MP में बेकाबू हुई अवैध बसाहटें, खेतों से लेकर ग्रीन बेल्ट तक कब्जे; अब चलेगा सख्त कानून का हंटर
मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों की संख्या बेकाबू हो रही है, सरकार के पास सटीक आंकड़े नहीं हैं और 2022 ...और पढ़ें

पनप रहीं अवैध कॉलोनियां (प्रतीकात्मक चित्र)
HighLights
मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों की संख्या बेकाबू।
ग्रीन बेल्ट और सरकारी भूमि पर भी कब्जे।
नए कानून में सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान।
राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों का विस्तार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि सरकार के पास इनकी वास्तविक और अद्यतन संख्या का कोई प्रमाणिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। हाल ही में मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में जब प्रदेशभर की अवैध कॉलोनियों का ब्यौरा मांगा गया तो संबंधित अधिकारी स्पष्ट आंकड़े प्रस्तुत नहीं कर सके।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, प्रदेश में वर्तमान समय में 2,500 से अधिक नई अवैध कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। इस बढ़ती समस्या पर लगाम लगाने के लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग अब नया कानून लाने की तैयारी कर रहा है, जिसमें अवैध कॉलोनी विकसित करने वाले कॉलोनाइजरों के खिलाफ कठोर दंडात्मक प्रावधान शामिल किए गए हैं।
दस साल पहले यह थी स्थिति
वर्ष 2016 में नगरीय प्रशासन विभाग ने पूरे प्रदेश में 7,981 अवैध कॉलोनियों की पहचान की थी। इनमें से 3,155 कॉलोनियां सिर्फ 16 नगर निगम क्षेत्रों में चिन्हित हुई थीं। उस समय ग्वालियर में सबसे अधिक 696 अवैध कॉलोनियां दर्ज की गई थीं, जबकि इंदौर में 636, खंडवा में 338, भोपाल में 320 और जबलपुर में 224 अवैध कॉलोनियां सामने आई थीं।
बाद में तत्कालीन राज्य सरकार ने वर्ष 2022 तक विकसित अवैध कॉलोनियों को नियमित करने का निर्णय लिया था। इससे बड़ी संख्या में कॉलोनियां वैध हो गईं, लेकिन इसके बाद भी अनधिकृत बसाहटों का सिलसिला नहीं थमा। अधिकारियों के अनुसार, 2022 के बाद से ही ढाई हजार से अधिक नई अवैध कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं।
ग्रीन बेल्ट, शासकीय भूमि पर भी कब्जे
चिंता की बात यह है कि अवैध निर्माण केवल निजी भूमि तक सीमित नहीं हैं। ग्रीन बेल्ट, तालाबों के किनारे, शासकीय भूमि और विभिन्न सरकारी परियोजनाओं के लिए आरक्षित जमीनों पर भी बड़े पैमाने पर अनधिकृत कॉलोनियां बसाई गई हैं। वर्ष 2016 में ही प्रदेश के 16 नगर निगम क्षेत्रों में ऐसी 806 अपात्र कॉलोनियां चिन्हित की गई थीं।
नगरीय निकायों की लापरवाही
इस समस्या को और गंभीर बनाने में नगरीय निकायों की लापरवाही भी सामने आई है। विभाग द्वारा कई बार अद्यतन जानकारी मांगे जाने के बावजूद अधिकांश निकायों ने पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। कुछ गैर-सरकारी आकलनों के मुताबिक प्रदेश में अवैध कॉलोनियों की संख्या अब 30 हजार से अधिक हो सकती है। अकेले भोपाल जिले में ही 600 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों की चर्चा है।
शहरों से सटे इलाकों में ज्यादा समस्या
विशेषज्ञों का मानना है कि नगर निगम और नगर पालिकाओं की सीमाओं से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या सबसे अधिक है। खेतों की जमीन पर बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) की स्वीकृति और बिना स्थानीय निकायों की अनुमति के प्लॉट काटकर बेचे जा रहे हैं। कम कीमत और आसान उपलब्धता के कारण लोग इन कॉलोनियों में निवेश कर रहे हैं, जिससे अवैध बसाहटों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
सख्त कानून की तैयारी
इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने नया कानून तैयार किया है। प्रस्तावित एक्ट के मसौदे में अवैध कॉलोनी विकसित करने पर अधिकतम 10 वर्ष की सजा और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। इतना ही नहीं, अनियमितताओं को नजरअंदाज करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान शामिल किया गया है।
सरकार का मानना है कि सख्त कानूनी व्यवस्था लागू होने के बाद अवैध कॉलोनियों के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी और शहरों के नियोजित विकास को गति मिलेगी।
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