MP में किसानों को बड़ी राहत: अब एक बार में ले सकेंगे पात्रता अनुसार मनचाही मात्रा में खाद, मोबाइल से बनेगा टोकन
मध्य प्रदेश में किसानों को खाद वितरण में आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए ई-विकास प्रणाली 2.0 लागू ...और पढ़ें

-प्रतीकात्मक चित्र।
HighLights
किसान अब मोबाइल से टोकन बनाकर मनचाही खाद ले सकेंगे।
अतिरिक्त खाद के लिए कारण बताने की बाध्यता समाप्त की गई।
प्रति हेक्टेयर के अनुसार खाद की गणना, भ्रम की स्थिति खत्म।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। प्रदेश में पर्याप्त खाद होने के बाद भी किसान परेशान होते हैं। यह स्थिति न बने, इसके लिए ई-विकास (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) प्रणाली बनाई गई, जिसमें ई-टोकन के माध्यम से खाद बिक्री की व्यवस्था की गई। इसमें भी परेशानी आई, जिसे दूर करने के लिए मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने कृषि उत्पादन आयुक्त केसी गुप्ता की अध्यक्षता में समिति बनाई, जिसकी अनुशंसा पर कृषि विभाग ने ई-विकास प्रणाली 2.0 तैयार की है, जो गुरुवार से लागू होगी।
किसानों को मिलेगी ये सुविधा
इसमें किसान अब एक बार में ही पात्रता के अनुसार मनचाही मात्रा में खाद ले सकेंगे। मोबाइल पर ही टोकन बनाने की सुविधा मिलेगी। यदि प्रणाली से संबंधित कोई समस्या है तो उसे हेल्पलाइन नंबर 7880223344 पर सुबह दस से शाम छह बजे तक दर्ज कराया जा सकेगा। इसके माध्यम से उनकी समस्या का समाधान कार्यालयीन समय में किया जाएगा।
अतिरिक्त खाद के लिए नहीं बताना होगा 50 शब्दों में कारण
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नई व्यवस्था में यदि किसान को अतिरिक्त खाद लेनी है तो 50 शब्दों में कारण लिखने की बाध्यता को भी हटा दिया है। पहली बार में वह 25 प्रतिशत अतिरिक्त खाद खरीद सकेगा। राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) के गोदाम पर 300 टोकन प्रतिदिन से अधिक टोकन बनाने की सुविधा भी दी गई है।
प्रति हेक्टेयर के अनुसार होगी गणना
ई-विकास प्रणाली में खाद की गणना अलग-अलग होती थी। इसे समाप्त करके अब प्रति हेक्टेयर के अनुसार कर दी गई है। इससे भ्रम की स्थिति समाप्त होगी यानी अलग-अलग खाद की जानकारी देने के स्थान पर यह बताया जाएगा कि प्रति हेक्टेयर में कुल इतनी बोरी उवर्रक लगेगा।
24 घंटे बाद निरस्त कर सकते हैं टोकन
किसान द्वारा टोकन बनाने के 24 घंटे बाद इसे निरस्त करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। फसल खराब होने पर किसान फिर से खाद की मांग कर सकेगा। तहसीलदार या अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को 48 घंटे के भीतर इस पर निर्णय लेना होगा।
मनपसंद खाद समूह का कर सकते हैं चयन
पोर्टल पर फसलवार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की अनुशंसा अनुसार विभिन्न उर्वरक समूह की जानकारी प्रदर्शित की जा रही है। इससे किसान मनपसंद उर्वरक के समूह का चयन कर सकेगा। मार्कफेड के डबल लाक केंद्रों में अधिकतम उर्वरक का भंडारण किया जाएगा।
वाट्सएप से टोकन जनरेट करने की सुविधा जल्द
ई-विकास 2.0 से मोबाइल पर वाट्सएप द्वारा टोकन जनरेट करने की सुविधा जल्द ही उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें किसान वाट्सएप पर मदद लिखकर टोकन, रिटेलर, उर्वरक, उठाव तिथि एवं टोकन की वैधता की जानकारी प्राप्त करके उर्वरक क्रय कर सकेगा। वहीं, भारत सरकार से एकीकृत खाद प्रबंधन पोर्टल एवं ई-विकास पोर्टल को एकीकरण करने, दो विक्रय केंद्रों के पाइंट आफ सेल्स मशीन से उर्वरक लेने पर 60 मिनट की बाध्यता को समाप्त करने के लिए भारत सरकार से अनुरोध भी किया गया है।
फार्मर आईडी बनाने, अग्रिम उवर्रक उठाव को लेकर चलेगा अभियान
प्रदेश में सभी किसानों की फार्मर आईडी बनाने के लिए 20 अगस्त (गुरुवार) से अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान रबी फसलों के लिए खाद के अग्रिम उठाव के साथ प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति का सदस्य भी बनाया जाएगा।
मप्र के पास 4.39 लाख टन यूरिया का भंडार
प्रदेश सरकार का दावा है कि खाद की कोई कमी नहीं है। एक अप्रैल से अभी तक 13.18 लाख टन यूरिया किसानों को दिया जा चुका है। 4.39 लाख टन का भंडार है। जबकि, गत वर्ष यह भंडार 1.80 लाख टन था। इसी तरह डीएपी एवं एनपीके 7.23 लाख टन देने के बाद 4.20 लाख टन की उपलब्धता है। सिंगल सुपर फास्फेट 3.69 लाख टन किसानों ने उठा लिया है। जबकि, 3.17 लाख टन रखा हुआ है।
