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    MP में स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव: जनजातीय कार्य विभाग के स्कूल भी शिक्षा विभाग ही चलाएगा, 24000 से ज्यादा विद्यालय होंगे मर्ज

    By Vaibhav SridharEdited By: Ravindra Soni
    Updated: Wed, 17 Jun 2026 05:01 PM (IST)

    मध्य प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के लिए जनजातीय कार्य विभाग के 24,196 स्कूलों का स्कूल शिक्षा विभाग में विलय किया जा ...और पढ़ें

    मप्र में आदिवासी विद्यालय होंगे मर्ज (प्रतीकात्मक चित्र)

    मप्र में आदिवासी विद्यालय होंगे मर्ज (प्रतीकात्मक चित्र)

    HighLights

    1. जनजातीय कार्य विभाग के 24,196 स्कूल होंगे मर्ज।

    2. शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक एकरूपता लाना उद्देश्य।

    3. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर प्रस्ताव तैयार।

    वैभव श्रीधर, भोपाल। शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के लिए मध्य प्रदेश में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। स्कूल शिक्षा व्यवस्था अब एक ही विभाग के अधीन होगी। अभी स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा अलग-अलग स्कूल संचालित किए जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा है कि स्कूल शिक्षा विभाग ही स्कूली शिक्षा का पूरा काम देखे। इसके लिए जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित किए जा रहे 24,196 स्कूलों का मर्जर स्कूल शिक्षा विभाग में किया जाएगा।

    स्कूल शिक्षा विभाग ने तैयार किया प्रस्ताव

    यह काम चरणबद्ध तरीके से होगा, जिसमें चार से पांच वर्ष लग सकते हैं। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने कैबिनेट के लिए प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे अभिमत प्राप्त करने के लिए जनजातीय कार्य विभाग को भेजा जा रहा है। यहां से जो अभिमत प्राप्त होगा, उसके आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

    प्रदेश में इस सोच के साथ 89 आदिवासी विकासखंडों में स्कूल शिक्षा की व्यवस्था जनजातीय कार्य विभाग को दी गई थी कि वह ध्यान केंद्रित करके काम करेगा, जिसका लाभ आदिवासी समुदाय को होगा। मगर इसके अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। हुआ यह कि एक नई व्यवस्था खड़ी हो गई। नियम ऐसे हो गए कि जो शिक्षक जिस स्कूल में जमा, वो वहीं का होकर रह गया। इसका असर गुणवत्ता पर भी पड़ा। वहीं, स्कूल शिक्षा विभाग जो निर्देश देता है, उसका क्रियान्वयन भी ठीक से नहीं हो पाता है। हालांकि, पिछले वर्षों में जनजातीय कार्य विभाग के स्कूलों के परिणाम में सुधार हुआ है।

    शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता लाने की कवायद

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा है कि शिक्षा व्यवस्था में एकरूपता रहे। इसके लिए आवश्यक है कि प्रशासनिक नियंत्रण एक ही विभाग देखे। इसके लिए आवश्यक है कि जनजातीय कार्य विभाग के स्कूलों का मर्जर (विलीनकरण) स्कूल शिक्षा विभाग में हो जाए। मुख्यमंत्री सचिवालय ने इस काम को प्राथमिकता में रखा है और पिछले दिनों समीक्षा में स्कूल शिक्षा विभाग को इस पर आगे बढ़ने के निर्देश दिए गए, जिसके बाद कैबिनेट प्रस्ताव तैयार किया गया है।

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    क्या और कैसे होगा

    • स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर अभिमत के लिए जनजातीय कार्य विभाग को भेजा है। वहां से सहमति का अभिमत प्राप्त होने के बाद वित्त विभाग को भेजा जाएगा। यदि सब-कुछ ठीक रहा तो फिर इसे कैबिनेट की बैठक में निर्णय के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
    • प्रस्ताव के अनुसार एकसाथ सब नहीं होगा। स्कूल शिक्षा विभाग चरणबद्ध तरीके से काम करेगा।
    • सबसे पहले जनजातीय कार्य विभाग से स्कूलों का प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में लेगा यानी दिशानिर्देश आदि प्रशासनिक व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग के हिसाब से लागू होगी।
    • नई जो भी भर्तियां होनी हैं, वो स्कूल शिक्षा के माध्यम से होंगी।
    • सबसे अंत में वर्तमान स्थापना को हाथ में लेने के लिए प्रक्रिया निर्धारित होगी क्योंकि वहां के भर्ती नियम और प्रक्रिया आवश्यक नहीं कि एक हों।
    • साथ ही जो कोर्ट में प्रकरण चल रहे हैं, उन्हें देखा जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर कमेटी बनेगी।

    आसान नहीं राह

    जिस तरह से दूसरे विभाग आसानी से आपस में मिला दिए जाते हैं वैसा इस मामले में हो, यह इतना आसान भी नहीं है। आदिवासियों से जुड़े संवेदनशील होते हैं इसलिए सरकार भी फूंक-फूंककर कदम रखती है। अभी प्रक्रिया प्रारंभ ही हुई है और कांग्रेस की ओर से सवाल भी उठाए जाने लगे हैं।

    आदिवासी बहुल जिले धार के मनावर विधानसभा क्षेत्र से विधायक और जय युवा आदिवासी शक्ति संगठन से जुड़े डॉ. हिरालाल अलावा का कहना है कि सरकार पहले ही आदिवासियों के साथ भेदभाव करती आ रही है। उसके लिए बनाए प्रविधान आज तक पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं। आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा सहित अन्य व्यवस्थाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए जनजातीय कार्य विभाग बनाया गया। इनके द्वारा स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार से विशेष निधि मिलती है। आदिवासी उप योजनाके अंतर्गत विभिन्न प्रविधान होते हैं। स्कूल शिक्षा विभाग में मर्जर से स्वायत्ता समाप्त हो जाएगी और फोकस होकर जो काम हो रहा था, वह नहीं होगा। इस निर्णय का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।

    प्रदेश में स्कूलों की स्थिति

    स्कूल शिक्षा विभाग
    प्राथमिक विद्यालय : 60,377
    माध्यमिक विद्यालय : 43,163
    उच्च माध्यमिक विद्यालय : 18,414

    जनजातीय कार्य विभाग
    प्राथमिक विद्यालय : 17,594
    माध्यमिक विद्यालय : 5,493
    उच्च माध्यमिक विद्यालय : 1,109