजय सिंह के मित्र रहे सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी और कांग्रेस में प्रदेश महासचिव निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह और उनके बेटे जयवर्धन सिंह पर तीखा फेसबुक पोस्ट किया है।

    सही-गलत जांच का विषय, लेकिन सार्वजनिक विरोध क्यों?

    उन्होंने लिखा है कि उज्जैन के भूमि विवाद और वीर भारत न्यास के मामले में सच क्या है और झूठ क्या, कौन सही है और कौन गलत, यह जांच का विषय हो सकता है, लेकिन एक बात जिसे देखकर आज हर कांग्रेसी का सिर शर्म से झुक गया है, वह यह है कि दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता को अपने ही प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ इस तरह सार्वजनिक रूप से मोर्चा खोलने और अपशब्दों का इस्तेमाल करने की क्या ज़रूरत आ पड़ी?

    अगर जीतू पटवारी कहीं गलत भी थे, तो एक वरिष्ठ और मार्गदर्शक होने के नाते दिग्विजय सिंह जी उन्हें आमने-सामने बैठकर या फ़ोन करके बता सकते थे। हाथ में फ़ाइल लेकर, विशेष रूप से उज्जैन जाकर और प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर पत्रकारों के सामने इस बात को उछालने का क्या औचित्य है? इसका जवाब आज संगठन का हर सच्चा कार्यकर्ता जानना चाहता है।

    पुत्र-मोह का लगाया आरोप

    निधि ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि दिग्विजय सिंह जी की यह छटपटाहट, यह गुस्सा और यह अमर्यादित आचरण और कुछ नहीं, बल्कि 'पुत्र-मोह' में उठाया गया एक बेहद अशोभनीय, पीड़ादायक और निंदनीय कदम है। बेटे जयवर्धन सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाने की महत्वाकांक्षा में वह भूल चुके हैं कि पार्टी का अनुशासन क्या होता है। जब भी कांग्रेस मज़बूती से खड़ी होने की कोशिश करती है, इनके ऐसे गैर-जिम्मेदाराना वक्तव्य पार्टी के लिए एक नया संकट खड़ा कर देते हैं।

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    हार के लिए अंदरूनी गुटबाजी को ठहराया जिम्मेदार

    इन्हीं व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और अंदरूनी खींचतान के चलते साल 2020 में हमारी सरकार गिरी थी, और 2023 और 2024 के चुनावों में भी कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। हालिया राज्यसभा चुनाव में जो कुछ भी हुआ, वह तो जगजाहिर है।

    इस तरह के 'स्लीपर सेल' से बचने के लिए राहुल गांधी जी बार-बार संगठन को चेताते आ रहे हैं। यह अनिवार्य है कि नेतृत्व तुरंत दिग्विजय सिंह के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करे।