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    MP में बाल विवाह रोकने के लिए अब ग्रामीण स्तर तक प्रयास, गांव-गांव तैनात होंगे रोकथाम अधिकारी

    Updated: Mon, 11 May 2026 06:09 PM (IST)

    मध्य प्रदेश सरकार बाल विवाह रोकने के लिए पहली बार ग्राम स्तर तक बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों की नियुक्ति कर रही है। ये अधिकारी सूचना मिलने पर मौके पर ...और पढ़ें

    बाल विवाह रोकथाम के जतन (प्रतीकात्मक चित्र)

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    राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में बाल विवाह रोकने के लिए सरकार अब जमीनी स्तर पर सख्त कदम उठाने जा रही है। लगातार सामने आ रहे बाल विवाह के मामलों को देखते हुए पहली बार ग्राम स्तर तक बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में बाल विवाह की सूचना मिलते ही पुलिस के साथ मौके पर पहुंचकर शादी रुकवा सकेंगे।

    ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में अलग-अलग अधिकारी

    महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। नए प्रावधानों के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अलग-अलग स्तर पर अधिकारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी घोषित किया गया है। इन्हें बाल विवाह रोकथाम अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी शक्तियां प्रदान की गई हैं।

    जानकारी मिलने पर करेंगे त्वरित कार्रवाई

    सरकार के अनुसार यदि किसी क्षेत्र में बाल विवाह की जानकारी मिलती है तो संबंधित अधिकारी तुरंत कार्रवाई करेंगे। जरूरत पड़ने पर वे निषेधाज्ञा (इंजक्शन) आदेश भी जारी कर सकेंगे, जिससे बाल विवाह अमान्य माना जाएगा। इतना ही नहीं, बाल विवाह कराने, सहयोग करने या इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

    इन्हें सौंपी जिम्मेदारी

    ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व निरीक्षक, महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षक और पटवारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं शहरी क्षेत्रों में नगर निगम के जोनल अधिकारी, राजस्व अधिकारी, सहायक राजस्व अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी और नगरपालिका व नगर परिषद के विभिन्न राजस्व एवं स्वच्छता अधिकारियों को इस कार्य के लिए अधिकृत किया गया है।

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    इसके अलावा जिला स्तर पर कलेक्टर, अनुभाग स्तर पर एसडीएम तथा ब्लॉक स्तर पर तहसीलदार, नायब तहसीलदार, जनपद सीईओ और महिला बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी पहले से ही इस कानून के तहत कार्रवाई के लिए सक्षम अधिकारी हैं। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ने से बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

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    2020 से 2025 के बीच बाल विवाह के 2,916  मामले

    प्रदेश में बाल विवाह के वर्ष 2025 में 538 मामले दर्ज किए गए। वहीं 2020-2025 के बीच 2,916 नाबालिगों की शादी के मामले सामने आए, जिनमें 2020 में 366 की तुलना में 2025 तक 47 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।