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MP में शकर के दाम पर सरकार की सख्ती: डीलर 4 हजार क्विंटल से ज्यादा नहीं रख सकेंगे स्टॉक, PDS में वितरण भी बंद

Published: Tue, 18 Aug 2026 06:38 PM (IST)

केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन में शकर की बढ़ती कीमतों और जमाखोरी रोकने के लिए 30 नवंबर तक डीलरों के ...और पढ़ें

-सांकेतिक तस्वीर।

-सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. डीलरों के लिए 4,000 क्विंटल शकर की स्टॉक सीमा तय।

  2. प्राप्त शकर का 30 दिन के भीतर विक्रय अनिवार्य किया गया।

  3. मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल से पीडीएस शकर वितरण बंद।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। त्योहारी सीजन में शकर की बढ़ती कीमत और संभावित जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 30 नवंबर तक देशभर में शकर डीलरों के लिए अधिकतम स्टॉक सीमा तय कर दी है। अब कोई भी डीलर 4,000 क्विंटल से अधिक शकर का भंडारण नहीं कर सकता। इसके साथ ही डीलर को शकर प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर उसका विक्रय करना अनिवार्य है।

अब मध्य प्रदेश में भी यही व्यवस्था लागू की जा रही है। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग इसके लिए अधिसूचना जारी करेगा। सरकार का उद्देश्य बाजार में शकर की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और त्योहारी मांग के दौरान कीमतों में अनावश्यक तेजी को रोकना है।

थोक में 55, फुटकर में 60 रुपये किलो के करीब भाव

वर्तमान में शकर का थोक भाव करीब 55 रुपये प्रति किलो चल रहा है, जबकि फुटकर बाजार में इसकी कीमत लगभग 60 रुपये किलो तक पहुंच गई है। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने के साथ कीमतों में और उछाल की आशंका को देखते हुए केंद्र ने स्टॉक लिमिट लागू की है।

खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, केंद्र सरकार के निर्देश सभी राज्यों के लिए हैं। मध्य प्रदेश में भी इन्हीं प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

पीडीएस में अप्रैल से बंद है शकर का वितरण

दूसरी ओर, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाली शकर का वितरण भी मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल से बंद है। पहले अंत्योदय परिवारों को उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से 20 रुपये प्रति किलो की दर से हर महीने शकर उपलब्ध कराई जाती थी।

केंद्र सरकार द्वारा शकर पर मिलने वाला अनुदान बंद किए जाने के बाद यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई। सरकार का तर्क है कि सब्सिडी खत्म होने से बाजार भाव और उचित मूल्य की दुकान पर उपलब्ध शकर के मूल्य में कोई खास अंतर नहीं रह गया था।

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त्योहारी सीजन में जमाखोरी पर नजर

सरकार की नई स्टॉक सीमा का मुख्य उद्देश्य शकर की कृत्रिम कमी पैदा करने वाली जमाखोरी पर रोक लगाना है। डीलरों के लिए स्टॉक की अधिकतम सीमा तय होने और 30 दिन के भीतर शकर बेचने की अनिवार्यता से बाजार में आपूर्ति बनी रहने की उम्मीद है। इससे त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई कीमतों का सामना करने से राहत मिलने की संभावना है।