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तेंदुए की खाल, शिकारी और NGO कनेक्शन... Wildlife SOS पर लगे आरोपों की जांच तेज

Published: Tue, 18 Aug 2026 04:56 PM (IST)

मध्य प्रदेश STSF दिल्ली की संस्था 'वाइल्डलाइफ़ SOS' और एक कथित शिकार नेटवर्क के बीच संबंधों की जांच कर रही ...और पढ़ें

10 तेंदुए की खालें जब्त होने के बाद जांच शुरू हुई।

10 तेंदुए की खालें जब्त होने के बाद जांच शुरू हुई।

HighLights

  1. STSF वाइल्डलाइफ़ SOS और शिकार नेटवर्क के संबंधों की जांच कर रही है।

  2. 10 तेंदुए की खालें जब्त होने के बाद जांच शुरू हुई।

  3. वाइल्डलाइफ़ SOS ने सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया।

जागरण संवाददाता, भोपाल। मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फ़ोर्स (STSF) ने दिल्ली की वाइल्डलाइफ़ कंजर्वेशन संस्था 'वाइल्डलाइफ़ SOS' और कथित शिकार करने वाले नेटवर्क के बीच संबंध होने के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। यह जांच 10 तेंदुए की खालें जब्त होने के बाद शुरू की गई है। संस्था ने इन आरोपों को साफ तौर पर खारिज किया है और कहा है कि उनके पास इन आरोपों को गलत साबित करने के लिए दस्तावेज़ी सबूत हैं। इन आरोपों की अभी जांच चल रही है और किसी भी अदालत में ये साबित नहीं हुए हैं।

मामला कैसे शुरू हुआ

यह मामला 23 जुलाई को शुरू हुआ, जब ग्वालियर-आगरा हाईवे पर चार कथित शिकारियों को 10 तेंदुए की खालों के साथ गिरफ्तार किया गया। वाइल्डलाइफ SOS ने अपनी "फॉरेस्ट वॉच" यूनिट के जरिए इस ऑपरेशन का श्रेय लेने का दावा किया था।

चूंकि माना जा रहा था कि खालें मध्य प्रदेश से आई थीं, इसलिए STSF ने एक समानांतर जांच शुरू की। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, दो मुख्य संदिग्धों वाइल्डलाइफ ट्रेडर भगवान सिंह (उर्फ सलीम) और उनके साथी वसीम ने पूछताछ के दौरान बताया कि वे वाइल्डलाइफ़ SOS से जुड़े थे। रिपोर्टों से पता चलता है कि भगवान सिंह कम से कम पांच साल से इस संस्था से जुड़े रहे हैं।

जांच से सामने आए मुख्य बिंदु

जांच अधिकारियों का कहना है कि उन्हें "ठोस डिजिटल सबूत" मिले हैं और वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या ज़ब्ती दिखाने के लिए शिकार की घटनाएं जानबूझकर की गई थीं। जांच का एक मुख्य पहलू यह पता लगाना है कि क्या इस तरीके का इस्तेमाल डोनर्स और ग्रांट्स को आकर्षित करने के लिए शिकार-विरोधी मज़बूत प्रोफ़ाइल बनाने के लिए किया गया था। अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या शिवपुरी और मुरैना के वन क्षेत्रों में लेग-होल्ड ट्रैप (पैर फंसाने वाले जाल) बांटने के लिए NGO की गाड़ी का इस्तेमाल किया गया था। बताया जा रहा है कि यह गाड़ी अभी STSF की कस्टडी में है।

जांच के मुख्य बिंदु इस प्रकार 

शिवपुरी और मुरैना के जंगलों में कई जगहों पर तेंदुए के अवशेष दबे हुए मिले। इन्हें 23 जुलाई को ज़ब्त की गई खालों से DNA मैचिंग के लिए वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया, देहरादून भेजा गया है। - हरियाणा से लाए गए तीन लेग-होल्ड ट्रैप बरामद किए गए हैं। जांच में इन ट्रैप्स का संबंध भगवान सिंह और उसके बाद वसीम से जुड़ा पाया गया।

रिकॉर्ड बताते हैं कि दोनों व्यक्ति 2023 में तमिलनाडु के सत्यमंगलम वन क्षेत्र में हुई ज़ब्ती के दौरान मौजूद थे—यह ऑपरेशन वाइल्डलाइफ़ SOS के नाम दर्ज था। STSF ने वाइल्डलाइफ SOS के CEO कार्तिक सत्यनारायण को नोटिस जारी कर 17 अगस्त को शिवपुरी में जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया।

मध्य प्रदेश की चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन समिता राजोरा ने पुष्टि की कि पूछताछ के दौरान दो मुख्य आरोपियों ने सत्यनारायण का नाम लिया था, जिसके बाद यह समन जारी किया गया। उन्होंने बताया कि जंगल की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संभावित तस्करी नेटवर्क की जांच के लिए वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) के साथ तालमेल बिठाया जा रहा है।

वाइल्डलाइफ SOS का पक्ष

17 अगस्त को जारी एक बयान में, वाइल्डलाइफ SOS ने सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। संगठन ने दावा किया कि उसके पास रिकॉर्ड और पर्याप्त सबूत हैं, और कहा कि निष्पक्ष जांच में ये आरोप टिक नहीं पाएंगे। आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए, संगठन ने जंगल में रहने वाले समुदायों के साथ मिलकर किए गए अपने कामों का ज़िक्र किया।

संगठन ने यह भी चेतावनी दी कि अवैध शिकार रोकने से जुड़े सही खुफिया काम को वाइल्डलाइफ क्राइम (वन्यजीव अपराध) मानने से भविष्य में कानून लागू करने की कोशिशों पर बुरा असर पड़ सकता है। वाइल्डलाइफ SOS ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।

NGO की पृष्ठभूमि

वाइल्डलाइफ SOS की स्थापना 1995 में कार्तिक सत्यनारायण और गीता शेषमणि ने की थी। यह संगठन अलग-अलग राज्य सरकारों के साथ हुए समझौतों (MoUs) के ज़रिए पूरे भारत में कई वाइल्डलाइफ रेस्क्यू सेंटर चलाता है। अधिकारियों के अनुसार, इन समझौतों, जिनमें भोपाल में प्रस्तावित भालू रेस्क्यू सेंटर के लिए एक लंबित MoU भी शामिल है, उसकी अभी समीक्षा की जा रही है।